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मेटाबॉलिक बर्नआउट हुआ तो शरीर ठप पड़ जाएगा, बचने का तरीका जान लीजिए

डॉक्टर से समझेंगे कि मेटाबॉलिक बर्नआउट क्या है. इसमें कौन-सी समस्याएं शामिल हैं. ये एक-दूसरे से कैसे जुड़ी हुई हैं. किन लक्षणों से पता चल सकता है कि आपकी मेटाबॉलिक हेल्थ बिगड़ रही है. किन्हें इसका ज़्यादा रिस्क है और मेटाबॉलिक बर्नआउट से कैसे बचें.

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हर वक्त थका-थका महसूस होता है?

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  • मेटाबॉलिक बर्नआउट तब होता है जब व्यक्ति की लाइफस्टाइल लंबे समय तक असंतुलित रहे, जैसे खाने का ध्यान न रखना, एक्सरसाइज न करना, पर्याप्त नींद न लेना और लगातार तनाव में रहना।
  • मेटाबॉलिक बर्नआउट के पीछे रोज़ाना की गलत आदतें जैसे गलत खाने-पीने का तरीका, शारीरिक गतिविधि की कमी और अनियमित सोने के कारण शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है।
  • मेटाबॉलिक बर्नआउट से बचाव के लिए संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना और तनाव कम करने वाली गतिविधियां अपनाना आवश्यक माना जाता है।

अगर कोई आपसे तीन दिन लगातार काम कराए. इस काम के चक्कर में आप ठीक से खा न पाएं. अपनी सीट से उठ न पाएं. सो न पाएं. हर वक्त लगातार स्ट्रेस में रहें. तो क्या होगा? चौथे दिन आपका शरीर थककर चूर हो जाएगा. शरीर से भी और मन से भी. अंग्रेज़ी में इसके लिए एक शब्द है- बर्नआउट. जब बर्नआउट होता है, तो कुछ भी करना दूभर हो जाता है. ये बर्नआउट सिर्फ हमें बाहरी तौर पर ही महसूस नहीं होता. हमारे शरीर का अंदरूनी सिस्टम भी बर्नआउट हो सकता है. इसे कहते हैं- मेटाबॉलिक बर्नआउट. 

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मेटाबॉलिक शब्द बना है मेटाबॉलिज़्म से. मेटाबॉलिज़्म यानी हम जो खाना खाते हैं, उसे एनर्जी में बदलने, नए सेल्स बनाने और पुराने को बचाए रखने का पूरा प्रोसेस. इस मेटाबॉलिज़्म की वजह से ही हमें एनर्जी मिलती है, हमारा शरीर ठीक से काम कर पाता है. पर कभी-कभी ये सिस्टम भी बोल जाता है. यानी ठप पड़ जाता है. 

ऐसा होता है रोज़ की छोटी-छोटी गलतियों से. जो आगे चलकर बड़ी बीमारियां कर देती हैं. इसी के बारे में जानेंगे आज. डॉक्टर से समझेंगे कि मेटाबॉलिक बर्नआउट क्या है. इसमें कौन-सी समस्याएं शामिल हैं. ये एक-दूसरे से कैसे जुड़ी हुई हैं. किन लक्षणों से पता चल सकता है कि आपकी मेटाबॉलिक हेल्थ बिगड़ रही है. किन्हें इसका ज़्यादा रिस्क है और मेटाबॉलिक बर्नआउट से कैसे बचें.

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मेटाबॉलिक बर्नआउट में क्या होता है?  

ये हमें बताया डॉक्टर राजीवा गुप्ता. 

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डॉ. राजीवा गुप्ता, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, सी.के.बिड़ला हॉस्पिटल, गुरुग्राम

मेटाबॉलिक बर्नआउट तब होता है, जब हमारी लाइफस्टाइल लंबे समय तक असंतुलित और अनियमित रहती है. यानी हम अपनी सेहत का ठीक से ध्यान नहीं रखते. जैसे अपने खाने पर ध्यान न देना. हेल्दी खाना न खाना. एक्सरसाइज़ न करना. पर्याप्त नींद न लेना. हमेशा तनाव में रहना. लगातार काम करते रहना. इन चीज़ों से शरीर के काम करने का तरीका बिगड़ने लगता है, जिससे कई दिक्कतें हो सकती हैं. इन सभी बदलावों और उनके असर को मिलाकर मेटाबॉलिक बर्नआउट कहा जाता है.

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इसमें कौन-सी समस्याएं शामिल हैं?

मेटाबॉलिक बर्नआउट कोई बीमारी नहीं है. इसमें कई चीज़ें आपस में जुड़ी होती हैं. अगर आप खाने-पीने का ध्यान नहीं रखते. ज़्यादा कैलोरी वाला या तला-भुना खाना खाते हैं, तो वज़न बढ़ने लगता है. अगर इसके साथ रोज़ एक्सरसाइज़ नहीं करते, तो वज़न और बढ़ सकता है. बढ़ा हुआ वज़न डायबिटीज़ होने का ख़तरा बढ़ाता है. हाई ब्लड प्रेशर का रिस्क भी बढ़ जाता है. 

ब्लड शुगर बढ़ने पर थकान महसूस हो सकती है. थकान की वजह से एक्सरसाइज़ नहीं करेंगे. अपनी सेहत पर ध्यान नहीं देंगे, तो मोटापा बढ़ने लगेगा. मोटापे की वजह से नींद ज़्यादा आएगी. अक्सर दिन में नींद आने लगेगी. रात में खर्राटे लेने की समस्या हो सकती है. इन सबसे दिल की बीमारियों का ख़तरा भी बढ़ जाता है. ये सारी दिक्कतें मेटाबॉलिक बर्नआउट की वजह से होती हैं.

मेटाबॉलिक बर्नआउट के लक्षण

- धीरे-धीरे वज़न बढ़ना.

- हमेशा थकावट रहना.

- ब्लड शुगर बढ़ी हुई मिलना.

- ब्लड प्रेशर हाई होना.

- सोने के बावजूद अगले दिन ताज़ा महसूस न करना.

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सुबह उठकर फ्रेश महसूस न करना मेटाबॉलिक बर्नआउट का संकेत है 

किन्हें मेटाबॉलिक बर्नआउट का ज़्यादा रिस्क है?

- जो रोज़ एक्सरसाइज़ नहीं करते.

- अक्सर बाहर का खाना खाते हैं.

- अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाते हैं.

- ठीक से सोते नहीं हैं.

- हमेशा तनाव में रहते हैं.

- ज़्यादातर वक्त बैठे हुए बिताते हैं, खासकर जो लोग नाइट शिफ्ट में काम करते हैं.

- जिनके घर में डायबिटीज़, बीपी या दिल की बीमारी का इतिहास हो.

- ऐसे लोगों को मेटाबॉलिक बर्नआउट का ज़्यादा रिस्क रहता है.

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मेटाबॉलिक बर्नआउट से बचाव

मेटाबॉलिक बर्नआउट से बचाव किया जा सकता है. हम अपने खाने पर ध्यान दें. अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने से बचें. शाकाहारी खाना खाएं, जिसमें सलाद ज़्यादा हो. नमक कम लें. 

रोज़ एक्सरसाइज़ करें, इसमें स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी शामिल हो. स्ट्रेस हो तो योग कर सकते हैं. ऐसा करके मेटाबॉलिक बर्नआउट से बचा जा सकता है. इसलिए शुरू से ही ध्यान देना ज़रूरी है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.) 

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