भारत की ऑयल रिफाइनिंग कंपनियां जल्द ही रूस से कच्चे तेल की खरीद घटा सकती हैं या बंद कर सकती हैं. इसकी वजह यह है कि अमेरिका में ‘रूस प्रतिबंध विधेयक’ पास होने पर इन कंपनियों को रूस से तेल खरीदने पर मोटा टैरिफ चुकाना पड़ सकता है.
रूस से तेल मंगाना बंद करेंगी भारतीय कंपनियां? फिर इतने ज्यादा तेल की पूर्ति कैसे होगी?
रूस से तेल का आयात बंद होने के बाद नया संकट शुरू हो सकता है. क्योंकि हालिया आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत अपनी जरूरत का करीब 50% कच्चा तेल रूस से ही खरीदता है. यानी अमेरिका के नए कानून ने भारत को मुश्किल में डाल दिया है.

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का खरीदार है. भारत ने हाल ही में अपनी जरूरत का करीब 50% तेल रूस से खरीदा था. ईरान युद्ध के चलते तेल की सप्लाई में लगातार आ रही परेशानी के बाद भारत ने रूस से तेल खरीद बढ़ा दी थी. हालांकि, पिछले कुछ दिनों में भारत की ऑयल रिफाइनरियां अब रूस के अलावा अन्य देशों से तेल खरीदने की योजना बना रही हैं.
न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग के मुताबिक आने वाले दिनों में भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद घटा सकता है. भारत जितना तेल विदेशों से आयात करता है, उसमें रूस से खरीदारी 20% से 30% तक सीमित रह सकती है.
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अमेरिका ने बिगाड़ा गेम!पिछले हफ्ते अमेरिकी संसद में एक बिल पारित हुआ. इसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है. यानी अब राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को रूसी कच्चे तेल के खरीदार देशों पर शुल्क लगाने का अधिकार मिल गया है. ऐसे देशों की इस सूची में भारत भी शामिल है.
तेल के आंकड़ों पर नजर रखने वाली एजेंसी केप्लर के अनुसार भारत ने रूस से पहले ही आयात घटा दिया है. और अब सितंबर में तेल की खरीद औसतन करीब 19 लाख बैरल रोजाना रह सकती है. यह भारत के कुल तेल आयात का 35% से ज्यादा है. यह अप्रैल के बाद से सबसे कम है. लेकिन रूस से आने वाले तेल की भरपाई करना आसान नहीं होगा, क्योंकि यहां से आने वाले तेल की मात्रा वेनेजुएला या ईरान की तुलना में कहीं ज्यादा है. साथ ही बाजार में कीमतें भी ऊंची हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले हफ्ते के आखिर में भारत को डिलीवर किए गए रूसी कच्चे तेल की कीमत लगभग 133 डॉलर प्रति बैरल थी. ओमान जैसे मध्य पूर्वी देशों के तेल की कीमत रूस से कई डॉलर अधिक थी.
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