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AC चलाकर कंबल ओढ़ते हों या ऑफिस में ठंड से ठिठुरते हों, आपकी सारी दिक्कतों का इलाज सरकार ने बता दिया है

जानें आपको क्या और कितना फर्क पड़ेगा AC वाला कानून आ जाने से?

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फोटो - thelallantop

जेठ की दुपहरी में:

बिजली मंत्री आर के सिंह चाहते हैं कि एसी का डिफ़ॉल्ट तापमान 24 डिग्री पर सेट कर दिया जाए. बीईई (ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी), जो बिजली मंत्रालय के अधीन आता है, ने एयर कंडीशनर में तापमान 24 डिग्री सेल्सियस निर्धारित करने की सिफारिश की है. इसके पक्ष में आर के सिंह बोले -
एयर कंडीशनर में एक डिग्री तापमान ऊंचा करने से बिजली खपत में छह प्रतिशत तक की कमी आती है.
उन्होंने ये भी बताया कि -
होटल और ऑफिस में तापमान 18 से 21 डिग्री रखा जाता है. यह न केवल तकलीफ देने वाला है बल्कि सेहत के लिए भी अच्छा नहीं है.
उन्होंने जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पर तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रखने के लिए नियम बने हैं. तो चलिए हम आर के सिंह के कथन और उनकी भविष्य की योजना की समीक्षा करते हैं.

ये आराम का मामला है:

(थर्मल कम्फर्ट) ठंड के दिनों में हम आग सेंकते हैं या हीटर, ब्लोवर चलाते हैं. गर्मी में एसी कूलर या पंखा चलाते हैं. कारण सिंपल है क्यूंकि इंसानों के लिए एक तापमान ऐसा होता है जिसमें वो सबसे ज़्यादा आरामदायक महसूस करता है. इस आराम को ही थर्मल कंफर्ट कहते हैं. सामान्यता ये आरामदायक तापमान होता है: 20 से 24 डिग्री के बीच. लेकिन ये कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है. जैसे किसी व्यक्ति के लिए ये उसके मेटाबॉलिज़्म पर निर्भर करता है, साथ ही इस बात पर भी कि उसने क्या और कितने कपड़े पहने हैं. वहीं किसी क्षेत्र के लिए ये वहां की नमी, हवा की गति जैसे कारकों पर निर्भर है. तो इस 24 डिग्री से तापमान जितना बढ़ता जाएगा उतनी दिक्क़तें मानव-मात्र को होती चली जाएंगी. ठीक ऐसा ही तापमान के कम होने पर भी होगा.

ठंडी हवाएं, लहरा के आएं:

(एयर कंडीशनर कैसे काम करता है) जहां कूलर बाहर की हवा को अंदर खींचकर उसे पानी से ठंडा करके कमरे के अंदर फेंकता है, वहीं एसी कमरे की ही हवा को वाष्पीकरण कॉइल के गुज़ारकर ठंडा करता है और इसे कमरे में वापस फैंकता है. इस दौरान ये नमी को इकट्ठा कर कमरे से बाहर भी फैंक देता है. ऐसा लगता है कि एयर कंडीशनर उस तापमान पर ठंडी हवा फैंकता है जिस तापमान पर इसे सेट किया जाता है. लेकिन ऐसा नहीं है. ये एक बहुत कम तापमान की हवा कमरे में फैंकता है और जब तक कमरा हमारे सेट किए गए तापमान के बराबर ठंडा नहीं हो जाता तब तक ये ऐसा करते रहता है. जैसे ही यह कमरे का तापमान उतना कर देता है, जितने पर हमने इसे सेट किया था, उसके बाद ये ठंडा करना बंद कर देता है और केवल अंदर की हवा को रोटेट करता है. ठंडा करने की प्रक्रिया कम्प्रेसर के द्वारा होती है, जबकि रोटेशन का काम पंखे के द्वारा. इस तरह जब धीरे-धीरे कमरे का तापमान फिर चढ़ने लगता है तो कंप्रेसर फिर चालू हो जाता है. ये कंप्रेसर के बंद होने और चालू होने की प्रक्रिया ऑटोमैटिक होती है. और इसके ऑटोमैटिक होने के पीछे हाथ होता है थर्मोस्टेट का. किसी एसी का थर्मोस्टेट दरअसल लगातार कमरे का तापमान जांचता रहता है और जैसे ही कमरे का तापमान हमारे द्वारा सेट किए गए तापमान के बराबर हो जाता है ये कंप्रेसर को बंद कर देता है. यानी जब कंप्रेसर बंद रहता है तो बिजली की खपत केवल एसी के अंदर मौज़ूद पंखे को चलाने भर के लिए होती है.

सम लाइक इट हॉट:

(जितना कम तापमान उतनी ज़्यादा ऊर्जा की खपत) तो साफ़ है कि अगर हमने टेम्प्रेचर 18 डिग्री की बजाय 25 डिग्री सेट किया है तो बिजली की खपत कम होगी. क्यूंकि एक तो कंप्रेसर 8 डिग्री पहले ही बंद हो जाएगा दूसरा उसे अब 25 डिग्री टेम्प्रेचर ही मेंटेन करना पड़ेगा, इसलिए वो काफी देर तक बंद रहेगा और एक लंबे अंतराल के बाद ऑन होगा भी तो थोड़ी देर के लिए. यानी एयर कंडीशनर में बिजली की कितनी खपत होगी इसे निर्धारित करने वाले कई कारक हैं. जैसे - कमरे के अंदर का तापमान, कमरे के बाहर का तापमान, हवा में मौज़ूद नमी और वांछित तापमान. बाकी सारी चीज़ें हम बदल पाएं या नहीं लेकिन वांछित तापमान हम बदल सकते हैं. और उसे 24 डिग्री करके हम काफी बिजली बचा सकते हैं. 24 डिग्री, वैसे भी शरीर के लिए सबसे उचित तापमान है. जिसके बाद न कंबल की ज़रूरत पड़ती है और न एसी की. वांछित तापमान एक डिग्री ऊपर कर देने पर 3 से 4 प्रतिशत बिजली की खपत बचती है.

AC

सबका साथ सबका विकास

(सेंट्रलाइज़ एसी) अब सवाल ये उठता है कि किसी बड़े संस्थान का तापमान कम क्यों होता है. ऊपर जो बताया गया वो था आपका निजी एसी, लेकिन संस्थानों और अच्छे होटलों आदि में सेंट्रलाइज एसी चलता है. सेंट्रलाइज मतलब यूं समझ लीजिये कि हर कमरे या हर केबिन के लिए अलग से एसी नहीं होता. इसके बजाय पूरी बिल्डिंग के लिए एक बड़ा एसी लगा दिया जाता है और उसकी ठंडी हवा को बड़े बड़े पाइप के माध्यम से हर कमरे और हर केबिन तक पहुंचाया जाता है. लेकिन ऐसा नहीं है कि आप हर कमरे का अलग तापमान सेट नहीं कर सकते. सेंट्रलाइज एसी वाले हर कमरे में ये सुविधा मौज़ूद होती है कि वो अपनी सुविधा के अनुसार टेम्प्रेचर सेट कर सके. अब अगर सेंट्रलाइज एसी वाले किसी कमरे को 24 डिग्री तापमान चाहिए और दूसरे कमरे को 20 तो ज़ाहिर है कि बिल्डिंग के सेंट्रलाइज एसी का तापमान 20 डिग्री पर सेट होना चाहिए. तभी दोनों का भला हो पाएगा.

मैं ज़्यादा नहीं मांगता

(संस्थानों में तापमान कम क्यों रहता है) अब मान लीजिए सेंट्रलाइज एसी वाले किसी कमरे में थर्मोस्टेट नहीं है या उस कमरे का थर्मोस्टेट खराब हो गया है तो एसी उस कमरे को उतने तापमान तक ठंडा कर देगा जितने पर सेंट्रलाइज एसी का न्यूनतम तापमान सेट है. यानी ऐसे कमरों में या तो आप एसी चलने की दशा में ठंड से परेशान होंगे या एसी बंद हो जाने की दशा में गर्मी से. कई बार सेंट्रलाइज एसी वाली बिल्डिंग के एसी का तापमान बहुत कम रखा जाता है. क्यूंकि बिल्डिंग के किसी कमरे में ऐसा सामान रखा रहता है जिसके गर्म हो जाने पर उसके खराब हो जाने की आशंका बनी रहती है. जैसे - सर्वर. अब अगर उस सर्वर रूम तक 17 डिग्री तापमान पहुंचाना है तो पूरे सेंट्रलाइज एसी का तापमान 17 डिग्री रखना होगा. बेशक आप अपने कमरे का तापमान 17 डिग्री से ऊपर कितना भी कर सकते हैं. तो उत्तर यही है कि किसी संस्थान के एसी का तापमान कम नहीं होता है बल्कि उस संस्थान में सेंट्रलाइज एसी को मैनेज करने की अच्छी व्यवस्था नहीं होती. यदि आपके संस्थान में भी ऐसा ही है तो उदास होने की ज़रूरत नहीं क्यूंकि मैंने आज तक 12 से अधिक संस्थानों में काम किया है और हर जगह कमोबेश यही दिक्क्त है. ये दिक्क्त थर्मोस्टेट के सही होने पर भी हो सकती है क्यूंकि अगर आपका सेपरेट केबिन नहीं बल्कि एक बड़े से हॉल में छोटा सा क्यूबिकल भर है तो आपके किसी दोस्त को कम टेम्प्रेचर चाहिए और दूसरे दोस्त का उसी टेम्प्रेचर में शॉल निकल जाता है. यूं हर एक के हिसाब से टेम्प्रेचर सेट होना असंभव है.
अब इतनी सारी बातों के बाद बिजली मंत्री आर के सिंह के कथन को डीकंस्ट्रक्ट करते हैं. अव्वल तो जैसा ज़्यादातर खबरों में बताया गया है कि ‘नए नियम के आ जाने से एसी का तापमान 24 डिग्री से नीचे नहीं किया जा सकेगा’ सरासर ग़लत है. डिफ़ॉल्ट तापमान मतलब वो तापमान जो नए एसी के खरीदने पर पहले से सेट होगा. और साथ ही अगर एसी को सप्लाई होने वाली पावर सीधे बंद कर दी जाए तो ‘सेट टेम्प्रेचर’ 24 डिग्री हो जाएगा. लेकिन आप इसे मैनुअली और नीचे कर सकते हैं. जैसे अभी तक ज़्यादातर एसी का डिफ़ॉल्ट तापमान 22 हुआ करता था. मगर इसका मतलब ये नहीं था कि आप वांछित तापमान इससे नीचे नहीं कर सकते थे. हमने बीईई को भी कॉल लगाया, इस 'डिफ़ॉल्ट' और 'न्यूनतम' वाले कंफ्यूज़न के चलते. और उन्होंने बताया कि हमने एसी का तापमान 24 से 25 डिग्री रखने की एडवाईज़री (सलाह) भर ज़ारी की है, कोई नियम नहीं. इस पूरी एडवाईज़री को आप यहां पर पढ़ सकते हैं - एडवाईज़री एवं गाइडलाइन्स. अब सवाल ये है कि डिफ़ॉल्ट तापमान करने से क्या फायदा होगा, जबकि यूज़र कभी भी इसे घटा-बढ़ा कर अपनी मर्ज़ी के हिसाब से सेट कर सकता है. ये डिफ़ॉल्ट तापमान वाली स्कीम भी दो तरह से फायदेमंद होगी.
# 1 - हममें से कई लोग, एसी की सेटिंग में कम ही बदलाव करते हैं. और उनको 22 और 24 डिग्री में कोई असहज करने वाला अंतर महसूस नहीं होगा, इसलिए कई लोगों के एसी का न्यूनतम तापमान भी 24 डिग्री ही रहेगा. # 2 – एसी पर लेबल लगाकर ग्राहकों को इस बारे में जागरूक करने का भी प्लान है कि उनके पैसे, बेहतर स्वास्थ्य और पर्यावरण के नजरिये से कितना तापमान सबसे उचित है.
तो इस सारे विश्लेषण के बाद सरकार का ये नया कानून बुरा तो बिलकुल भी नहीं बल्कि स्वागत योग्य ही है. निजी तौर पर भी और सामजिक तौर पर भी (ऊर्जा और पर्यावरण के पॉइंट से).
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