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ब्लड डोनेट करने के कई फायदे, लेकिन कब नहीं करना चाहिए? डॉक्टर से समझिए

ब्लड डोनेट करने के बहुत फ़ायदे हैं. खासकर थैलेसीमिया और कैंसर के मरीज़ों को या जिनकी सर्जरी होनी है. महिलाओं को भी डिलीवरी के बाद खून की ज़रूरत पड़ती है.

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हर 3 महीने में ब्लड डोनेट किया जा सकता है

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  • डॉक्टर अंजली केळकर ने बताया कि स्वस्थ व्यक्ति हर 3 से 4 महीने में ब्लड डोनेट कर सकता है और ब्लड डोनेशन से शरीर में रेड ब्लड सेल्स, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स का उत्पादन होता है।
  • ब्लड डोनेट करने में भ्रम की स्थिति इसलिए होती है क्योंकि कई लोग दवाइयां ले रहे होते हैं या हाल ही में वैक्सीन लगवाए होते हैं, जिससे उन्हें ब्लड डोनेट करने के लिए सही समय का पता नहीं होता।
  • ब्लड डोनेशन के बाद 24 से 48 घंटे में शरीर रिकवर करना शुरू करता है, और डोनेट करने वाले को आराम करना चाहिए, साथ ही अगले 3 दिन तक हल्का भोजन व तरल पदार्थ लेना जरूरी होता है।

आपने कभी ब्लड डोनेट किया है? अगर जवाब हां है, तो खुद को शाबाशी दीजिए. आप कई लोगों की जान बचा चुके हैं. एक व्यक्ति हर 3 से 4 महीने में ब्लड डोनेट कर सकता है. पर ब्लड डोनेशन से जुड़ी ऐसी कई बातें हैं जिन्हें लेकर लोग बहुत कन्फ्यूज़न में रहते हैं. जैसे- ‘मेरी दवा चल रही है, तो मैं ब्लड डोनेट कर सकता हूं या नहीं’. ‘कुछ टाइम पहले वैक्सीन लगवाई है. मुझे ब्लड डोनेट करना चाहिए या नहीं.’ ‘ब्लड डोनेशन के बाद कहीं मुझे चक्कर तो नहीं आ जाएगा? कमज़ोरी तो नहीं होगी?’

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ऐसे ही कई सवाल हैं, जिनके जवाब अक्सर लोग नहीं जानते. पर उन्हें पता होने चाहिए. इसलिए आज  हम डॉक्टर से जानेंगे कि ब्लड डोनेट करने के क्या फ़ायदे हैं. ब्लड डोनेशन के बाद शरीर में क्या होता है. कौन लोग सेफली ब्लड डोनेट कर सकते हैं. किन्हें ब्लड डोनेट करने से फिलहाल बचना चाहिए. ब्लड डोनेशन से पहले और बाद में क्या बातें ध्यान रखना ज़रूरी है.

ब्लड डोनेट करने के क्या फ़ायदे हैं?

ये हमें बताया डॉक्टर अंजली केळकर ने.

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डॉ. अंजली केळकर, हेड एंड सीनियर कंसल्टेंट, लेबोरेटरी सर्विसेज़ एंड ट्रांसफ़्यूज़न मेडिसिन, अपोलो हॉस्पिटल्स, पुणे

ब्लड डोनेट करने के बहुत फ़ायदे हैं. खासकर थैलेसीमिया और कैंसर के मरीज़ों को या जिनकी सर्जरी होनी है. महिलाओं को भी डिलीवरी के बाद खून की ज़रूरत पड़ती है. खून किसी लैब में नहीं बनाया जा सकता. इसलिए ब्लड डोनेट करना बहुत ज़रूरी है. 

जो खून डोनेट किया जाता है, उसे कई हिस्सों में बांटा जाता है. जैसे रेड ब्लड सेल्स, प्लाज़्मा और प्लेटलेट्स. एक व्यक्ति के ब्लड डोनेट करने से कई लोगों को फ़ायदा पहुंचता है.

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ब्लड डोनेशन के बाद शरीर में क्या होता है?

हमारे शरीर से करीब 350 से 450ml खून लिया जाता है. ब्लड डोनेशन के तुरंत बाद चक्कर आ सकते हैं, कमज़ोरी लग सकते हैं. ज़्यादातर लोगों को ब्लड डोनेट करने के बाद कोई दिक्कत नहीं होती. खून देने के बाद आराम करने की सलाह दी जाती है. पोषक तत्वों से भरपूर चीज़ें और जूस वग़ैरा दिया जाता है. 

हमारा शरीर 24 से 48 घंटे में दोबारा प्लाज़्मा बनाने लगता है. बोन मैरो भी रेड ब्लड सेल्स तुरंत बनाना शुरू कर देता है. इससे दो-चार हफ्तों के अंदर रिकवरी हो जाती है.

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जो सुई लगाई जा रही है, वो नई, स्टेराइल और डिस्पोज़ेबल होनी चाहिए  
किन लोगों को ब्लड डोनेट नहीं करना चाहिए?

ब्लड डोनेट करने से पहले डॉक्टर या स्टाफ कुछ ज़रूरी जानकारियां लेते हैं. ब्लड डोनेट करने वाले की मेडिकल जांच भी की जाती है. पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने पर ही ब्लड डोनेट कराया जाता है. हालांकि जिन लोगों का हीमोग्लोबिन कम है. जो मेडिकली फिट नहीं हैं, प्रेग्नेंट महिलाएं है. जिन्होंने हाल ही में कोई वैक्सीन लगवाई है या कोई बीमारी हुई है. ऐसे लोगों को ब्लड डोनेट करने से थोड़ा रुकना चाहिए.

अगर आप कोई खास दवा ले रहे हैं, या कोई हल्की दिक्कत है. तब आप एक बार ब्लड सेंटर में जाकर ज़रूर पूछें. हो सकता है कि आप खून देने के लिए पूरी तरह फिट हों.

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ब्लड डोनेशन से पहले और बाद में क्या ध्यान रखें?

- एक रात पहले आपकी नींद पूरी हुई हो.

- हल्का खाना खाया हो.

- पानी और बाकी तरल पदार्थ लिए हों.

- आप स्वस्थ महसूस कर रहे हों.

- ब्लड डोनेट करने के बाद रिफ्रेशमेंट ज़रूर लें.

- अगले 3 दिनों तक लिक्विड डाइट मेंटेन करें.

- जिस जगह पट्टी लगाई गई है, उसे डॉक्टर से पूछ कर ही हटाएं.

- कुछ समय तक भारी वज़न उठाने से बचे.

खून हमेशा लाइसेंस्ड और सर्टिफाइड ब्लड बैंक में ही डोनेट करें. ये ध्यान रखें कि जो सुई आपको लगाई जा रही है, वो नई, स्टेराइल और डिस्पोज़ेबल हो. 

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.) 

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