‘वंदे मातरम’ का अपमान करने पर अब तीन साल की जेल और जुर्माना भी हो सकता है. सरकार मॉनसून सत्र में इसे लेकर एक संशोधन बिल लाने वाली है. इस बिल को संसद में सोमवार, 20 जुलाई को ही पेश किए जाने की संभावना है. राज्यसभा की कार्यसूची के अनुसार, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इस बिल को सदन के पटल पर पेश कर सकते हैं. इस बिल में ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971’ में बदलाव करने का प्रस्ताव है, जो अभी तक सिर्फ राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के अपमान को दंडनीय अपराध बनाता था. अब इसमें संशोधन करके वंदे मातरम को भी जोड़ा जाएगा.
'वंदे मातरम' का अपमान करने वालों की खैर नहीं, नया कानून लाने की तैयारी में सरकार
सरकार 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971' में संशोधन कर 'वंदे मातरम' के अपमान को भी दंडनीय अपराध बनाने की तैयारी में है. बिल पास होने पर राष्ट्रगीत का अपमान या उसे गाने में बाधा डालने पर तीन साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान होगा.


‘वंदे मातरम’ को भारत के राष्ट्रगीत का दर्जा प्राप्त है. इसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा है. सबसे पहले 7 नवंबर 1875 को यह गीत एक साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में छपा था. बाद में 1882 में बंकिम चंद्र चटर्जी ने आनंदमठ नाम का उपन्यास लिखा तो इस गीत को उसमें शामिल कर लिया गया. राष्ट्रगान की रचना करने वाले रवींद्रनाथ टैगोर ने इस गीत को संगीतबद्ध किया है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, नरेंद्र मोदी सरकार मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में विधेयक लाने के लिए पूरी तरह तैयार है. इसमें राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ गाने में किसी भी प्रकार की बाधा पैदा करने या उसका अनादर करने पर उसे राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान ही आपराधिक कृत्य बना दिया जाएगा.
इसके लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ को राज्यसभा में पेश करेंगे, जो ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971’ में संशोधन का प्रस्ताव है.
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यह विधेयक देश के राष्ट्रीय प्रतीकों जैसे राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान या अनादर को अपराध घोषित करता है. इस कानून में ऐसा करने वाले लोगों को तीन साल तक की कैद की सजा और जुर्माने का प्रावधान है.
राज्यसभा की कार्यसूची के मुताबिक, संशोधन विधेयक का मकसद बताते हुए कहा गया है कि फिलहाल ‘वंदे मातरम’ का अपमान रोकने के लिए कोई विशेष कानून नहीं है. ऐसे में किसी भी व्यक्ति को जानबूझकर राष्ट्रगीत (वंदे मातरम) गाने से या इसे गा रहे किसी सभा में बवाल करने से रोकने के लिए 1971 वाले ऐक्ट की धारा 3 में बदलाव करने का प्रस्ताव है. इसमें ‘जन-गण-मन’ के साथ ‘वंदे मातरम’ को भी जोड़ने की बात कही गई है.
विधेयक में कहा गया है कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की बैठक में अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि बंकिम चंद्र चटर्जी के लिखे गीत वंदे मातरम ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी. ऐसे में इसको 'जन-गण-मन' के समान ही सम्मानित किया जाएगा और उसे इसके बराबर दर्जा दिया जाएगा.
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