पालथी मारकर बैठना हमारे देश में काफी आम है. खाना खाते समय, पूजा-पाठ के दौरान या कोई खेल खेलते समय लोग अक्सर पालथी मारकर बैठते हैं. कई लोग तो ऑफिस में कुर्सी पर ही पालथी मारकर बैठ जाते हैं. सोफे और बेड पर भी लोग पालथी मार लेते हैं. यानी ये बहुत ही कॉमन प्रैक्टिस है.
पालथी मारकर बैठना घुटनों के लिए कितना सही? ये लोग कभी पालथी न मारें
कई बार डॉक्टर पालथी मारकर बैठने से मना करते हैं. अगर घुटने के अंदर का कार्टिलेज या मेनिस्कस डैमेज हो या फिर घुटनों में मॉडरेट अर्थराइटिस हो. तब पालथी मारकर बैठने से तकलीफ़ बढ़ सकती है.

कई लोगों को लगता है कि ज़्यादा देर पालथी मारकर बैठने से घुटनों को नुकसान पहुंचता है. कभी-कभी डॉक्टर भी इसके लिए मना कर देते हैं. वहीं कई लोग मानते हैं कि पालथी मारने के फायदे ही फायदे हैं. इसका कोई नुकसान नहीं है. अब इनमें से कौन-सा पक्ष सही है, ये जानेंगे आज.
आपको बताएंगे कि क्या लंबे समय तक पालथी मारकर बैठने से घुटनों को नुकसान पहुंचता है, या ये सिर्फ एक मिथक है. किन लोगों को पालथी मारकर बैठने से बचना चाहिए. क्या पालथी मारकर बैठने का कोई सही तरीका या समय-सीमा है. और अगर पालथी मारकर बैठने के बाद घुटनों में दर्द हो, तो इसकी क्या वजह हो सकती है.
ये हमें बताया डॉक्टर सचिन तपस्वी ने.

सामान्य तौर पर पालथी मारकर बैठने में कोई दिक्कत नहीं है. आप आराम से पालथी मारकर बैठ सकते हैं. पालथी मारकर बैठने से मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग होती है और उनका लचीलापन बढ़ता है. इससे रीढ़ की हड्डी, कूल्हों, जांघों, पिंडलियों और घुटनों के आसपास की मांसपेशियां लचीली बनती हैं. इससे आमतौर पर फ़ायदा ही होता है. लेकिन कई बार डॉक्टर पालथी मारकर बैठने से मना करते हैं.
अगर घुटने के अंदर का कार्टिलेज या मेनिस्कस डैमेज हो या फिर घुटनों में मॉडरेट अर्थराइटिस हो. तब पालथी मारकर बैठने से तकलीफ़ बढ़ सकती है. खासकर ज़मीन पर बैठकर पालथी लगाने और फिर ज़मीन से उठने में परेशानी हो सकती है. वहीं, अगर आप बेड पर पालथी मारकर बैठे हैं. तब उठते समय पैर नीचे करके आसानी से खड़े हो सकते हैं. ऐसे में घुटनों पर उतना दबाव नहीं पड़ता.
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किन लोगों को पालथी मारकर बैठने से बचना चाहिए?- जिन लोगों को गठिया यानी अर्थराइटिस है.
- जिनके घुटने के लिगामेंट में चोट या टियर है.
- खासकर जिनका मेनिस्कस टियर हुआ है (मेनिस्कस घुटने के जोड़ के भीतर मौजूद C-आकार के कार्टिलेज को कहा जाता है. ये शॉक एब्जॉर्बर यानी झटके रोकने वाली गद्दी की तरह काम करता है.)
ऐसे लोगों को ज़मीन पर पालथी मारकर बैठने से बचना चाहिए. दरअसल, जब आप पालथी मारकर बैठने के बाद ज़मीन से उठते हैं. तब घुटनों के जोड़ों पर ज़्यादा दबाव आने से चोट बढ़ सकती है. इससे आपको तकलीफ भी ज़्यादा हो सकती है.

जब तक आप आराम से पालथी मारकर बैठ पा रहे हैं, तब तक बैठ सकते हैं. ऐसा कोई तय समय नहीं है कि उससे ज़्यादा देर पालथी मारकर बैठने पर घुटनों को नुकसान होने लगेगा. हालांकि, अगर पालथी मारकर बैठने पर दर्द होता है या पहले से घुटनों में कोई समस्या है. तब ज़बरदस्ती पालथी मारकर बैठने की ज़रूरत नहीं है.
अगर पालथी मारकर बैठने के बाद घुटनों में दर्द होता है, तो इसके दो कारण हो सकते हैं.
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पहला, आपको पालथी मारकर बैठने की आदत नहीं है. ऐसे में धीरे-धीरे इसकी आदत डालने से परेशानी कम हो सकती है.
दूसरा, अगर लगातार दर्द रहता है और घुटने में हल्की सूजन भी आने लगे. पालथी मारकर बैठने के बाद पैर सीधा करते समय घुटनों में अकड़न महसूस हो. घुटने में बार-बार क्लिक की आवाज़ आए या घुटना लॉक हो जाए, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें. ऐसा होने पर डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है क्योंकि ये घुटने के अंदर किसी समस्या का संकेत हो सकता है
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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