केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 23 दिन से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक की हाथ से लिखी चिट्ठियां अस्पताल से आना जारी हैं. सोमवार, 20 जुलाई को ऐसी ही एक चिट्ठी में वांगचुक ने ऐलान किया है कि वो अपनी भूख हड़ताल तब तक नहीं तोड़ेंगे जब तक युवा प्रतिनिधियों को संसद में सांसदों से मिलने की इजाजत नहीं मिल जाती. या फिर कोई सांसद उनसे मिलने के लिए अस्पताल नहीं आता.
'मैं अनशन नहीं तोड़ूंगा', सोनम वांगचुक का ऐलान
सफदरजंग अस्पताल से जारी नई चिट्ठी में सोनम वांगचुक ने कहा कि जब तक छात्र प्रतिनिधियों को सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं मिलती या कोई सांसद उनसे मिलने नहीं आता, तब तक वह अपना अनशन नहीं तोड़ेंगे. उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए सरकार से शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील भी की.


सोनम वांगचुक ने बताया कि ये फैसला उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ की जा रही सख्ती और बर्बरता के बाद लिया है.
बता दें कि 23 दिन से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने 20 मार्च को संसद तक मार्च का ऐलान किया था. इसके लिए दिल्ली की सड़कों पर भारी संख्या में लोग जुट गए. संसद की ओर जाते हुए लोगों की पुलिस के साथ मुठभेड़ भी हुई. पुलिस ने लाठीचार्ज किया. आंसू गैस के गोले भी छोड़े. कई प्रदर्शनकारियों को इस दौरान चोटें आईं. पुलिस की गाड़ियों पर भी हमले की खबर है. इसी बीच सोनम वांगचुक का ये संदेश सफदरजंग अस्पताल से आया. अंग्रेजी भाषा में अपने हाथ से लिखे मेसेज में सोनम वांगचुक ने कहा,
शांति से प्रोटेस्ट कर रहे युवाओं के साथ जिस तरह की सख्ती और बर्बरता की जा रही है, उसे देखकर मैंने फैसला किया है कि मैं अपनी भूख हड़ताल तब तक जारी रखूंगा, जब तक कि युवा प्रतिनिधियों को संसद भवन में सांसदों से मिलने की इजाजत नहीं मिल जाती. या फिर मुझे यहां अस्पताल में ही उनसे (सांसदों से) मिलने की इजाजत नहीं दी जाती.

वांगचुक ने आगे कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इससे पहले सरकार शिक्षा मंत्री (धर्मेंद्र प्रधान) की जवाबदेही भी तय करेगी. वांगचुक ने आगे कहा,
मैं इस बात से बहुत भावुक हूं कि युवाओं ने उकसावे के बावजूद शांति बनाए रखी. मैं सरकार और पुलिस से अपील करता हूं कि इस मामले का समाधान सिर्फ इतना करके निकालें कि छात्रों को सोमवार, 20 जुलाई या मंगलवार, 21 जुलाई को संसद के सामने अपनी शिकायतें रखने की अनुमति दे दें.
चिट्ठी के अंत में सोनम वांगचुक ने भरोसा भी जताया कि युवा प्रदर्शनकारी वही धैर्य और सहनशीलता दिखाते रहेंगे, जो संसद मार्च के दौरान दिखाई है.
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बता दें कि सोनम वांगचुक के अनशन के 20वें दिन दिल्ली पुलिस उन्हें जबरन सफदरजंग अस्पताल लेकर गई थी. वांगचुक ने इसका विरोध किया था और सरकारी अस्पताल पर भरोसा न होने की बात कही थी. अस्पताल से डिस्चार्ज करने की अपील लेकर दिल्ली हाईकोर्ट तक चले गए. हालांकि, कोर्ट ने उन्हें प्राइवेट अस्पताल में भेजने की अर्जी नहीं मानी और सफदरजंग अस्पताल में ही भर्ती रहने को कहा.
वीडियो: संसद मार्च से पहले अभिजीत दिपके ने तोड़ी भूख हड़ताल, सोनम वांगचुक के लेटर में क्या?











