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अमेरिका में फैल रहा साइक्लोस्पोरियासिस, भारत में भी मिलते हैं केस, कितनी खतरनाक है ये बीमारी?

अमेरिका के 34 राज्यों से साइक्लोस्पोरियासिस के मामले आ चुके हैं. कई मरीज़ अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है. राहत की बात ये है कि अभी इससे किसी की जान नहीं गई है.

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साइक्लोस्पोरियासिस बीमारी एक पैरासाइट की वजह से फैलती है (AI Image)

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  • अमेरिका में साइक्लोस्पोरियासिस बीमारी तेजी से फैल रही है, जिसमें अब तक 1,500 से अधिक कंफर्म्ड और 5,100 से ज्यादा सस्पेक्टेड मामले सामने आ चुके हैं।
  • यह बीमारी साइक्लोस्पोरा कैयेटानेन्सिस नामक पैरासाइट के कारण होती है, जो दूषित पानी और कच्ची सब्ज़ियों के सेवन से शरीर में प्रवेश करता है।
  • अधिकारियों ने संक्रमित स्रोत का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है और लोगों को कच्ची सब्ज़ियां खाने से बचने की सलाह दी गई है।

अमेरिका में इन दिनों एक बीमारी तेज़ी से फैल रही है. इसका नाम है- साइक्लोस्पोरियासिस. यूएस सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, अब तक इसके 1,500 से ज़्यादा कंफर्म्ड केस मिल चुके हैं. जबकि 5,100 से ज़्यादा सस्पेक्टेड मामलों की जांच रही है. 13 जुलाई तक अमेरिका के 34 राज्यों से साइक्लोस्पोरियासिस के मामले आ चुके हैं. कई मरीज़ अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है. राहत की बात ये है कि अभी इससे किसी की जान नहीं गई है.

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साइक्लोस्पोरियासिस बीमारी एक पैरासाइट की वजह से फैलती है. इसका नाम है- साइक्लोस्पोरा कैयेटानेन्सिस. ये पैरासाइट शरीर में जाकर इंफेक्शन करता है. खासकर निचले पाचन तंत्र में. इसमें छोटी आंत का ज़्यादातर हिस्सा, बड़ी आंत, मलाशय यानी रेक्टम और गुदा यानी एनस शामिल हैं. शरीर में इंफेक्शन होने के बाद जो बीमारी होती है, उसे साइक्लोस्पोरियासिस कहते हैं.

अमेरिका में क्यों फैली ये बीमारी?

अमेरिका में लोगों को ये बीमारी क्यों हो रही है, इसकी सटीक वजह अब तक पता नहीं चल सकी है. पर माना जा रहा है कि शायद ऐसा सलाद में इस्तेमाल होने वाली हरी पत्तेदार सब्ज़ियों और लेट्यूस की वजह से हो रहा है. इसलिए वहां कई एक्सपर्ट लोगों को सलाह दे रहे हैं, कि वो फिलहाल ताज़ी कच्ची सब्ज़ियां और सलाद खाने से बचें. कम से कम तब तक, जब तक कि अधिकारी इस बीमारी के सोर्स का पता न लगा लें. अमेरिका में पॉपुलर रेस्टोरेंट चेन टाको बेल भी जांच के दायरे में है कि कहीं इसी के सलाद से तो बीमारी शुरू नहीं हुई.

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साइक्लोस्पोरियासिस बीमारी करने वाला पैरासाइट शरीर में कैसे पहुंचता है, इसके क्या लक्षण होते हैं, ये हमने पूछा पीएसआरआई हॉस्पिटल में सर्जिकल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एंड ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के कंसल्टेंट, डॉक्टर निशांत कुरियन से.

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डॉ. निशांत कुरियन, कंसल्टेंट, सर्जिकल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एंड ऑन्कोलॉजी, पीएसआरआई हॉस्पिटल

डॉक्टर निशांत कहते हैं कि साइक्लोस्पोरा कैयेटानेन्सिस पैरासाइट मुख्य रूप से छोटी आंत को संक्रमित करता है. इसकी वजह से पाचन से जुड़ी दिक्कतें होती हैं. इस पैरासाइट का इंफेक्शन तब होता है, जब कोई व्यक्ति इस पैरासाइट से दूषित खाना खाता है या दूषित पानी पीता है. ये पैरासाइट अक्सर मल से दूषित पानी या कच्चे फल-सब्ज़ियों के ज़रिए शरीर में पहुंचता है.

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साइक्लोस्पोरियासिस के लक्षण 

एक बार जब ये पैरासाइट शरीर में पहुंच जाए, तो लक्षण दिखने में करीब हफ्तेभर का समय लगता है. इसके लक्षण हैं: 

- बार-बार पानी जैसे दस्त आना.

- पेट में दर्द या मरोड़ उठना.

- भूख कम लगना.

- उबकाई आना.

- गैस और पेट फूलना.

- थकान, कमज़ोरी.

- हल्का बुखार.

- वज़न कम होना.

अगर इलाज न हो, तो ये लक्षण कुछ दिनों से लेकर महीनों तक रह सकते हैं. कई बार लक्षण बार-बार लौट आते हैं. आमतौर पर ये जानलेवा नहीं होता. पर दिक्कत तो देता ही है.

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साइक्लोस्पोरा कैयेटानेन्सिस नाम के परजीवी से फैलती है साइक्लोस्पोरियासिस 

साइक्लोस्पोरियासिस का इलाज 

साइक्लोस्पोरा कैयेटानेन्सिस का इंफेक्शन हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकता है. जिन लोगों की इम्यूनिटी कमज़ोर है. जो पहले से बीमार चल रहे हैं. बच्चे या बुज़ुर्ग हैं. उनमें दिक्कत गंभीर हो सकती है.  इसलिए ज़रूरी है लक्षण दिखते ही डॉक्टर के पास जाना. वो आपको खास एंटीबायोटिक दवा देंगे. पानी की कमी से बचने के लिए ORS और दूसरे लिक्विड्स पीने की सलाह भी दी जाती है.

साइक्लोस्पोरियासिस हो ही न, इसके लिए अपने हाथ साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं. कुछ भी बनाने से पहले हाथ साफ करना ज़रूरी है. फलों और सब्ज़ियों को बहते पानी के नीचे ठीक से साफ करें. साफ पानी पिएं. कोशिश करें कि पका खाना खाएं, क्योंकि सिर्फ पकाने से पैरासाइट के शरीर में जाने का रिस्क घट जाता है.

 भारत में भी साइक्लोस्पोरियासिस के मामले सामने आते रहते हैं. इसलिए हमें भी साफ-सफाई का ध्यान रखने और सतर्क रहने की ज़रूरत है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.) 

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