‘हर 5 में से 1 व्यक्ति को कभी-न-कभी कैंसर हो सकता है और इसका असर लगभग हर व्यक्ति की ज़िंदगी पर पड़ता है. ये बीमारी हर दिन 26 हज़ार से ज़्यादा लोगों की जान ले रही है. दुनियाभर में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण कैंसर ही है.’ वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन की एक रिपोर्ट है. ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट ऑन कैंसर 2026. इसी से ये सारी बातें निकलकर आई हैं. रिपोर्ट बताती है कि हर साल पूरी दुनिया में कैंसर के 2 करोड़ से ज़्यादा नए मामले सामने आते हैं. लगभग 1 करोड़ लोगों की मौत भी हो जाती है.
भारत में ये कैंसर सबसे आम, लक्षण जान लीजिए
WHO की ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट ऑन कैंसर 2026 के मुताबिक, अगर तुरंत और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो 2050 तक हर साल कैंसर के नए मामलों की संख्या बढ़कर साढ़े 3 करोड़ तक पहुंच सकती है.

इस बीमारी की वजह से पूरी दुनिया में लाखों लोग शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं. अगर तुरंत और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो 2050 तक हर साल कैंसर के नए मामलों की संख्या बढ़कर साढ़े 3 करोड़ तक पहुंच सकती है.
ये सब हम आपको डराने के लिए नहीं बता रहे. बस सतर्क कर रहे हैं. अगर कैंसर का समय रहते पता चल जाए और सही इलाज हो, तो मरीज़ के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है. भारत में कुछ कैंसर के मामले सबसे ज़्यादा सामने आते हैं. जैसे ब्रेस्ट कैंसर, लंग कैंसर, सर्विकल कैंसर और मुंह का कैंसर. इन सभी कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं, इसका जवाब जान लीजिए.
ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती संकेत
इनके बारे में हमें बताया डॉक्टर अमोल बलवंत आखाडे में.

ब्रेस्ट कैंसर होने पर ब्रेस्ट में गांठ (लंप) महसूस हो सकती है. निप्पल से डिस्चार्ज हो सकता है. बगल (एग्ज़िला) में गांठ महसूस हो सकती है. कभी-कभी निप्पल पर घाव या उससे खून भी आ सकता है. हालांकि, इन लक्षणों का मतलब हमेशा ब्रेस्ट कैंसर नहीं होता. 70–80% मामलों में, खासकर युवा महिलाओं में, हॉर्मोनल बदलाव की वजह से गांठ हो सकती है.
अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो घबराएं नहीं. तुरंत किसी ऑन्कोलॉजिस्ट से जांच कराएं. डॉक्टर जांच के बाद कुछ ज़रूरी टेस्ट कराने की सलाह देंगे. 40 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं को आमतौर पर मेमोग्राफी कराने की सलाह दी जाती है. 40 साल से कम उम्र की महिलाओं में मेमोग्राफी और अल्ट्रासाउंड दोनों कराए जा सकते हैं. कुछ मामलों में डॉक्टर ब्रेस्ट MRI कराने की सलाह भी देते हैं. अगर जांच में कोई गांठ कैंसर वाली लगती है, तो बायोप्सी करके कैंसर की पुष्टि की जाती है.
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लंग कैंसर के शुरुआती संकेत
- लगातार 3–4 हफ्तों से खांसी बनी हुई हो.
- खांसी के साथ खून आ रहा हो.
- बिना किसी वजह के वज़न कम हो रहा हो.
- पीठ में लगातार दर्द हो.
- खांसते समय सीने में दर्द महसूस हो.
ये लक्षण लंग कैंसर की ओर इशारा कर सकते हैं. हालांकि, भारत में लंबे समय तक रहने वाली खांसी का सबसे आम कारण अब भी टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) है. लेकिन अगर खांसी 3–4 हफ्तों से ठीक नहीं हो रही है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें. सही कारण पता करने के लिए डॉक्टर से जांच ज़रूर कराएं.

ओरल कैविटी के कैंसर के शुरुआती संकेत
ओरल कैविटी कैंसर में जीभ, मसूड़ों, मुंह की अंदरूनी परत, तालू और मुंह के अन्य हिस्सों का कैंसर शामिल है. इसका सबसे बड़ा कारण तंबाकू का सेवन है. इसमें गुटखा, खैनी, सिगरेट और ई-सिगरेट सभी आते हैं. तंबाकू में मौजूद कैंसर करने वाले तत्व मुंह के कैंसर का कारण बन सकते हैं. शुरुआत में मुंह के अंदर सफेद रंग का पैच दिखाई दे सकता है. मुंह के अंदर की स्किन सख्त (फाइब्रोसिस) महसूस हो सकती है. मुंह ठीक से न खुलना और लंबे समय तक मुंह का अल्सर ठीक न होना भी कैंसर का संकेत हो सकता है. ऐसे कोई भी लक्षण हो, तो डॉक्टर को दिखाकर बायोप्सी कराएं.
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सर्विकल कैंसर के शुरुआती संकेत
- पीरियड्स में सामान्य से ज़्यादा ब्लीडिंग होना.
- दो पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग होना.
- सेक्स के दौरान बहुत दर्द या ब्लीडिंग होना.
- मेनोपॉज़ यानी पीरियड्स बंद होने के बाद भी ब्लीडिंग होना.
- बीमारी बढ़ने पर पेशाब करने में तकलीफ हो सकती है.
- पीठ में लगातार दर्द भी हो सकता है.
ऐसा कोई लक्षण हो तो डॉक्टर से मिलकर जांच कराएं. आमतौर पर पैप स्मीयर और सर्विकल बायोप्सी जैसे टेस्ट किए जाते हैं. जांच में कैंसर का पता चलने पर उसकी स्टेज तय की जाती है और इलाज शुरू होता है.
कैंसर से होने वाली लगभग एक-चौथाई मौतें सिगरेट, शराब, मोटापे, फल-सब्ज़ियां कम खाने और कम फिज़िकल एक्टिविटी की वजह से होती हैं. फेफड़ों के कैंसर के लिए वायु प्रदूषण भी ज़िम्मेदार है. इसलिए इन रिस्क फैक्टर्स से बचना ज़रूरी है. अगर परिवार में किसी को कैंसर है, तो समय-समय पर अपनी जांच कराना भी अहम है.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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