कई बार हमारे शरीर पर ऐसे नीले निशान पड़ जाते हैं. खासकर हाथ या पैरों पर. इन्हें नील पड़ना या ब्रूसेज़ भी कहते हैं. आमतौर पर ये निशान तब होते हैं. जब हमें कोई चोट लगती है और इसलिए इन्हें दबाने पर दर्द भी होता है. पर कई बार ये नीले निशान बिना किसी चोट के दिखने लगते हैं. अपने आप यूं ही आ जाते हैं. पर क्यों? यही पता करेंगे आज. डॉक्टर से जानेंगे कि बिना चोट के शरीर पर नीले निशान क्यों पड़ते हैं. कब ये सामान्य हैं, कब खतरे की घंटी. और इन्हें दूर करने के लिए क्या कर सकते हैं.
बिना चोट शरीर पर नीले निशान पड़ रहे? ये कैंसर का संकेत भी हो सकता है
बिना चोट लगे शरीर के किसी हिस्से में नीले निशान पड़ने से कई परेशानियां हो सकती हैं. आज डॉक्टर से जानेंगे कि बिना चोट के शरीर पर नीले निशान क्यों पड़ते हैं. कब ये सामान्य हैं, कब खतरे की घंटी. और इन्हें दूर करने के लिए क्या कर सकते हैं.


बिना चोट के शरीर पर नीले निशान क्यों पड़ते हैं?
ये हमें बताया डॉक्टर एम.के. सिंह ने.

बिना चोट शरीर के किसी हिस्से में नील पड़ने को इकाइमोसिस कहते हैं. ये स्किन के नीचे मौजूद खून की छोटी नलियों (कैपिलरीज़) के कमज़ोर होने से होता है. खून जमने यानी ब्लड क्लॉटिंग की प्रक्रिया गड़बड़ होने पर भी नीले निशान पड़ सकते हैं. कुछ बीमारियों में कैपिलरीज़ कमज़ोर हो जाती हैं या प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं, जिससे ये समस्या हो सकती है.
अगर कोई ब्लड थिनर यानी खून पतला करने वाली दवाएं ले रहा है. कोई पेनकिलर लंबे समय से खा रहा है. डेंगू जैसा कोई वायरल इंफेक्शन हुआ है, जिसमें प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं. तब ऐसे में शरीर पर नीले धब्बे दिखाई पड़ सकते हैं. वैस्कुलाइटिस यानी खून की नलियों में सूजन होने पर भी स्किन पर नीले निशान पड़ सकते हैं.
कुछ मेडिकल कंडीशंस जैसे ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) में भी ऐसा हो सकता है. ITP यानी इडियोपैथिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक पुरपुरा जैसी बीमारी में प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं. इससे स्किन के नीचे नीले रंग के धब्बे आ जाते हैं.
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पोषण तत्वों की कमी भी एक बड़ा कारण है. विटामिन C और विटामिन K की कमी भी नीले निशान पड़ने का कारण बन सकती है. बढ़ती उम्र के साथ स्किन कमज़ोर हो जाती है. खून की नलियों का लचीलापन भी खत्म हो जाता है. ऐसे में हल्का दबाव या मामूली चोट भी स्किन के नीचे नीले निशान छोड़ सकती है.

कब ये निशान सामान्य हैं और कब खतरे की घंटी?
अगर शरीर पर पड़ने वाले नीले निशानों का साइज़ लगातार बढ़ रहा है. नीले निशान के साथ सूजन भी हो रही है. साथ में बुखार है. नाक, दांत या मसूड़ों से खून आ रहा है. उल्टी में या स्टूल से खून आ रहा है. तब ऐसे में तुरंत मेडिकल हेल्प लेनी चाहिए.
बारिश के मौसम में डेंगू के मामले बढ़ते हैं. अगर बुखार के साथ स्किन पर नीले निशान दिखाई दें, तब डेंगू की संभावना हो सकती है. ऐसे में प्लेटलेट्स और अन्य ज़रूरी जांचें करानी चाहिए.
इनका इलाज क्या है?
जो लोग खून पतला करने वाली दवाएं ले रहे हैं. ITP या ब्लड कैंसर जैसी कोई बीमारी है. तब उन्हें चोट लगने से बचने के लिए खास सावधानी बरतनी चाहिए. ऐसे लोगों में हल्का दबाव पड़ने पर भी स्किन के नीचे खून जमा हो सकता है.
कोई मेडिकल कंडीशन हो तो उसका पूरा इलाज कराना चाहिए. अगर मौसमी बुखार की वजह से दिक्कत हुई है, तो उसका इलाज ज़रूरी है. गंभीर इंफेक्शन (सेप्सिस) या ब्लड कैंसर होने पर भी उचित इलाज कराना चाहिए.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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