जब भी कोई वायरस या बैक्टीरिया शरीर में घुसता है, तो हमारा इम्यून सिस्टम उससे लड़ने की कोशिश करता है. इस काम में लिम्फ नोड्स भी लग जाते हैं. ये शरीर के अलग-अलग हिस्सों में पाए जाते हैं. जैसे गर्दन, बगल, छाती, पेट और ग्रोइन में. राजमा के आकार के ये छोटे-छोटे अंग इम्यून सिस्टम का हिस्सा हैं. लेकिन कभी-कभी इन लिम्फ नोड्स में मौजूद सेल्स में ही कैंसर होने लगता है. जिसे लिम्फोमा कहते हैं. ये एक तरह का ब्लड कैंसर है, जो लिम्फोसाइट्स नाम की व्हाइट ब्लड सेल्स से शुरू होता है.
गर्दन, बगल में गांठ कब कैंसर वाली हो सकती है, एक्सपर्ट से समझ लीजिए
नहाते या कपड़े बदलते समय गर्दन, बगल या ग्रोइन में लिम्फ नोड्स या गांठ महसूस हो, तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए.

लिम्फोमा के कुछ प्रकार तेज़ी से बढ़ सकते हैं, तो कुछ धीरे-धीरे बढ़ते हैं. आज World Lymphoma Awareness Day पर डॉक्टर से जानेंगे कि लिम्फोमा क्या है और ये शरीर में कहां होता है. इसके रिस्क फैक्टर्स क्या हैं. लिम्फोमा के लक्षण और इलाज का तरीका भी पता करेंगे.
लिम्फोमा क्या है और ये कहां होता है?
ये हमें बताया डॉक्टर नीमा भट ने.

हमारे शरीर में लिम्फ नोड्स गर्दन, बगल और ग्रोइन जैसे शरीर के अलग-अलग हिस्सों में पाए जाते हैं. ग्रोइन एरिया शरीर का वो हिस्सा है जहां पेट और जांघ मिलते हैं. इनका काम इंफेक्शन को खून में फैलने से रोकना है. जब लिम्फ नोड्स में कैंसर शुरू होता है, तो इसे लिम्फोमा कहते हैं.
लिम्फोमा एक तरह का ब्लड कैंसर है. ये बच्चों और बड़ों, दोनों को हो सकता है. लिम्फोमा के दो मुख्य प्रकार होते हैं- हॉजकिन लिम्फोमा और नॉन हॉजकिन लिम्फोमा. हॉजकिन लिम्फोमा के मुख्य रूप से 5 प्रकार होते हैं. वहीं, नॉन-हॉजकिन लिम्फोमा में 30 से भी ज़्यादा प्रकार शामिल हैं. हर तरह के लिम्फोमा का इलाज अलग होता है.
ये भी पढ़ें: लहसुन खाने से हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल, शरीर की गंदगी सब ठीक होगा? सच जान लीजिए
लिम्फोमा क्यों होता है?
ज्यादातर कैंसर का कोई एक कारण नहीं होता. कुछ रिस्क फैक्टर्स ज़रूर हैं. जैसे फेफड़ों के कैंसर का रिस्क स्मोकिंग से बढ़ सकता है. पेट के कैंसर के लिए खानपान की आदतें ज़िम्मेदार हो सकती हैं. लिवर कैंसर शराब पीने की वजह से हो सकता है. लेकिन ज़्यादातर ब्लड कैंसर का कोई एक कारण नहीं होता.
लिम्फोमा होने का भी कोई सटीक कारण नहीं पता है. कुछ तरह के लिम्फोमा वायरल इंफेक्शन की वजह से हो सकते हैं. वायरल इंफेक्शन की वजह से इम्यून सिस्टम में होने वाले बदलाव और जेनेटिक म्यूटेशन से भी लिम्फोमा हो सकता है.

लिम्फोमा के लक्षण क्या हैं?
अपने शरीर में दिखने वाले छोटे-छोटे लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें. जैसे एक हफ़्ते से ज़्यादा समय तक बार-बार बुखार आना. बिना किसी वजह के वज़न कम होना. बिल्कुल भूख न लगना. बहुत सुस्ती महसूस होना. नहाते समय या कपड़े बदलते समय गर्दन, बगल या ग्रोइन में लिम्फ नोड्स या गांठ महसूस होना. ये सभी लिम्फोमा के संकेत हो सकते हैं. इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करते हुए डॉक्टर से मिलें.
अगर लिम्फोमा का पता शुरुआती स्टेज में चल जाए, तो समय पर इलाज शुरू किया जा सकता है. कई मामलों में मरीज़ के ठीक होने की संभावना बेहतर होती है.
ये भी पढ़ें: गले में कुछ अटका हुआ-सा लगे और ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें
लिम्फोमा का इलाज
अगर किसी मरीज़ में लिम्फोमा का शक होता है, तो लिम्फ नोड की बायोप्सी कर सकते हैं. इसमें लिम्फ नोड के कुछ हिस्से या पूरी लिम्फ नोड को निकालकर माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है. इससे पता चलता है कि लिम्फोमा है या कोई इंफेक्शन. कई बार टीबी जैसे इंफेक्शन की वजह से भी लिम्फ नोड्स बढ़ सकते हैं. अगर लिम्फोमा हो, तो PET-CT के ज़रिए बीमारी की स्टेज पता की जाती है.
लिम्फोमा के प्रकार और स्टेज के अनुसार इलाज तय किया जाता है. इसमें कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, स्टेम सेल ट्रांसप्लांट और CAR-T सेल थेरेपी शामिल हैं. मरीज़ की बीमारी के प्रकार और स्थिति के हिसाब से इलाज किया जा सकता है.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
वीडियो: सेहत: गले में कुछ अटका हुआ लगता है?










