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चुनाव में 272 लोगों की जान चली गई, वजह पता लगे तो ईवीएम का विरोध करने वाले दहल जाएंगे

ये सबूत है कि बहुत अच्छे वोटिंग परसेंट और बैलेट पेपर से मतदान जानलेवा भी हो सकते हैं.

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फोटो - thelallantop
इंडोनेशिया में चुनावों ने 270 से ज़्यादा जानें ले लीं. जानें चुनाव के काम में गई हैं. हिंसा में नहीं. वो Indonesia है, पश्चिम बंगाल नहीं.
एक वाक्य में ख़बर ये है कि मरने वाले चुनाव से जुड़े काम में बीमार पड़े थे. वजह वही बनी जो पहले चुनाव का सबसे खूबसूरत फैक्ट नज़र आ रही थी. वहां एक ही दिन में दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव हुआ था. इस बार वहां ईवीएम नहीं चली. हाथ से वोट पड़े थे. जो आंखों से देख गिने जाते हैं. जानकारों की भाषा में बैलेट पेपर से हुआ मतदान कहलाती है ये प्रोसेस. जिसकी मांग हमारे यहां भी खूब उठी है. उधर भी उठी थी. पार्टियां आपस में झगड़ पडीं. कुछ ने कहा, बटन दबेगा, कुछ ने कहा ठप्पा लगेगा. सहमति न बन सकी तो बैलेट पेपर पर लौटना तय हुआ. अभी बैलेट पेपर काल बनी हुई है.
इस पूरे कार्यक्रम में काम इतना बढ़ जाता है, इतने कागज़ गिने जाते हैं कि गिनते-गिनते लोगों का दम निकल गया. कल वहां के अफसरों ने बताया कि यही सब होते-करते 272 लोग चल बसे. हमारे यहां के आम चुनाव में 272 को जादुई आंकड़ा माना जाता है. लेकिन इस केस में 272 जादुई तो कतई नहीं है.
Photo - Reuters
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वहां इलेक्शन तो शांति से हो गए थे. सरकारी छुट्टी भी दी गई इसलिए 80% लोगों ने वोट भी कर दिया. वोटर्स का कुल आंकड़ा ठहरा 193 मिलियन वोट. हिंदी में कहें तो 19 करोड़ से ज़्यादा वोटर थे. जिनमें से 80% के वोट आए. सांसदों, उप-राष्ट्र्पति, राष्ट्रपति और असेंबली वाले वोट एक साथ, एक दिन पड़े. ताकि कॉस्ट कटिंग हो. पैसा बचे. इस इलेक्शन की भव्यता ऐसे समझिए कि 20 हज़ार पद हैं. 8 लाख मतदान केंद्र थे और 2 लाख 45 हज़ार सिर चुनावों में खड़े थे. एक वोटर को 5 कागज़ों पर ठप्पा लगाना था. गिनने वालों को मोटा-माटी 77 हज़ार करोड़ कागज़  गिनने थे.
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ये सब हुआ 17 अप्रैल को. फिर 10 रोज़ बाद ये आंकड़ा आया. वहां का जो जनरल इलेक्शन कमीशन है यानी चुनाव आयोग है. उसने बताया कि कुल 1878 लोग बीमार पड़े थे. जिनमें से 272 लोग नतीजे से पहले ही चल बसे. नतीज़ा 22 मई को आना है.
फिलहाल वहां के राष्ट्रपति जोको विडोडो हैं, जिनका दावा है कि इस बार भी चुनाव वही जीतने वाले हैं. हमारे यहां की तरह वहां भी एक्जिट पोल्स का रिवाज़ है. शुरुआती पोल्स बता रहे हैं कि उनको लगभग 55% वोट मिल भी गए हैं.
राष्ट्रपति जोको विडोडो
राष्ट्रपति जोको विडोडो

अब दूसरी तरफ जाइए, माने विपक्ष की तरह. जिनके अगुआ थे प्राबोवो सुबिआंतो. कह तो रहे हैं कि हम ही जीतेंगे लेकिन बैलेट पेपर में भी धांधली का आरोप लगा रहे हैं. उनका कहना है कि धांधली हुई है. सरकार के समर्थन में चुनाव में जो लोग थे, उनने जबरन जोको विडोडो के फेवर में वोट डलवा दिए हैं.
प्राबोवो सुबिआंतो. Photo - Reuters
प्राबोवो सुबिआंतो. Photo - Reuters

अर्थात, ईवीएम से भी दिक्कत है. बैलेट पेपर में भी धांधली के आरोप हैं. जान उस बेचारे की जा रही है जो चुनाव करा रहा है. हाल हमारे यहां भी ऐसा है. ईवीएम बेवफा घोषित कर दी गई है. कल को अगर बैलेट पेपर से वोट पड़े तो उसे भी बेवफा कह दिया जाएगा. अभी 21 पार्टियों के नेताओं ने 6.75 लाख ईवीएम की वीवीपैट पर्चियों के मिलान की बात कही थी. लोग और वोट हमारे यहां भी कम नहीं हैं. पार्टियों के आरोप और सरकार की कारस्तानियां भी कम नहीं हैं. ज़रूरत ये है कि भरोसा रखा जाए और भरोसा जगाया जाए. वर्ना गिनेगा और मरेगा वो, जिसे सबका फैलाया समेटना है.

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