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क्या नोटबंदी के बाद सबसे बड़ा घोटाला अमित शाह वाले बैंक में हुआ था?

जो आंकड़े सामने आए हैं, उससे बहुत लोगों की टेंशन बढ़ने वाली है.

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नोटबंदी के दौरान अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक में पांच दिन में 745.59 करोड़ रुपये जमा किए गए. इस बैंक के डायरेक्टर अमित शाह हैं और ये रकम देश के किसी भी कोऑपरेटिव बैंक में जमा की गई रकम में सबसे ज्यादा है.
भारत में एक समाचार एजेंसी है. नाम है इंडो एशियन न्यूज़ सर्विस (आईएएनएस). देश के तमाम अखबार और न्यूज़ चैनल इस एजेंसी के मार्फत खबरें लेतें हैं और दर्शकों-पाठकों तक पहुंचाते हैं. इस न्यूज़ एजेंसी ने 21 जून 2018 को एक खबर जारी की. खबर के मुताबिक जब 8 नवंबर 2016 को देश में नोटबंदी हुई थी, तो 10 नवंबर 2016 से 14 नवंबर 2016 के बीच मात्र पांच दिनों में अहमदाबाद डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक में 745.59 करोड़ रुपये जमा किए गए. ये वो बैंक है, जिसके निदेशक भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह हैं. न्यूज़ एजेंसी को ये जानकारी एक आरटीआई के जरिए मिली है, जिसे मुंबई के रहने वाले मनोरंजन एस रॉय नाम के आरटीआई कार्यकर्ता ने नाबार्ड से मांगी थी. नाबार्ड की ओर से नाबार्ड के चीफ जनरल मैनेजर एस. सर्वनावेल ने ये जानकारी मनोरंजन एस रॉय को उनकी आरटीआई के जवाब में दी थी. इसके अलावा इन्हीं पांच दिनों के अंदर राजकोट जिला कोऑपरेटिव बैंक में 693.1 करोड़ रुपये जमा किए गए. इस बैंक के चेयरमैन जयेश विट्टठलभाई रदाड़िया हैं, जो गुजरात में विजय रूपाणी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं.
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से जुड़ी येखबर सबसे पहले IANS ने ही जारी की थी.
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से जुड़ी येखबर सबसे पहले IANS ने ही जारी की थी.

विवाद क्यों है?
नोटबंदी के बाद तो पूरे देश के बैंक में 500 और 1000 के नोट जमा किए गए थे. हमने और आपने भी ये नोट जमा किए होंगे, लेकिन इस आरटीआई का जवाब सामने आने के बाद विवाद शुरू हो गया है. इसकी वजह ये है कि गुजरात का सबसे बड़ा सहकारी बैंक है गुजरात सहकारी बैंक लिमिटेड. सबसे बड़ा बैंक होने के नाते स्वाभाविक तौर पर इस बैंक में सबसे ज्यादा पैसे जमा होने चाहिए थे. लेकिन 10 नवंबर 2016 से 14 नवंबर 2016 के बीच के पांच दिनों में इस बैंक में मात्र 1.11 करोड़ रुपये ही जमा हुए. वहीं अहमदाबाद कोऑपरेटिव बैंक में 745.59 करोड़ रुपये और राजकोट कोऑपरेटिव बैंक में 693.19 करोड़ रुपये के नोट जमा किए गए. जबकि ये दोनों ही बैंक गुजरात सहकारी बैंक से आकार में बेहद छोटे हैं. विवाद इसलिए भी हो रहा है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह साल 2000 में अहमदाबाद कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष थे और वो अब भी इस बैंक के चेयरमैन हैं. वहीं राजकोट कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन के पद पर जयेश विट्टठलभाई रदाड़िया हैं.

जयेश रदाड़िया राजकोट कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन हैं, जहां अहमदाबाद के बाद दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा पैसा जमा हुए. जयेश रूपाणी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं.

लेकिन गलत क्या है?
अभी तक तो इसमें कुछ भी गलत नज़र नहीं आता है. ये और बात है कि कुछ सवाल हैं, जिनके जवाब अभी तक नहीं मिले हैं और ये जवाब जांच के बाद ही सामने आ पाएंगे. लेकिन कुछ तथ्य ज़रूर हैं. जैसे 14 नवंबर 2016 को नोटबंदी के पांच दिन पूरे होने के बाद सरकार की ओर से ये आदेश जारी किया गया कि अब किसी भी कोऑपरेटिव बैंक में पुराने नोट जमा नहीं किए जाएंगे. उस वक्त 30 दिसंबर 2016 को ही महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने आरोप लगाया था कि अहमदाबाद के एक सहकारी बैंक में 500 करोड़ रुपये जमा होने के तीन दिन बाद फैसला हुआ था कि अब सहकारी बैंकों में पुराने नोट जमा नहीं किए जाएंगे. उस वक्त चव्हाण ने ये भी कहा था कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह इस बैंक के निदेशक हैं, लेकिन मैं ये नहीं कह रहा कि ये पैसे उन्होंने ही जमा करवाए हैं. उस वक्त चव्हाण ने अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक के मेन ब्रांच पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी जारी करने की मांग की थी.
विपक्ष का क्या कहना है?
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला.
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला.

इस आरटीआई के सामने आने के बाद कांग्रेस को बीजेपी पर हमलावर होने का मौका मिल गया है. 22 जून को कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि गुजरात में बीजेपी से ताल्लुक रखने वाले 11 जिला सहकारी बैंकों में पांच दिनों के अंदर कुल 3,118.51 करोड़ रुपये जमा किए गए. कांग्रेस ने कहा कि इस आंकड़े के सामने आने के बाद ये साफ हो गया है कि नोटबंदी आजाद भारत का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला है, जिसमें पूरा काला धन सफेद हो गया है. इसके बाद खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीटर पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ हमला बोला और कहा कि नोटबंदी के जरिए लाखों लोगों की जिंदगी तबाह करने की आपकी इस उपलब्धि को सैल्यूट है.


11 कोऑपरेटिव बैंकों में जमा हुए 3118. 51 करोड़ रुपये
अहमदाबाद कोऑपरेटिव बैंक के निदेशकों में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का भी नाम है.
अहमदाबाद कोऑपरेटिव बैंक के निदेशकों में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का भी नाम है.

आरटीआई के हवाले से कांग्रेस की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ में कहा गया है कि गुजरात के 11 कोऑपरेटिव बैंकों में 3118.51 करोड़ रुपये नोटबंदी के पांच दिनों के अंदर जमा किए गए हैं. और ये सारे बैंक किसी न किसी तरीके से बीजेपी से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं. कांग्रेस के मुताबिक-
1. अहमदाबाद कोऑपरेटिव डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक में 745.59 करोड़ रुपये जमा हुए हैं. इसके निदेशक बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह हैं.
2. राजकोट के कोऑपरेटिव बैंक में 693.19 करोड़ रुपये जमा हुए हैं. इसके चेयरमैन हैं विट्टठभाई रदाड़िया, जो विजय रूपाणी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं.
3. सूरत के जिला कोऑपरेटिव बैंक में कुल 369.85 करोड़ रुपये जमा हुए हैं. इसके डायरेक्टर प्रभुभाई नगरभाई वासवा हैं, जो बारडोली से बीजेपी के लोकसभा सांसद हैं.
4. सांबरकांठा जिला केंद्रीय कोऑपरेटिव बैंक में कुल 328.50 करोड़ रुपये जमा हुए हैं. इस बैंक के डायरेक्टर राजेंद्र सिंह चावड़ा हैं, जो हिम्मतनगर से बीजेपी के विधायक हैं. एक और डायरेक्टर प्रफुल्ल खोड़ा पटेल हैं, जो गुजरात बीजेपी की सरकार में मंत्री रह चुके हैं और अब उन्हें पीएम मोदी की ओर से दमन-दीव और दादरा नगर हवेली का प्रशासक नियुक्त किया गया है.
5.बनासकांठा जिला केंद्रीय कोऑपरेटिव बैंक में कुल 295.30 करोड़ रुपये जमा हुए हैं. इसके डायरेक्टर बीजेपी सरकार के पूर्व मंत्री शंकर चौधरी हैं, जो फिलहाल गुजरात बीजेपी के महासचिव हैं.
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विवाद बढ़ने के बाद नाबार्ड ने कहा है कि पैसे जमा होने में कोई गलती नहीं हुई है.

देश के सभी कोऑपरेटिव बैंक का मुखिया नाबार्ड है. नाबार्ड का पूरा नाम नेशनल बैंक फॉर रूरल एंड एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट है. अहमदाबाद जिला कोऑपरेटिव बैंक में पूरे देश में सबसे ज्यादा पैसे जमा होने पर विवाद सामने आने के बाद नाबार्ड ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की है. बैंक ने कहा है कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है. नाबार्ड के मुताबिक अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक में कुल 16 लाख खाताधारक हैं, जिसमें से 1.60 लाख खाताधारकों ने ही अपने नोट बदले हैं. इनमें भी 98.66 फीसदी खाताधारकों ने 2.5 लाख रुपये से कम पैसे खातों में जमा करवाए. बैंक के खाताधारकों में कुल 0.09 फीसदी खाताधारक ही ऐसे थे, जिन्होंने 2.5 लाख रुपये से ज्यादा पैसे जमा करवाए हैं. अहमदाबाद जिला कोऑपरेटिव बैंक में औसतन 46,795 करोड़ रुपये प्रति खाताधारक जमा करवाए गए हैं, जो गुजरात के 18 जिला कोऑपरेटिव बैंक में जमा औसत पैसे से कम है. इस दौरान अहमदाबाद जिला कोऑपरेटिव बैंक में 1.60 लाख खाताधारकों ने अपने नोट जमा किए हैं, जिसकी वजह से ये आंकड़ा 746 करोड़ रुपये तक पहुंचा है. और ये आंकड़ा बैंक में जमा कुल पैसे का मात्र 15 फीसदी ही है.
अहमदाबाद कोऑपरेटिव बैंक को 2017 में सर्वश्रेष्ठ कोऑपरेटिव बैंक का खिताब मिला था.

नाबार्ड के मुताबिक गुजरात कोऑपरेटिव बैंक में जमा पैसे महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक में जमा पैसे से कम है. नाबार्ड के मुताबिक पैसे जमा करते वक्त सभी ग्राहकों की जांच की गई है और उसमें किसी तरह की कोई कमी नहीं पाई गई है. नाबार्ड ने बताया है कि अहमदाबाद कोऑपरेटिव बैंक देश के 10 सबसे अच्छे और बड़े कोऑपरेटिव बैंक में से एक है, जिसका बिजनेस 9,000 करोड़ रुपये का है. इस बैंक की कुल 194 शाखाएं हैं, जो गुजरात के किसी भी कोऑपरेटिव बैंक में सबसे ज्यादा हैं. इस बैंक में कुल 16 लाख खाताधारक हैं.
और अब बात उस आरटीआई की
ये आरटीआई मुंबई के रहने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट मनोरंजन एस रॉय ने लगाई है. नोटबंदी के 19 महीने बीत जाने के बाद ये पहली बार है, जब नोटबंदी से जुड़े आंकड़े सामने आए हैं. आंकड़ों के मुताबिक पब्लिक सेक्टर के सात बैंकों, 32 स्टेट कोऑपरेटिव बैंक, 370 जिला सहकारी बैंक और 39 पोस्ट ऑफिस में ही कुल 7.91 लाख करोड़ रुपये जमा किए गए, जबकि नोटबंदी के बाद देश में कुल 15.28 लाख करोड़ रुपये के पुराने नोट जमा किए गए थे. इनमें भी पब्लिक सेक्टर के सात बैंकों में 7.57 लाख करोड़ रुपये जमा किए गए थे. वहीं 32 स्टेट कोऑपरेटिव बैंक में 6,407 करोड़ रुपये जमा किए गए, जबकि 370 जिला सहकारी बैंकों में कुल 22,271 करोड़ रुपये जमा हुए. वहीं कुल 39 पोस्ट ऑफिस में 4,408 करोड़ रुपये जमा हुए.


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