राजस्थान के जोधपुर जिले के बालेसर इलाके में पुलिस और 'एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स' (ANTF) ने एक जॉइंट ‘ऑपरेशन विषग्रहण’ चलाया. इस ऑपरेशन में ANTF और राजस्थान पुलिस ने ‘MD’ Drugs बनाने वाली एक Illegal Factory पर छापा मारा. ये फैक्ट्री बालेसर के लूणावपुरा गांव में काफी अंदर चल रही थी. पुलिस की छापेमारी में यहां से तकरीबन 176 किलो MD ड्रग्स बरामद किया गया है. MD एक तरह का Synthetic Drug है, जो इस्तेमाल करने वाले इंसान में Energy का एहसास दिलाता है. इससे काफी मजबूत नशा होता है.
राजस्थान में नशे का बड़ा नेटवर्क ध्वस्त, जोधपुर में 176 किलो MD ड्रग्स बरामद
बालेसर में ऑपरेशन विषग्रहण के दौरान पुलिस और आरोपियों के बीच गोलीबारी भी हुई, जिसके बाद कई राज्यों में फैले इस नेटवर्क के 6 खतरनाक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.


बालेसर में ऑपरेशन विषग्रहण के दौरान पुलिस और आरोपियों के बीच गोलीबारी भी हुई, जिसके बाद कई राज्यों में फैले इस नेटवर्क के 6 खतरनाक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.
इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार नवीन दत्त की रिपोर्ट के मुताबिक़, ड्रग्स की इस अवैध फैक्ट्री की शुरुआत होती है हापू राम बिश्नोई से. वो एक पुराना हिस्ट्रीशीटर है. ANTF के IG विकास कुमार के मुताबिक, एक बार किसी को क्राइम से पैसे कमाने की लत लग जाती है तो उसका ईमानदारी की कमाई से पेट नहीं भरता. इसीलिए ऐसे क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले हमेशा रडार पर रहते हैं. हापू राम भी एक पुराना क्रिमिनल है, जो पहले भी कई मामलों में जेल जा चुका है. जेल से निकलते ही हापू राम ने अपना एक गिरोह बनाया.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हापू की गैंग में मुख्य रूप से 5 लोग थे. इसमें पेशे से केमिस्ट नरेश बिश्नोई, सिक्योरिटी देखने वाला अजारम जाट, ड्रग बनाने और डिलीवरी का काम करने वाले श्रवण और बुधराम, प्रोडक्शन का काम करने वाले नरेंद्र शामिल हैं. नरेंद्र भी हापू राम की तरह हिस्ट्रीशीटर ही है. वह पहले हैदराबाद जेल में भी रह चुका है. ये सभी लोग सोशल मीडिया के ज़रिए आपस में बात करते थे. जैसे ही इस बात की भनक पुलिस को लगी, उन्होंने हापू पर नज़र रखनी शुरू कर दी, लेकिन कोई पक्की जानकारी नहीं मिल रही थी.
तकरीबन 6 हफ्तों की निगरानी के बाद पुलिस को एक लीड मिली कि बालेसर के एक सुनसान इलाके में जरूरत से ज्यादा बर्फ की सप्लाई हो रही है. MD ड्रग्स को बनाने के लिए भी बर्फ का ज़्यादा इस्तेमाल होता है. खबर पुख्ता होते ही राजस्थान पुलिस और Narcotics Task Force ने इस पर एक Joint Operation की Planning शुरू कर दी. दोनों टीमें 25 अप्रैल की आधी रात के बाद जोधपुर से निकलीं और करीब 1 बजे बालेसर के लूणावपुरा गांव पहुंचीं, जहां एक खेत में ड्रग्स बनाने की फैक्ट्री छिपकर चलाई जा रही थी. इसके आसपास 1.5 किलोमीटर तक कोई आबादी नहीं थी.
जिस बिल्डिंग में ये फैक्ट्री चल रही थी, वो थोड़ी ऊंचाई पर थी. इससे फायदा ये था कि अंदर बैठे हापूराम के लोग किसी पर भी नजर रख सकते थे. टीम का सबसे बड़ा टास्क भी यही था कि बिना किसी की नजर में आए उस बिल्डिंग तक पहुंचा कैसे जाए. इसके लिए दोनों टीमों को करीब 3 घंटे तक रेंगकर जाना पड़ा.
फैक्ट्री के पास पहुंचते ही शुरू होता है असली बॉलीवुड क्राइम ड्रामा. दोनों टीमों ने चारों तरफ से उस बिल्डिंग को घेर लिया. उसके बाद पुलिस ने Loudspeaker से सरेंडर करने के लिए कहना शुरू किया, लेकिन सरेंडर करने के बजाय हापू राम और अजाराम ने छत से फायरिंग शुरू कर दी. इसी बीच फैक्ट्री के अंदर मौजूद नरेश, श्रवण, बुधराम और नरेंद्र ने नीचे से भागने की कोशिश की, जिन्हें पुलिस ने तुरंत ही पकड़ लिया. वहीं हापू राम और अजाराम को पुलिस लगातार वार्निंग देती रही कि हथियार डालकर नीचे आ जाओ.
Anti Narcotics Task Force के SP अमित जैन के मुताबिक, करीब-करीब 15 राउंड गोलियां चलीं. गोलीबारी के बीच हापू राम और अजाराम ने छत से छलांग लगा दी लेकिन कूदने की वजह से दोनों ही घायल हो गए. अजाराम को तो तुरंत ही पकड़ लिया गया. उसके पास से एक विदेशी डिजाइन की पिस्टल भी बरामद हुई. इन सबके बीच, हापू राम ने अंधेरे का फायदा उठाकर भागने की कोशिश की. मगर चूंकि कूदने की वजह से उसके पैर में चोट लग गई थी, इसलिए वो ज़्यादा दूर तक जा नहीं पाया. वो भी पकड़ा गया.
गैंग के पकड़े जाने के बाद जब पुलिस अंदर गई तो टीम को वहां लगभग 176 किलो MD ड्रग्स बरामद हुए, जिनकी क़ीमत करीब-करीब 90 करोड़ रुपए के आसपास होने का अनुमान है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा वक़्त में एक किलो MD Drugs की कीमत लगभग 30 लाख रुपए है. MD को बनाने के लिए जिस केमिकल का इस्तेमाल होता था, वो गुजरात और महाराष्ट्र से आता था. जिन्हें जोधपुर, सांचौर, बाड़मेर और जालोर जैसे इलाकों में सप्लाई किया जाता था. तैयार ड्रग्स को गुजरात के रास्ते महाराष्ट्र और दूसरे राज्यों में भेजा जाता था, और बीकानेर से पंजाब और नॉर्थ इंडिया के दूसरे इलाकों में भी पहुंचाया जाता था.
जांच में आगे पता चला कि ये काफ़ी ज्यादा Organized गैंग है. अपनी लोकेशन छुपाने के लिए Encrypted Social Media Apps और iPhone का इस्तेमाल किया जाता था, जिससे उन्हें Track न किया जा सके. जिस बिल्डिंग में ये फैक्ट्री चल रही थी, वो अजाराम के चाचा ‘जियाराम’ की थी. इसका एक महीने का किराया करीब 2.5 लाख रुपये था. जबकि उसकी असली क़ीमत सिर्फ 5 हज़ार रुपए के आसपास थी. जब छापा पड़ा, तो ‘जियाराम’ वहां मौजूद नहीं था. पुलिस के मुताबिक़, इस ऑपरेशन के ज़रिए राजस्थान में MD ड्रग्स के एक बड़े नेटवर्क को तोड़ दिया गया है. सारे आरोपियों को रिमांड पर भेज दिया गया है.
पिछले एक साल में ही राजस्थान में 33 MD Drug Factories के खिलाफ़ एक्शन लिया गया है, जिनमें से 31 इसी बेल्ट में थीं. इससे ये साफ़ होता है कि ये इलाक़ा नशे के कारोबार का बड़ा Centre बनते जा रहा था. फिलहाल, उस इलाक़े में लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है.
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