ऑस्ट्रेलिया के सबसे पुराने वैज्ञानिक माने जाने वाले डेविड गुडॉल ने गुरुवार को खुशी-खुशी दुनिया को अलविदा कह दिया. डेविड 104 साल के थे. वो ऑस्ट्रेलिया के जाने-माने पर्यावरणविद् और वनस्पति वैज्ञानिक थे. उन्होंने बृहस्पतिवार को स्विट्ज़रलैण्ड के एक इच्छामृत्यु केंद्र में अपनी आखिरी सांसें लीं.
104 साल के साइंटिस्ट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, मरने की वजह बताई और ख़ुशी ख़ुशी मरने के लिए चला गया
दुःख सिर्फ एक बात का था कि मौत हासिल करने के लिए दूसरे देश जाना पड़ा.


क्यों लिया इच्छामृत्यु का फैसला?
अपनी मौत के पहले डेविड ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि,
'मैंने अपनी जिंदगी का बेहतरीन हिस्सा जी लिया है. मैंने जिंदगी भर कई शोध कार्य किये. मेरी जिंदगी में अब कुछ भी जीने लायक नहीं बचा है. अब कोई इच्छा नहीं बची है. अब मैं मरना चाहता हूं. मुझे इच्छामृत्यु का कोई अफसोस नहीं है.'
डेविड ने मशहूर संगीतकार बीथोवेन की एक धुन ‘ऑड टू जॉय’ सुनते हुए अपनी आंखें बंद की. इंजेक्शन दिए जाने के दो मिनट के अंदर ही उनकी मौत हो गई.

डेविड गुडॉल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सबको अलविदा कहा.
मरने से पहले सिर्फ एक अफसोस
डेविड ने कहा कि,
'मरने से पहले मुझे सिर्फ एक अफसोस है कि मैं अपने घर से दूर हूं. मैं ऑस्ट्रेलिया में ही मरना चाहता था. मुझे दुख है कि अपना जीवन खत्म करने के लिए मुझे एक लंबा रास्ता तय करना पड़ा.'
डेविड, लोगों की मदद से 20 हजार डॉलर जुटाकर पर्थ से स्विट्ज़रलैंड के लिए रवाना हुए. स्विट्ज़रलैंड ऐसा देश है जो अपने देश के साथ-साथ बाहरी देशों के नागरिकों को भी इच्छामृत्यु के लिए कानूनी इजाजत देता है. दरअसल, डेविड को कोई ऐसी बीमारी नहीं थी, जिसका इलाज नहीं हो सकता. इस वजह से उन्हें ऑस्ट्रेलिया में इच्छामृत्यु से रोक दिया गया. जिसके बाद उन्हें स्विट्ज़रलैंड की एक क्लीनिक में जाना पड़ा जो इच्छामृत्यु में मदद करता है.
डेविड ने उम्मीद जताई है कि इस घटना के बाद ऑस्ट्रेलिया में लोग इच्छामृत्यु के लिए लिबरल होंगे. ऑस्ट्रेलिया के साथ-साथ बाकी देश भी इच्छामृत्यु के कानून पर दोबारा सोचेंगे.
क्या है इच्छामृत्यु (यूथेनेशिया)
इच्छामृत्यु का मतलब है अपनी मर्जी से जान देने का कानूनी अधिकार. ये दो किस्म का होता है- पहला है ऐक्टिव और दूसरा पैसिव.
ऐक्टिव यूथेनेशिया या इच्छामृत्यु में इंसान को जहर का इंजेक्शन दिया जाता है. पैसिव इच्छामृत्यु की इजाजत केवल गंभीर बीमीरियों में दी जाती है. इसमें मरीज का लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटा दिया जाता है. भारत में पैसिव इच्छामृत्यु को हाल ही में कानूनी मान्यता मिली है.
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