एक-दो छींक आना नॉर्मल है. पर कुछ लोगों को लगातार एक के बाद एक कई छींकें आती हैं. छींक-छींक के उनका जीना दूभर हो जाता है. अब यहां कई लोग करते हैं चालाकी. जैसे ही छींक आती है, वो तुरंत उसे रोक लेते हैं. फिर घरवाले चाहे कितना भी बोल लें कि छींक मत रोका करो. वो नहीं सुनते, क्योंकि छींक रोकना आदत बन जाती है. ये एक बड़ी गलती है.
छींक आती है तो रोक लेते हैं, किसी दिन कान का पर्दा फट जाएगा
छींक रोकने से मना क्यों किया जाता है, ये जानेंगे आज. डॉक्टर से ये भी समझेंगे कि छींक क्यों आती है. छींकें कंट्रोल करने के लिए क्या घरेलू नुस्खे कर सकते हैं. और कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए.

छींक रोकने से मना क्यों किया जाता है, ये जानेंगे आज. डॉक्टर से ये भी समझेंगे कि छींक क्यों आती है. छींकें कंट्रोल करने के लिए क्या घरेलू नुस्खे कर सकते हैं. और कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए.
छींक क्यों आती है?
ये हमें बताया डॉक्टर तुषार गोयल ने.

छींक अपने आप होने वाली एक प्रक्रिया है. जब धूल, प्रदूषण, परागकण या कोई इरिटेंट नाक की झिल्ली में परेशानी पैदा करता है. तब नाक दिमाग को इन चीज़ों को बाहर निकालने का सिग्नल देती है. इसके बाद दिमाग फेफड़ों को तेज़ी से हवा बाहर निकालने का सिग्नल भेजता है. फिर फेफड़ों से तेज़ हवा नाक के रास्ते बाहर आती है. इसके साथ नाक में मौजूद धूल और दूसरी गंदगी भी बाहर निकल जाती है.
एक-दो बार छींक आना बिल्कुल नॉर्मल है. इससे घबराने या डरने की ज़रूरत नहीं है. छींक शरीर का खुद को बचाने का एक तरीका है. इसके ज़रिए हमारा शरीर धूल, परागकण, वायरस, बैक्टीरिया या दूसरी इरिटेंट चीज़ों को बाहर निकालने की कोशिश करता है. लेकिन जब बार-बार छींक आने लगे, तो इससे परेशानी होने लगती है. कई बार ये समझना मुश्किल होता है कि कौन-सी चीज़ छींक आने की वजह बन रही है. लगातार छींक आने पर अचानक सिरदर्द, चक्कर या कान में दर्द जैसे लक्षण भी हो सकते हैं.
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छींकों से आराम पाने के घरेलू नुस्खे
सबसे ज़रूरी है स्टीम यानी भाप लेना. अगर आपके पास यूकेलिप्टस ऑयल (नीलगिरी का तेल) या पुदीने के पत्तों का रस है. तब आप उसकी भाप ले सकते हैं. इससे नाक के अंदर मौजूद गंदगी या इरिटेंट बाहर निकल सकते हैं. जिससे नाक की झिल्ली साफ़ हो जाएगी और छींकें आना बंद हो जाएंगी. वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन होने पर भी छींक आ सकती है.
इसके लिए कुछ और घरेलू उपाय भी किए जा सकते हैं. जैसे अदरक का रस शहद में मिलाकर लेना. इससे शरीर में गर्मी आती है और छींकें कंट्रोल करने में मदद मिलती है. अजवाइन का पानी ठंडा करके पीने से भी छींकें कंट्रोल होती हैं.

छींक रोकने से मना क्यों किया जाता है?
छींक के दौरान फेफड़ों से निकलने वाली हवा नाक के रास्ते बाहर आती है. अगर आप छींक रोकेंगे, तो शरीर में बना प्रेशर किसी न किसी तरह बाहर निकलने की कोशिश करेगा. अगर आप छींक को तुरंत रोक देते हैं या रोकने की कोशिश करते हैं. तब कई बार ये प्रेशर नाक की जगह कान के पर्दे की तरफ जा सकता है. इससे कान के पर्दे फट सकते हैं या सुनाई देना कम हो सकता है. छींक रोकने से अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है. नाक से खून भी आ सकता है.
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कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
अगर आपको लगातार छींक आ रही है. घरेलू उपाय करने के बाद भी परेशानी बढ़ रही है. दो-तीन दिन से बुखार बना हुआ है, तो ऐसे में डॉक्टर से मिलें. कई बार मौसम बदलने पर छींक आने के साथ सांस फूलने लगती है. ऐसा एलर्जी की वजह से हो सकता है. इसकी टेस्टिंग की जा सकती है.
डॉक्टर से मिलकर पता करें कि आपको बार-बार छींक क्यों आ रही है. अगर आप एलर्जी करने वाली चीज़ से बचेंगे, तो अपने आप राहत मिलेगी. इसके लिए आप मास्क लगा सकते हैं. इससे आपको काफी आराम मिलेगा.
आपको किस चीज़ से एलर्जी है, ये पता करने के लिए डॉक्टर स्किन प्रिक टेस्ट, ब्लड टेस्ट और पैच टेस्ट कर सकते हैं. खाने-पीने की किसी चीज़ से एलर्जी का शक हो, तो डॉक्टर कुछ समय के लिए उस चीज़ को खाने से मना कर सकते हैं. इसके बाद देखते हैं कि लक्षणों में कोई बदलाव आता है या नहीं. अ
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
वीडियो: सेहत: क्या आप भी अपनी छींक रोकते हैं?













