स्पर्म काउंट कम होना. पुरुषों की एक बहुत बड़ी समस्या है. क्यों? क्योंकि इसका सीधा असर पड़ता है फर्टिलिटी पर. फर्टिलिटी यानी बच्चे पैदा करने की क्षमता. पुरुषों के सीमन यानी वीर्य में करोड़ों स्पर्म होते हैं. जब इनमें से कोई स्पर्म, महिला के एग से मिलता है तो भ्रूण बनना शुरू होता है. ये भ्रूण धीरे-धीरे विकसित होता है और होती है प्रेग्नेंसी. यानी किसी महिला के प्रेग्नेंट होने के लिए स्पर्म का एग तक पहुंचना ज़रूरी है. जब स्पर्म काउंट कम होता है. तो उसके महिला के एग तक पहुंचने का चांस भी कम हो जाता है. नतीजा? प्रेग्नेंट होने में दिक्कतें आने लगती हैं. इसलिए अच्छा स्पर्म काउंट बहुत ज़रूरी है.
स्पर्म काउंट कम हो गया कैसे पता करें, बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए? डॉक्टर ने सब बताया
पुरुषों के सीमन यानी वीर्य में करोड़ों स्पर्म होते हैं. जब इनमें से कोई स्पर्म, महिला के एग से मिलता है तो भ्रूण बनना शुरू होता है. ये भ्रूण धीरे-धीरे विकसित होता है और होती है प्रेग्नेंसी. यानी किसी महिला के प्रेग्नेंट होने के लिए स्पर्म का एग तक पहुंचना ज़रूरी है.


आजकल पुरुषों में स्पर्म काउंट कम होना बहुत ही आम दिक्कत बनती जा रही है. इसकी ज़िम्मेदार हैं कुछ गलतियां. जिन्हें कई लोग रोज़ बार-बार कर रहे हैं. इन्हीं गलतियों के बारे में जानेंगे. डॉक्टर से समझेंगे कि पुरुषों में स्पर्म काउंट कम क्यों हो रहा है. रोज़ की कौन-सी आदतें और चीज़ें स्पर्म काउंट सबसे ज़्यादा घटाती हैं. क्या मोबाइल, लैपटॉप, टाइट अंडरवियर और गर्मी से सच में स्पर्म काउंट कम होता है. स्पर्म काउंट कम होने का पता कैसे चलता है. और स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए क्या करें व किन गलतियों से बचें.
आजकल पुरुषों में स्पर्म काउंट कम क्यों हो रहा है?
ये हमें बताया डॉक्टर सूरज पिन्नी ने.

आजकल पुरुषों में स्पर्म काउंट लगातार कम होता देखा जा रहा है. इसके पीछे कई वजहें हैं. सबसे बड़ा कारण है ख़राब सेहत. इसके अलावा, संतुलित और पौष्टिक डाइट न लेना. शारीरिक रूप से एक्टिव न रहना. कम उम्र में डायबिटीज़, हाई बीपी, थायरॉयड और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी मेटाबॉलिक बीमारियां होना. वज़न ज़्यादा होना. इन सबसे स्पर्म काउंट और क्वालिटी पर असर पड़ता है. सेक्स से होने वाले इंफेक्शन और पेशाब के इंफेक्शन से भी स्पर्म की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है. अंडकोष के भीतर की नसों के सूजने से भी स्पर्म क्वालिटी पर असर पड़ सकता है.
कौन-सी आदतें और चीज़ें स्पर्म काउंट सबसे ज़्यादा घटाती हैं?
स्पर्म की क्वालिटी पर सबसे ज़्यादा असर ख़राब लाइफस्टाइल का पड़ता है. शारीरिक रूप से एक्टिव न रहना और लंबे समय तक बैठे रहना. इससे शरीर में चर्बी और वज़न बढ़ने लगता है. वज़न बढ़ने से हॉर्मोन्स का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे स्पर्म की क्वालिटी प्रभावित होती है.
ठीक से खाना न लेना और फल-सब्ज़ियां कम खाना भी वजह है. जंक फूड और ज़्यादा तला-भुना खाना भी स्पर्म काउंट घटाता है.
ज़्यादा गर्मी और रेडिएशन के संपर्क में रहना. तंबाकू, सिगरेट और शराब से भी स्पर्म की क्वालिटी को नुकसान पहुंचा सकता है.
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क्या लैपटॉप गोद में रखने और टाइट अंडरवियर से स्पर्म काउंट कम होता है?
आजकल कई लोग लंबे समय तक बैठे रहते हैं और शारीरिक रूप से एक्टिव नहीं रहते. लैपटॉप को गोद में रखकर इस्तेमाल करने से अंडकोष सीधे गर्मी के संपर्क में आते हैं. इससे स्पर्म की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है. दरअसल अंडकोष शरीर के बाकी हिस्सों की तुलना में थोड़ा ठंडे रहते हैं. इससे स्पर्म प्रोडक्शन और उसकी क्वालिटी बेहतर रहती है. सीधी गर्मी मिलने पर स्पर्म बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. प्रदूषण और माइक्रोप्लास्टिक भी स्पर्म की क्वालिटी पर असर डाल सकता है.
बहुत टाइट अंडरवियर या टाइट कपड़े पहनने से अंडकोष का तापमान बढ़ सकता है. लैपटॉप को लंबे समय तक गोद या शरीर पर रखकर इस्तेमाल करने से भी अंडकोष गर्म हो सकते हैं. इन आदतों की वजह से स्पर्म की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है. इसलिए ऐसी आदतों को बदलना बेहतर है.
अंडकोष के आसपास की नसों में सूजन होने पर वहां का तापमान बढ़ सकता है. इससे स्पर्म की क्वालिटी और स्पर्म बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. कुछ स्टडीज़ में मोबाइल फोन के रेडिएशन का भी स्पर्म की क्वालिटी पर असर देखा गया है.

स्पर्म काउंट कम होने का पता कैसे चलता है?
स्पर्म काउंट जांचने के लिए सीमन एनालिसिस किया जाता है. इस टेस्ट में स्पर्म से जुड़ी तीन मुख्य चीज़ें देखी जाती हैं. पहली, स्पर्म की संख्या कितनी है. दूसरी, स्पर्म की मूवमेंट कैसी है यानी स्पर्म सही तरीके से तैर पा रहे हैं या नहीं. तीसरी, स्पर्म का आकार सामान्य है या नहीं.
अगर ये तीनों पैरामीटर सामान्य हों तो स्पर्म की क्वालिटी भी सामान्य मानी जाती है. ज़रूरत पड़ने पर हॉर्मोन टेस्ट, थायरॉयड टेस्ट और हीमोग्लोबिन टेस्ट भी कराए जाते हैं. इन जांचों से उन समस्याओं का पता चलता है जो स्पर्म की क्वालिटी को प्रभावित कर सकते हैं.
कुछ मामलों में अंडकोष का अल्ट्रासाउंड भी कराया जाता है, ताकि अंदरूनी समस्या का पता चल सके.
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स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए क्या करें और किन गलतियों से बचें?
स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए अच्छी लाइफस्टाइल अपनाना सबसे ज़रूरी है. रोज़ कम से कम 40 मिनट एक्सरसाइज़ करें. वॉकिंग, जॉगिंग, रनिंग और दूसरी कार्डियो एक्सरसाइज़ को रुटीन में शामिल करें. डाइट में फल और सब्ज़ियां पर्याप्त मात्रा में लें.
अगर नॉन-वेज खाते हैं, तो मछली को प्राथमिकता दे सकते हैं. मेडिटेरेनियन डाइट और ज़्यादा फल व नट्स खाने से सेक्शुअल हेल्थ और स्पर्म की क्वालिटी सुधरती है.
इसके अलावा तंबाकू, सिगरेट और शराब से दूरी बनाएं. वज़न ज़्यादा हो तो उसे कंट्रोल करें. कंसीव करने में दिक्कत आने पर सिर्फ़ महिला ही नहीं, पुरुष की भी समय पर जांच करानी चाहिए.
स्पर्म काउंट कम है या नहीं, ये भी पहले पता करना ज़रूरी है. ज़्यादा देर करने पर चीज़ें कंट्रोल से बाहर हो सकती हैं. कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के टेस्टोस्टेरॉन के इंजेक्शन लगवा लेते हैं. ये न करें, इससे स्पर्म क्वालिटी और ज़्यादा कम हो सकती है.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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