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नोटबंदी के फैसले को लागू करने से 'अपमानित' हो गए RBI के एम्प्लॉइज

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नोटबंदी का फैसला सही था या गलत. ये एक लंबी बहस है. जहां लोग इसको एक साहसिक कदम, अच्छा फैसला बता रहे हैं, वहीं इस बात में भी सच है कि अभी तक बैंकों में कतारें लग रही हैं. काम धंधे चौपट हो गए. मीडिया हाउसेस में ही छटनी की ख़बरें सुनने में आ रही हैं. बाकी जगह की तो बात ही छोड़िए. और सबसे बड़ी बात ,जिसके लिए नोटबंदी का फैसला हुआ उसको भी ज्यादा फायदा नहीं मिला. क्योंकि जाली नोट, नए वाले नोटों के भी छपने लगे और जितना काला धन बताया जा रहा था वो छटांकभर निकलने की खबर है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पुराने 14 लाख करोड़ रुपये बैंकों में जमा हो गए और महज़ पुराने 75 हजार करोड़ रुपये नहीं आ पाए. ये बातें इसलिए याद दिलानी पड़ीं, क्योंकि नोटबंदी के इस फैसले के बाद हुए घटनाक्रमों से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के एम्प्लॉइज खुद को ‘अपमानित’ महसूस कर रहे हैं. उन्होंने RBI गवर्नर उर्जित पटेल को एक चिट्ठी लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया है.

नोटबंदी का फैसला हुआ और न जाने कितनी बार आरबीआई ने अपनी गाइडलाइन बदलीं, नहीं मालूम. लोगों की दिक्कतें कम नहीं हुईं. किसी को अपने बच्चों की शादी के लिए कैश जुटाने में दिक्कत हुई. तो किसी ने कतार में दम तो दिया. तो किसी को पैसे न मिलने की वजह से टाइम पर इलाज नहीं मिल पाया. कई दुखद ख़बरें सामने आईं. जिसने नोटबंदी के फैसले पर सवाल खड़े किए.

आरबीआई के एम्प्लॉइज ने नोटबंदी के फैसले को लागू करने में कुप्रबंधन और सरकार की तरफ से करंसी जुटाने के लिए एक अफसर की नियुक्ति कर केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता को चोट पहुंचाने का विरोध किया है. कहा गया है कि कुप्रबंधन से आरबीआई की इमेज और आज़ादी को इतना नुकसान पहुंचा है कि उसे दुरुस्त कर पाना बहुत मुश्किल है.

एम्प्लॉइज ने उर्जित पटेल को जो ख़त लिखा है, उसमें कहा है, ‘इस कुप्रबंधन से आरबीआई की छवि और स्वायत्तता को ‘इतना नुकसान पहुंचा है कि उसे दुरुस्त करना काफी मुश्किल है. करंसी मैनेजमेंट के आरबीआई के स्पेशल काम के लिए फाइनेंस मिनिस्ट्री के एक सीनियर अफसर की तैनाती खुल्लमखुल्ला अतिक्रमण है. रिजर्व बैंक की काबिलियत और स्वायत्तता वाली इमेज उसके एम्प्लॉइज की सालों की मेहनत से बनी थी, लेकिन इसे एक ही झटके में खत्म कर दिया गया. यह बेहद दुखद है.’

चिट्ठी यूनाइटेड फोरम ऑफ रिजर्व बैंक ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज की ओर से लिखी गई है. चिट्ठी पर ऑल इंडिया रिजर्व बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन के समीर घोष, ऑल इंडिया रिजर्व बैंक वर्कर्स फेडरेशन के सूर्यकांत महादिक, ऑल इंडिया रिजर्व बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के सी. एम. पॉलसिल और आरबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन के आर. एन. वत्स के साइन हैं. इनमें से समीर घोष और महादिक ने चिट्ठी लिखने की बात पर हामी भरी है. घोष का कहना है कि यह फोरम केंद्रीय बैंक के 18,000 एम्प्लॉइज का प्रतिनिधित्व करता है.

शायद आपको याद हो इससे पहले आरबीआई के तीन फॉर्मर गवर्नर मनमोहन सिंह (फॉर्मर पीएम भी), वाईवी रेड्डी और विमल जालान ने रिजर्व बैंक के कामकाज के तरीकों पर सवाल उठाया था. केंद्रीय बैंक के फॉर्मर डिप्टी गवर्नर उषा थोराट और केसी चक्रवर्ती ने भी इस पर चिंता जताई थी.

अबतक विपक्ष की तरफ से ही नोटबंदी के फैसले को लेकर हंगामा किया जाता रहा है. और नोटबंदी के फैसले को गलत बताया जाता रहा है. अब उसके लागू करने के तरीकों को लेकर हुई बदइंतजामी से आरबीआई के एम्प्लॉइज का खुद को अपमानित महसूस करना सोचने वाली बात है. जिससे नोटबंदी पर मन में कई सवाल जन्म लेते हैं. जिनके जवाब साफ़ तौर पर शायद ही मिलें.


 

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