‘एक दौर ऐसा था, जिसमें मैं बहुत ज़्यादा वर्कआउट कर रही थी. हैवी वेट ट्रेनिंग, क्रॉसफिट, हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग और बहुत सारा कार्डियो. मेरे शरीर के ऊपरी हिस्से पर तो बहुत जल्दी फर्क दिखता. मेरे हाथ पतले हो जाते. मेरा चेहरा शार्प हो जाता. मेरी कमर भी सिकुड़ जाती. लेकिन मेरे थाइज़ पर कोई असर नहीं पड़ता. वो मज़बूत तो होते, पर पतले नहीं. मुझे लगता रहा कि यही मेरा बॉडी टाइप है. मैं अपने पैरों की तरफ देखती और सोचती कि आखिर ये ऐसे क्यों हैं?’
जांघों से चर्बी कम नहीं हो रही? ये मोटापा नहीं, लिपेडेमा हो सकता है
लिपेडेमा एक बहुत ही कॉमन प्रॉब्लम है. इसलिए आज हम इसी पर बात करेंगे. डॉक्टर से समझेंगे कि लिपेडेमा क्या है, ये मोटापे से कैसे अलग है. लिपेडेमा क्यों होता है. इसका पता कैसे चलता है. लिपेडेमा का इलाज क्या है. और अगर समय पर इलाज न हो तो क्या-क्या दिक्कतें हो सकती हैं.

ये कहना है टीवी एक्ट्रेस देबिना बनर्जी का. इन्हें आप ‘चिड़ियाघर’ और रामायण’ जैसे सीरियल्स में देख चुके हैं. देबिना ने कुछ वक्त पहले, सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर बताया कि वो लिपेडेमा नाम की मेडिकल कंडीशन से जूझ रही हैं. इसमें जांघों के पास बहुत ज़्यादा चर्बी जमा हो जाती है. थाइज़ थिक हो जाते हैं. ये मोटापे से अलग है.
लिपेडेमा एक बहुत ही कॉमन प्रॉब्लम है. इसलिए आज हम इसी पर बात करेंगे. डॉक्टर से समझेंगे कि लिपेडेमा क्या है, ये मोटापे से कैसे अलग है. लिपेडेमा क्यों होता है. इसका पता कैसे चलता है. लिपेडेमा का इलाज क्या है. और अगर समय पर इलाज न हो तो क्या-क्या दिक्कतें हो सकती हैं.
ये हमें बताया डॉक्टर रमन गोयल ने.

लिपेडेमा यानी शरीर में असामान्य तरीके से चर्बी जमा होना. ये समस्या महिलाओं में ज़्यादा देखी जाती है. लिपेडेमा कम उम्र में, प्रेग्नेंसी के दौरान या मेनोपॉज़ के बाद हो सकता है. इसमें जांघों, कूल्हों और पैरों में ज़रूरत से ज़्यादा चर्बी जमा होने लगती है. वैसे ये तो बहुत लोगों में होता है. पर अगर दोनों पैरों में बिल्कुल बराबर चर्बी जमा हो. चर्बी दबाने पर दब जा रही हो या नीले निशान पड़ रहे हों, पैरों में बहुत भारीपन लगता हो, तब आपको लिपेडेमा हो सकता है.
कुछ लोगों में ये समस्या बांहों में भी हो सकती है. लिपेडेमा की एक खास पहचान ये है कि पैरों के पंजे सामान्य रहते हैं. सूजन या चर्बी टखनों तक रहती है, लेकिन पंजों में नहीं होती. डाइटिंग या वज़न कम करने पर शरीर का बाकी वजन घट सकता है. लेकिन लिपेडेमा वाली चर्बी आसानी से कम नहीं होती. इसलिए कई लोगों की जांघें और कूल्हे भारी बने रहते हैं. जबकि शरीर के बाकी हिस्सों से वज़न कम हो जाता है.
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लिपेडेमा का पता कैसे चलता है?लिपेडेमा की पहचान के लिए कोई खास ब्लड टेस्ट या अल्ट्रासाउंड टेस्ट नहीं होता. हालांकि, अल्ट्रासाउंड कराया जा सकता है. जिससे पता चल सके कि सूजन की कोई दूसरी वजह तो नहीं है. पर लिपेडेमा का कोई खास टेस्ट नहीं होता. अक्सर ये समस्या परिवार में देखने को मिलती है. अगर मां, नानी या दादी के साथ ये समस्या थी तब आपको भी लिपेडेमा होने का रिस्क बढ़ जाता है. डॉक्टर मरीज़ की जांच करके इसे पहचान सकते हैं. अगर डाइट और एक्सरसाइज के बाद शरीर का बाकी वज़न कम हो जाए. लेकिन जांघों, कूल्हों या पैरों की चर्बी वैसी ही बनी रहे, तो डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें.

अगर लिपेडेमा का शक हो, तो सबसे पहले डॉक्टर और डाइटिशियन से सलाह लें. कई बार रेगुलर एक्सरसाइज़ और फिज़ियोथेरेपी से राहत मिल जाती है. ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर कंप्रेशन स्टॉकिंग्स पहनने की सलाह दे सकते हैं. इन स्टॉकिंग्स से काफी आराम मिल जाता है. अगर इनसे भी राहत न मिले, तो एक खास तरह का लिपोसक्शन किया जा सकता है. जैसे कुछ लोगों की बेरियाट्रिक सर्जरी की जाती है. जिन लोगों के पूरे शरीर का वज़न ज़्यादा है. अगर उनमें बेरियाट्रिक सर्जरी करने के बाद भी जांघों, कूल्हों या पैरों की चर्बी बनी रहती है. तब ये लिपेडेमा हो सकता है.
लिपेडेमा को समय पर पहचानना ज़रूरी है. अगर जांघों, कूल्हों, टखनों के ऊपर या बाज़ुओं की चर्बी कम नहीं हो रही, और हाथ व पैर के पंजे नॉर्मल हैं, तो ये लिपेडेमा हो सकता है.
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लिपेडेमा का इलाज न कराने पर क्या दिक्कतें हो सकती हैं?शुरुआत में चलने-फिरने में दिक्कत, पैरों में भारीपन और दर्द हो सकता है. धीरे-धीरे इसका असर घुटनों, कूल्हों और कमर के जोड़ों पर पड़ सकता है. इलाज में देरी से लिम्फेटिक सिस्टम पर भी असर पड़ने लगता है. इसे लिपो-लिम्फेडेमा कहते हैं. ये बहुत तकलीफ देता है क्योंकि इसमें सूजन बहुत तेज़ी से बढ़ती जाती है. लिपेडेमा का इलाज न होने से मेंटल स्ट्रेस भी होने लगता है. इसलिए लिपेडेमा को जल्दी पहचानना और समय पर इलाज करना सबसे ज़रूरी है.
खूब डाइटिंग और एक्सरसाइज़ के बाद भी अगर जांघों या हाथों का फैट कम नहीं होता, तो एक बार डॉक्टर से मिलना ठीक रहेगा. क्या पता, वजह लिपेडेमा हो.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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