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ईरान ने नए हथियार से पहली बार में ही MQ-9 ड्रोन गिराया, US की नई मुसीबत बनेगा 'अराश-ए-कमंगीर'?

Iran air defence system: होर्मुज के ऊपर एक 'दुश्मन' जासूसी ड्रोन को इंटरसेप्ट करने के लिए स्वदेशी सिस्टम 'अराश-ए-कमंगीर' का इस्तेमाल किया गया. ये सिस्टम 'स्टेल्थ-डिटेक्शन' (छिपी हुई चीजों का पता लगाने) की क्षमता वाला बताया गया. ईरान ने इस सिस्टम के बारे में कोई अन्य तकनीकी जानकारी नहीं दी है.

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ईरान ने दावा किया कि उसने अमेरिका का ड्रोन इंटरसेप्ट कर दिया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर- Unsplash.com)

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में केशप आइलैंड के पास अमेरिका का MQ-9 रीपर ड्रोन तैनात था. जिसे ईरान के नए डिफेंस सिस्टम 'अराश-ए-कमंगीर' ने इंटरसेप्ट किया तो खबरें बन गईं. इस नए सिस्टम का युद्ध में पहली बार इस्तेमाल हुआ है. ईरान की एक न्यूज एजेंसी ने ये दावा किया है.

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अल जजीरा की रिपोर्ट ने ईरानी एजेंसी के हवाले से लिखा कि होर्मुज के ऊपर एक 'दुश्मन' जासूसी ड्रोन को इंटरसेप्ट करने के लिए स्वदेशी सिस्टम 'अराश-ए-कमंगीर' का इस्तेमाल किया गया. ये सिस्टम 'स्टेल्थ-डिटेक्शन' (छिपी हुई चीजों का पता लगाने) की क्षमता वाला बताया गया. ईरान ने इस सिस्टम के बारे में कोई अन्य तकनीकी जानकारी नहीं दी है.

दुश्मन देशों के लिए चेतावनी

ईरानी मीडिया ने दावा किया कि ये ईरानी हवाई क्षेत्र और समुद्री सीमाओं के पास उड़ान भरने वाले दुश्मन विमानों के लिए एक चेतावनी थी. एजेंसी ने कुछ अनाम अधिकारियों के हवाले से कहा,

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"यह ऑपरेशन ईरान की तरफ से एक साफ और कड़ा संदेश है."

क्या है अराश-ए-कमंगीर का मतलब?

नए इंटरसेप्टर सिस्टम अराश-ए-कमंगीर का नाम फारसी पौराणिक कथाओं के एक नायक के नाम पर रखा गया है, जिसने ईरान और मध्य एशिया के बीच सीमा निर्धारित करने के लिए एक तीर चलाया था. रिपोर्ट के मुताबिक, अराश ने अंतरराष्ट्रीय वर्चस्व के खिलाफ लड़ाई में ईरान की मदद की.

पारंपरिक तरीके से काम नहीं करता ये सिस्टम

अल जजीरा से बात करते हुए विश्लेषकों ने कहा कि ये नया इंटरसेप्शन सिस्टम कोई क्रांतिकारी हथियार नहीं लगता है. लेकिन वे ये भी बताते हैं कि ईरान ऐसे हथियार और डिफेंस सिस्टम बनाने में भारी निवेश कर रहा है जो न केवल सस्ते हैं बल्कि उन्हें किसी बड़े रडार सिस्टम के बिना ही लॉन्च किया जा सकता है. ये नए हथियार सस्ते होने के साथ आसानी से ट्रांसपोर्ट होने वाले हैं और पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनाए गए हैं.

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ट्रेडिशनल एयर डिफेंस सिस्टम नेटवर्क रडार और लॉन्च बैटरियों पर निर्भर होते हैं और उन्हें डिटेक्ट करना बहुत मुश्किल नहीं रह गया है. वहीं, सस्ती और छोटी प्रणालियों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना, छिपाना, जल्दी से लॉन्च करना और तेजी से बदलना आसान है.  

रिपोर्ट में बताया गया कि इनमें से कई सिस्टम ऐसे हैं, जो आसमान के एक हिस्से में तब तक चक्कर लगाते रहते हैं, जब तक उन्हें कोई ड्रोन या एयरक्राफ्ट नहीं दिख जाता. अन्य सिस्टम कम दूरी वाले एंटी-ड्रोन या एंटी-एयरक्राफ्ट हथियार हैं, जो एयर डिफेंस बैटरी की तुलना में सस्ते और कम सॉफिस्टिकेटेड होते हैं. लेकिन उन्हें बनाना और बदलना भी आसान होता है.

शायद इसी कारण से अमेरिका का MQ-9 Reaper ड्रोन ईरानी सिस्टम का आसानी से टारगेट बन गया.  

क्या अहम है ये घटना?

अमेरिका-इजरायल ने फरवरी के अंत से शुरू हुई जंग में ईरान के कई ठिकानों पर बमबारी की है. इससे ईरान के कई बड़े एयर डिफेंस सिस्टम नेटवर्क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं. ये सभी पुराने रडार-गाइडेड सर्फेस-टू-एयर में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों के आधार पर बनाए गए थे, जिनमें स्वदेशी बैटरियां और रूस से मिली मिसाइल रक्षा प्रणालियां (जैसे S-300) शामिल थीं.

मगर नए इंटरसेप्शन सिस्टम से पता लगता है कि ईरान के पास अब ऐसे सिस्टम भी हैं, जो सीमित और निचले स्तर का हवाई खतरा पैदा कर सकते है.

अमेरिका ने किया था हमला

अमेरिका ने हाल ही में कथित तौर पर बंदर अब्बास के पास एक ईरानी सैन्य ठिकाने पर नए हमले किए थे. जिसके बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए एक ‘अमेरिकी एयरबेस’ पर हमला करने का दावा किया. ये सब दोनों देशों के बीच चल रही तमाम बातचीतों के बीच हो रहा है.  

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