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क्या आप भी एनालॉग पनीर खा रहे? 3 राज्यों में बैन लगा, पहचानने का तरीका जान लीजिए

पर आखिर एनालॉग पनीर होता क्या है, ये बनता किससे है, जिस पर राज्य सरकारें लगातार बैन लगाए जा रही हैं, ये सवाल हमने पूछा आईएसआईसी मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में चीफ क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट, हिमांशी शर्मा से.

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असली पनीर की तुलना में एनालॉग पनीर काफ़ी सस्ता पड़ता है

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  • गुजरात सरकार ने 6 अगस्त 2024 से एनालॉग पनीर, एनालॉग चीज़ और बटर के निर्माण, पैकिंग, वितरण तथा बिक्री पर प्रतिबंध लागू कर दिया है।
  • एनालॉग पनीर में वनस्पति तेल, स्टार्च और इम्लसीफायर जैसे घटक होते हैं, जो इसे असली दूध से बने पनीर जैसा दिखाते हैं लेकिन स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय हैं।
  • इस प्रतिबंध के तहत बिना दूध के बने उत्पादों को असली डेयरी उत्पाद बताकर बेचने वालों के खिलाफ सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बाद अब गुजरात ने भी एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगा दिया है. इन राज्यों में एनालॉग पनीर को बनाने, पैक करने, रखने, एक जगह से दूसरी जगह भेजने और बेचने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है.

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सबसे पहले 31 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ सरकार ने एनालॉग पनीर पर रोक लगाई. ये रोक एक साल के लिए या फिर FSSAI की नई गाइडलाइंस आने तक लागू रहेगी. छत्तीसगढ़ में नॉन-स्टैंडर्ड एनालॉग क्रीम और बटर पर भी रोक लगाई गई है. यानी ऐसी क्रीम और बटर, जिनमें दूध की जगह दूसरी चीज़ों का इस्तेमाल किया जाता है.

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इसके बाद महाराष्ट्र ने भी एनालॉग पनीर पर एक साल के लिए बैन लगा दिया. यानी इसे दुकानों से तो हटाना ही होगा. होटल, रेस्टोरेंट, केटरर्स और क्लाउड किचन भी अब इस पनीर का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे. ये फैसला इसलिए लिया गया, क्योंकि महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने पिछले एक साल में नॉन-डेयरी पनीर के खूब सैंपल जांचें थे. जिनमें से कई मानकों पर खरे नहीं उतरे.

वहीं गुजरात ने एनालॉग पनीर के साथ-साथ एनालॉग चीज़ और बटर पर भी बैन लगा दिया है. ये बैन 6 अगस्त से लागू हो चुका है. राज्य सरकार का कहना है कि लोगों की सेहत और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए ये फैसला लिया गया है. अगर कोई बिना दूध के बने प्रोडक्ट को असली डेयरी प्रोडक्ट बताकर बेचेगा, तो उसके खिलाफ़ सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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पर आखिर एनालॉग पनीर होता क्या है, ये बनता किससे है, जिस पर राज्य सरकारें लगातार बैन लगाए जा रही हैं, ये सवाल हमने पूछा आईएसआईसी मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में चीफ क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट, हिमांशी शर्मा से.  

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एनालॉग पनीर देखने, छूने और इस्तेमाल करने में काफ़ी हद तक असली पनीर जैसा लगता है. पर ये पूरी तरह दूध से नहीं बनता. असली पनीर को दूध फाड़कर तैयार किया जाता है. लेकिन एनालॉग पनीर, जिसे सिंथेटिक पनीर भी कहते हैं, उसे कई दूसरी चीज़ों को मिलाकर बनाया जाता है.

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हिमांशी शर्मा, चीफ क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट, आईएसआईसी मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल
इन चीज़ों से बनता है एनालॉग पनीर 

एनालॉग पनीर में आमतौर पर वनस्पति तेल या वनस्पति वसा मिलाया जाता है. जैसे पाम ऑयल या पाम फैट. इससे पनीर जैसा टेक्सचर मिलता है और लागत कम होती है. पर पाम ऑयल या पाम फैट को बहुत ज़्यादा हेल्दी नहीं माना जाता, क्योंकि इनकी ज़्यादा मात्रा शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकती है.

एनालॉग पनीर में दूध से मिलने वाला प्रोटीन ‘केसिन’ भी मिलाया जा सकता हैं. ये इसे असली पनीर जैसी बनावट, मज़बूती और खिंचाव देता है. हालांकि कुछ एनालॉग पनीर पूरी तरह नॉन-डेयरी भी हो सकते हैं.

एनालॉग पनीर में स्टार्च डाला जाता है. जैसे टैपिओका स्टार्च, मक्के का स्टार्च या आलू का स्टार्च. इससे पनीर सख्त रहता है और उसका आकार आसानी से नहीं बिगड़ता.

एनालॉग पनीर में इम्लसीफायर और स्टेबलाइज़र भी मिलाए जाते हैं ताकि तेल, पानी और प्रोटीन आपस में अच्छी तरह मिल जाएं. ये पूरे मिक्सचर को अलग-अलग होने से रोकते हैं. इससे पनीर को सही मोटाई, एक जैसा चिकना रूप और असली पनीर जैसी बनावट मिलती है.

एनालॉग पनीर में नमक, फ्लेवर और रंग भी डाले जाते हैं. जिससे उसका स्वाद और रंग एकदम असली पनीर जैसा लगे.

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एनालॉग पनीर के कई सैंपल टेस्टिंग में फेल हो गए थे (AI Generated)
एनालॉग पनीर पर कानून क्या?

अब क्योंकि एनालॉग पनीर, असली पनीर की तुलना में काफी सस्ता पड़ता है. जल्दी खराब भी नहीं होता. इसलिए कई होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और दूसरे फूड बिज़नेस इसका इस्तेमाल करते हैं. अपने आप में ये गैर-कानूनी नहीं है. अगर इस पर सही लेबलिंग हो, ये फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स का पालन करे, तो इसकी बिक्री की जा सकती है. पर ग्राहक को ये बताना ज़रूरी है कि उसे असली नहीं, बल्कि एनालॉग पनीर परोसा जा रहा है. अगर इसे असली पनीर बताकर बेचा या खिलाया जाए, तो ये कानून का उल्लंघन है. कई बार जांच में एनालॉग पनीर के सैंपल तय मानकों पर खरे नहीं उतरते. ये लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए कुछ राज्य सरकारें ऐसे प्रोडक्ट्स के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं.

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असली पनीर और एनालॉग पनीर में फ़र्क कैसे करें?

- शुद्ध पनीर में हल्की दूधिया महक होती है.

- ये छूने में मुलायम और हल्का दानेदार होता है.

- खाने में ये हल्का मीठा और मलाईदार होता है.

- गर्म पानी में डालने पर वो नरम ज़रूर होगा पर उसकी बनावट में कोई बदलाव नहीं आएगा

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.) 

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