दो किस्से सुनिए. पहला किस्सा 21 साल के माइकल का है. अमेरिका में रहते हैं. नज़र कमज़ोर है, इसलिए कॉन्टैक्ट लेंस लगाते हैं. एक दिन माइक कॉन्टैक्ट लेंस निकाले बिना ही सो गए. अगली सुबह जब उनकी नींद खुली, तो आंख का बुरा हाल था. पहले लगा कि शायद एलर्जी हुई होगी. लेकिन जब आंख में भयंकर दर्द होने लगा. दिखना बंद हो गया, तो वो डॉक्टर के पास गए. वहां जाकर पता चला कि कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सोने की वजह से उनकी आंख में अकैंथामीबा केराटाइटिस नाम का पैरासाइटिक इंफेक्शन हो गया है. इस इंफेक्शन की वजह से उनकी एक आंख की रोशनी चली गई और उन्हें कॉर्निया ट्रांसप्लांट समेत कई सर्जरी करानी पड़ीं.
कॉन्टैक्ट लेंस आंखों की रोशनी छीन लेंगे, अगर ये गलतियां कर दीं
कॉन्टैक्ट लेंस मुख्य रूप से डेली, वीकली/बायवीकली और मंथली होते हैं. डेली डिस्पोज़ेबल लेंस एक बार इस्तेमाल करने के बाद फेंक दिए जाते हैं.



दूसरा किस्सा इंडियन टीवी एक्ट्रेस जैस्मिन भसीन का है. साल 2024 में जैस्मिन को एक इवेंट में शामिल होना था. इसके लिए उन्होंने जैसे ही कॉन्टैक्ट लेंस लगाए, उनकी आंखों में दर्द होने लगा.
उन्होंने सोचा कि किसी तरह इवेंट खत्म होने का इंतज़ार कर लिया जाए, फिर वो लेंस हटा देंगी. पर दर्द लगातार बढ़ता जा रहा था. एक पॉइंट के बाद दर्द इतना तेज़ हो गया कि उन्हें कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था. फिर जैस्मिन ने डॉक्टर को दिखाया, और वहां पता चला कि उनके कॉर्निया डैमेज हो चुके हैं.

हमने आपको सिर्फ दो किस्से सुनाए. लेकिन ऐसे किस्सों की भरमार है. कई लोग आंखों में लेंस लगाते हैं. पर अक्सर कुछ ऐसी छोटी-छोटी गलतियां हो जाती हैं. जिससे ये लेंस फायदे के बजाय नुकसान पहुंचाने लगते हैं. जैसे कि कॉन्टैक्ट लेंस रात में पहनकर सोना या फिर अपने लिए सही लेंस न चुनना.
अगर आप भी किसी तरह का कॉन्टैक्ट लेंस लगाते हैं. या आपकी जान-पहचान में कोई लगाता है. तो ये स्टोरी आपके बहुत काम आएगी. आज डॉक्टर आपको बताएंगे कि कॉन्टैक्ट लेंस पहननकर सोना कितना खतरनाक हो सकता है. अगर गलती से कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सो गए हैं तो क्या करें. क्या कॉन्टैक्ट लेंस की कोई एक्सपायरी डेट होती है. डेली, वीकली और मंथली लेंस में क्या अंतर है. और अपने लिए एक अच्छा कॉन्टैक्ट लेंस कैसे चुनें.
कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सोना कितना ख़तरनाक?ये हमें बताया डॉक्टर नीरज संदूजा ने.

कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सोना आंखों के लिए घातक हो सकता है. हमारी आंख का सबसे आगे वाला पारदर्शी हिस्सा कॉर्निया कहलाता है. कॉर्निया को आंसुओं से लगातार नमी और ऑक्सीज़न मिलती रहती है. कॉन्टैक्ट लेंस लगाने पर कॉर्निया तक ऑक्सीज़न और नमी कम पहुंचती है. जागते समय पलकें झपकने से कॉर्निया को कुछ हद तक ऑक्सीज़न और नमी मिल जाती है. लेकिन अगर कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सो जाएं, तो कॉर्निया तक ऑक्सीज़न और नमी पहुंचना बंद हो जाती है. हमारे आंसुओं में कुछ बैक्टीरिया भी होते हैं, जो लेंस और कॉर्निया के बीच फंस जाते हैं. इससे आंखों में इंफेक्शन होने का ख़तरा कई गुना बढ़ जाता है. गंभीर मामलों में आंखों की रोशनी जा सकती है या कॉर्निया में इंफेक्शन हो सकता है.
गलती से कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सो गए तो क्या करें?अगर गलती से कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सो गए हैं, तो जागते ही सबसे पहले लेंस निकालने की कोशिश करें. कई बार सोने के बाद लेंस सूख जाते हैं और आंख से चिपक सकते हैं. ऐसे में उन्हें ज़बरदस्ती निकालने की कोशिश न करें. पहले आर्टिफिशियल टियर्स या डॉक्टर की बताई हुई लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स डालें. 4–5 मिनट इंतज़ार करें, ताकि लेंस दोबारा नरम हो जाए.
इसके बाद लेंस को धीरे-धीरे और सावधानी से निकालें. लेकिन अगर आंखें लाल हो गई हैं, धुंधला दिख रहा है या दर्द हो रहा है. तब ऐसे में तुरंत डॉक्टर के पास जाएं क्योंकि कॉर्निया में इंफेक्शन हो सकता है. वो आंखों की जांच के बाद ज़रूरत के मुताबिक इलाज करेंगे.
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कॉन्टैक्ट लेंस की एक्सपायरी डेट होती है?हर कॉन्टैक्ट लेंस की एक एक्सपायरी डेट होती है, जो उसके पैक पर लिखी होती है. कॉन्टैक्ट लेंस इस्तेमाल करने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट ज़रूर जांच लें. समय के साथ लेंस को सुरक्षित और नम रखने वाला सॉल्यूशन ख़राब होने लगता है. इसके बाद कीटाणुओं को रोकने की उसकी क्षमता कम हो जाती है और लेंस दूषित हो सकते हैं. ऐसे एक्सपायर्ड लेंस पहनने से आंखों में बैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन का ख़तरा बढ़ जाता है. सॉल्यूशन खराब होने पर लेंस की नमी और ऑक्सीजन बनाए रखने की क्षमता भी कम हो सकती है. ऐसे लेंस सख्त हो जाते हैं और आंखों पर ठीक तरह से फिट नहीं बैठते. इन्हें पहनने से कॉर्निया पर खरोंच या चोट लग सकती है.
इसकी वजह से आंखों में जलन, पानी आना और इंफेक्शन का रिस्क बढ़ सकता है. इसलिए हर बार कॉन्टैक्ट लेंस इस्तेमाल करने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट ज़रूर देखें. अगर लेंस की एक्सपायरी डेट निकल चुकी है, तो उसे फेंक दें और बिल्कुल इस्तेमाल न करें.

कॉन्टैक्ट लेंस मुख्य रूप से डेली, वीकली/बायवीकली और मंथली होते हैं. डेली डिस्पोज़ेबल लेंस एक बार इस्तेमाल करने के बाद फेंक दिए जाते हैं. इनसे इंफेक्शन का ख़तरा सबसे कम होता है क्योंकि इन्हें स्टोर करने की ज़रूरत नहीं पड़ती. एलर्जी वाले लोगों के लिए ये लेंस काफी अच्छे होते हैं. इनसे बहुत साफ दिखाई देता है क्योंकि हर दिन नया लेंस इस्तेमाल होता है. लेकिन रोज़ नए लेंस की वजह से इनकी कीमत बढ़ जाती है. बार-बार यात्रा करने वालों और खिलाड़ियों के लिए डेली लेंस अच्छा ऑप्शन हैं.
बायवीकली और मंथली लेंस सबसे ज़्यादा किफायती होते हैं. बायवीकली यानी 15 दिन तक इस्तेमाल होने वाले लेंस सॉल्यूशंस में स्टोर करने पड़ते हैं. इनकी रोज़ सफाई भी ज़रूरी होती है. ऐसे लेंस दो हफ्ते बाद फेंक दिए जाते हैं इसलिए इंफेक्शन का ख़तरा कम होता है.
मंथली लेंस एक ही जोड़ी पूरे महीने इस्तेमाल करने के लिए बनाए जाते हैं, इसलिए ये ज़्यादा किफायती होते हैं. लेकिन बार-बार इस्तेमाल करने से इन पर प्रोटीन और तेल की परत जम सकती है. इसलिए इनकी सफाई का विशेष ध्यान रखना पड़ता है.
कॉन्टैक्ट लेंस लगातार 8–10 घंटे से ज़्यादा न पहनें. लेंस लगाने और निकालने से पहले हमेशा हाथ अच्छी तरह धोएं. लेंस निकालने के बाद उन्हें ताज़े लेंस सॉल्यूशन से साफ़ करें और उसी सॉल्यूशन में स्टोर करें. सुबह दोबारा लेंस लगाने से पहले हाथ साफ़ करें. फिर लेंस को सॉल्यूशन से साफ़ करके ही पहनें.
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अपने लिए सबसे अच्छे कॉन्टैक्ट लेंस कैसे चुनें?सही कॉन्टैक्ट लेंस का चुनाव आपकी आंखों की ज़रूरत पर निर्भर करता है. इसके लिए आपके चश्मे का नंबर, कॉर्निया का आकार और आंखों में बनने वाले आंसुओं की जांच की जाती है. इसलिए कॉन्टैक्ट लेंस खरीदने से पहले आंखों के किसी डॉक्टर या ऑप्टोमेट्रिस्ट से आंखों की जांच ज़रूर करवाएं. जांच के आधार पर डॉक्टर बताएंगे कि आपके लिए किस तरह का कॉन्टैक्ट लेंस सबसे सही रहेगा.
ऐसा लेंस चुनें जिसकी ऑक्सीज़न पार होने की क्षमता अच्छी हो ताकि आंखों में सूखापन न हो और कॉर्निया तक पर्याप्त ऑक्सीज़न पहुंचती रहे. जिससे आंखों में इंफेक्शन का कोई चांस न रहे. लेंस की नमी बनाए रखने की क्षमता भी अच्छी होनी चाहिए. UV प्रोटेक्शन वाले कॉन्टैक्ट लेंस चुनना बेहतर होता है. लेंस न तो इतना पतला हो कि उसे संभालना मुश्किल हो जाए और न ही इतना सख्त कि आंखों में जलन या असुविधा हो. इन बातों का ध्यान रखते हुए ही अपने लिए कॉन्टैक्ट लेंस चुनें.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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