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गुजरात में सोन चिरैया के जिस चूजे की सुरक्षा के लिए 50 गार्ड्स लगाए, वो गायब हो गया

गुजरात की सभी तीन सोनचिरैया नलिया के घास के मैदानों में पाई जाती हैं. इन्हीं में से एक पक्षी ने अंडे दिए थे. चूंकि इस इलाके में एक भी नर सोनचिरैया नहीं बचा है, इसलिए ये अंडे बांझ (इन्फर्टाइल) ही थे.

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सोनचिरैया का चूजा लापता. (फोटो- India today)

गुजरात के कच्छ में 10 साल में पहली बार पैदा हुआ सोन चिरैया का चूजा ‘गायब’ हो गया है. वन विभाग ने 50 लोगों को उसकी निगरानी के लिए लगाया था. लेकिन 1600 हेक्टेयर में फैले नालिया के मैदान (Naliya Grasslands) में एक छोटे से चूजे की लगातार निगरानी नामुमकिन काम है. आखिर वही हुआ जिसका डर था. एक स्पेशल एक्सपेरिमेंट से पैदा किए गए इस चूजे के गायब होने से इस लुप्तप्राय पक्षी के संरक्षण को बड़ा झटका लगा है. हालांकि, वन विभाग के लोगों ने अभी हार नहीं मानी है. वह लगातार चूजे की तलाश कर रहे हैं. 

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात में सोन चिरैया पक्षी की पूरी नस्ल खत्म होने की कगार पर है. यहां अभी जंगल में सिर्फ 3 सोन चिरैया यानी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड बचे हैं. तीनों मादा हैं. इसलिए उनके अंडे फर्टाइल नहीं होते. यानी उनमें से चूजों के निकलने की संभावना नहीं होती. लेकिन, संरक्षण की एक खास कोशिश के तहत वन विभाग ने इस साल एक नया और बड़ा प्रयोग किया था. 

गुजरात की सभी तीन सोन चिरैया नलिया के घास के मैदानों में पाई जाती हैं. इन्हीं में से एक पक्षी ने अंडे दिए थे. चूंकि इस इलाके में एक भी नर सोन चिरैया नहीं बचा है, इसलिए ये अंडे इन्फर्टाइल ही थे. राजस्थान में सोन चिरैया की थोड़ी अच्छी आबादी है. वहां पक्षी की इस प्रजाति को बचाने के लिए प्रजनन संरक्षण केंद्र भी बने हैं. जैसलमेर के सम में मौजूद ऐसे ही एक प्रजनन संरक्षण केंद्र से एक निषेचित यानी फर्टाइल अंडा गुजरात लाया गया था. 

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इस अंडे को लाने के लिए 770 किमी की दूरी 19 घंटे में तय की गई थी. सड़क के रास्ते लाए गए अंडे को पोर्टेबल इनक्यूबेटर में रख दिया गया. 22 मार्च 2026 को इस फर्टाइल अंडे को उस इन्फर्टाइल अंडे से बदल दिया गया, जो नालिया के घास के मैदानों में सोन चिरैया ने दिए थे. फिर क्या था! बाकी का काम मादा सोन चिरैया ने कर दिया. उसने इस निषेचित अंडे को सेने का काम शुरू किया. नतीजा ये हुआ कि 26 मार्च को 10 साल में पहली बार गुजरात में सोन चिरैया के चूजे ने जन्म लिया. 

चूजे की निगरानी की चुनौती

अब सबसे बड़ी चुनौती इस चूजे को बचाने की थी. एक महीने का ये चूजा 18 अप्रैल के बाद से थोड़ा-थोड़ा उड़ने लगा था. डर था कि वो कहीं किसी सियार, कुत्ते, लोमड़ी या अन्य शिकारी जानवर का खाना न बन जाए. लिहाजा, वन विभाग के 50 लोग इस काम के लिए लगाए गए कि वो इस चूजे पर नजर रखेंगे. नालिया के घास के मैदान का इलाका करीब 1600 हेक्टेयर में फैला है. इतने बड़े भूगोल पर लगातार नजर रख पाना मुश्किल काम है. 

वन विभाग के अधिकारी इस चूजे के पैदा होने से काफी खुश थे. लेकिन पिछले 4-5 दिन से ये चूजा दिखाई नहीं दे रहा है. इससे सब दुखी हैं. सबको डर है कि कहीं चूजा किसी जानवर का शिकार न बन गया हो. चूजा काफी छोटा था, इसलिए उसमें कोई ट्रैकिंग डिवाइस नहीं लगाया गया था. उसे किसी पिंजरे या बंद जगह में नहीं रखा गया था. न तो उसे टैग ही किया गया था.

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कच्छ में वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि फिलहाल चूजे को ढूंढने का सिर्फ एक ही तरीका है. पूरे इलाके की तलाश करना. वही किया भी जा रहा है लेकिन इलाका बहुत बड़ा है. इलाके में कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. फिर भी पक्षी को ट्रैक कर पाना तकरीबन असंभव काम है. 

हालांकि, गायब हुए चूजे की तलाश कर रहे वन विभाग के कर्मियों ने हार नहीं मानी है. उन्हें उम्मीद है कि वो सोन चिरैया के चूजे को खोज निकालेंगे. 

दुनिया भर में सिर्फ 150 सोन चिरैया

बता दें कि दुनिया में अब सिर्फ करीब 150 ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (सोन चिरैया) ही बचे हैं. इनमें से ज्यादातर राजस्थान में हैं. यह बड़ी चिड़िया घास के मैदान के लिए बहुत जरूरी मानी जाती है. लेकिन सालों से शिकार, रहने की जगह कम होना और हाल के समय में बिजली की तारों से टकराने के कारण इनकी आबादी घटती गई है.

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