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घंटों फोन-लैपटॉप चलाने की आदत है, 'मोबाइल नेक' से जिंदगी भर परेशान रहेंगे

एक नॉर्मल इंसान के सिर का वज़न लगभग 5 किलोग्राम होता है. लेकिन जब हम मोबाइल फोन या लैपटॉप का इस्तेमाल करते समय गर्दन को आगे की तरफ झुकाते हैं. तब सिर का वजन बढ़ जाता है.

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आप कितनी देर फोन चलाते हैं?

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  • मोबाइल नेक सिंड्रोम तब होता है जब लोग लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग करते हुए गर्दन को आगे की तरफ झुकाकर रखते हैं, जिससे गर्दन में दर्द और अकड़न होने लगती है।
  • फोन और लैपटॉप के लगातार उपयोग के कारण गर्दन पर अधिक वजन पड़ता है, जिससे मांसपेशियों में थकान आती है और तकनीकी उपयोग से जुड़ी गलत पोश्चर मोबाइल नेक की मुख्य वजह है।
  • इस समस्या से बचने के लिए नियमित ब्रेक लेना, सही पोश्चर बनाए रखना और गर्दन की स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज करना आवश्यक है, अन्यथा यह सर्वाइकल डिस्क की गंभीर समस्या तक बढ़ सकता है।

बिना फोन या लैपटॉप के दिन बिताना कितना मुश्किल लगता है न. काम हो, पढ़ाई हो या एंटरटेनमेंट, हर चीज़ के लिए या तो फोन चाहिए या लैपटॉप. इसलिए हमारी लाइफ़ का आधा टाइम स्क्रीन के आगे बीत रहा है. लेकिन लगातार फोन, लैपटॉप चलाने की ये आदत धीरे-धीरे हमारी गर्दन के लिए कई बड़ी प्रॉब्लम्स खड़ी कर सकती है. इन्हीं में से एक प्रॉब्लम है मोबाइल नेक या टेक्स्ट नेक.

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अगर आपको लंबे समय तक मोबाइल चलाने के बाद गर्दन में दर्द, भारीपन या अकड़न महसूस होती है, तो इसे नॉर्मल थकान समझकर नज़रअंदाज़ न करें. ये मोबाइल नेक या टेक्स्ट नेक की शुरुआत हो सकती है. और ये प्रॉब्लम सिर्फ ऑफिस में बैठकर लैपटॉप पर काम करने वालों को नहीं होती, बल्कि लंबे समय तक मोबाइल यूज़ करने वाले किसी भी इंसान को हो सकती है.

पर अच्छी बात ये है कि सही पोश्चर, कुछ आसान आदतों और रेगुलर एक्सरसाइज़ की मदद से इस समस्या से काफ़ी हद तक बचा जा सकता है. मोबाइल नेक या टेक्स्ट नेक आखिर होता क्यों है? इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं? किन लोगों को सबसे ज़्यादा ख़तरा होता है? इन सभी सवालों के जवाब जानेंगे आज. इससे बचने का तरीका भी समझेंगे. 

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मोबाइल नेक सिंड्रोम क्या है? किन्हें ज़्यादा ख़तरा?

हमें बताया डॉक्टर प्रवीण टिट्टल ने. 

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डॉ. प्रवीण टिट्टल, डायरेक्टर, ऑर्थोपेडिक्स, सी.के.बिड़ला हॉस्पिटल, गुरुग्राम

ये उन लोगों को होता है, जो लंबे समय तक मोबाइल फोन, लैपटॉप चलाते हैं. इसकी वजह से उनकी गर्दन के पीछे दर्द शुरू हो जाता है. 

अगर हम सीधे पोश्चर में बैठे हैं, तो एक नॉर्मल इंसान के सिर का वज़न लगभग 5 किलोग्राम होता है. लेकिन जब हम मोबाइल फोन या लैपटॉप का इस्तेमाल करते समय गर्दन को आगे की तरफ झुकाते हैं. तब सिर का वजन बढ़ जाता है. यानी जो वजन सीधे पोश्चर में 5 किलोग्राम था, वो गर्दन को 45 डिग्री आगे झुकाकर लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करते वक्त लगभग 20 से 22 किलोग्राम होता है. 

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अगर ऐसा रोज़ाना बार-बार होता रहे, तो धीरे-धीरे गर्दन की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं. लगातार ज़्यादा इस्तेमाल होने की वजह से उनमें थकान आ जाती है. इसके बाद धीरे-धीरे दर्द शुरू हो जाता है. यही वजह है कि मोबाइल फोन या लैपटॉप के ज़्यादा इस्तेमाल से लोगों में मोबाइल नेक या टेक्स्ट नेक की समस्या देखने को मिलती है.

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मोबाइल नेक सिंड्रोम के क्या लक्षण हैं? 

- गर्दन के पीछे हल्का लेकिन लगातार रहने वाला दर्द.

- गर्दन के पीछे भारीपन महसूस होना.

- गर्दन की मांसपेशियों में जकड़न.

- सिर में भारीपन महसूस होना.

- एडवांस स्टेज में हाथ, कलाई या कंधे के आसपास झुनझुनी, फैलता हुआ दर्द या सुन्न महसूस होना.

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लंबे समय तक फोन, लैपटॉप चलाने से गर्दन पर दबाव बढ़ता है (AI Image)

क्या इससे कुछ कॉम्प्लिकेशंस हो सकती है?

समय रहते ध्यान न देने पर सर्वाइकल डिस्क की समस्या हो सकती है. सर्वाइकल डिस्क की समस्या होने पर नस पर दबाव पड़ सकता है. जिसकी वजह से हाथ में सुन्नपन, झुनझुनी और कमज़ोरी आ सकती है. ये एक गंभीर स्थिति हो सकती है.

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मोबाइल नेक सिंड्रोम से कैसे बचें और कब डॉक्टर को दिखाएं? 

मोबाइल नेक को रोकने करने के लिए सबसे ज़रूरी है सही पोश्चर बनाए रखना. जिन लोगों का मोबाइल फोन या लैपटॉप का ज़्यादा इस्तेमाल होता है उन्हें इनको आई लेवल पर रखकर इस्तेमाल करना चाहिए.

जो लोग हाई-रिस्क कैटेगरी में आते हैं, उन्हें हर 30 से 45 मिनट के बाद छोटा ब्रेक लेना चाहिए. जिससे गर्दन की मांसपेशियों में हलचल बनी रहे और वो लंबे समय तक एक ही पोज़ीशन में न रहें.

जो लोग ज़्यादा फोन या लैपटॉप चलाते हैं, उन्हें गर्दन की स्ट्रेंथनिंग और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करनी चाहिए. इससे गर्दन की मांसपेशियां लचीली रहती हैं. उनकी ताकत बढ़ती है और जैसे-जैसे उनकी ताकत बढ़ती है. लंबे समय तक बैठकर काम करने की क्षमता भी धीरे-धीरे बेहतर होती जाती है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.) 

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