The Lallantop

सोनम वांगचुक की तरह 18 दिन भूखा रहने पर शरीर का क्या हाल होता है?

14 जुलाई को जारी हेल्थ बुलेटिन के मुताबिक, Sonam Wangchuk का वज़न साढ़े 8 किलो कम हो चुका है. उनका बीपी 109/70 है. सोनम वांगचुक की उम्र उनसठ साल है. वो काफी कमज़ोर महसूस कर रहे हैं.

Advertisement
post-main-image
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे हैं (X @Cockroachisback)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • सोनम वांगचुक को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट के दौरान भूख हड़ताल पर 18 दिन हो चुके हैं, और उनकी सेहत में तेजी से गिरावट आई है, जुलाई के हेल्थ बुलेटिन में उनकी जानकारी दी गई है।
  • सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का कारण उनकी राजनीतिक मांगों और विरोधाभासों से जुड़ा है, और लंबे समय तक भोजन न लेने से शरीर के अंगों पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।
  • लंबे समय तक भूख हड़ताल के कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी होती है जिससे मांसपेशियों, दिल, लिवर व किडनी को नुकसान पहुंचता है; इसके कारण डॉक्टर लगातार उनकी स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में सोनम वांगचुक को भूख हड़ताल पर बैठे 18 दिन हो गए हैं. 14 जुलाई को जारी हेल्थ बुलेटिन के मुताबिक, उनका वज़न साढ़े 8 किलो कम हो चुका है. उनका बीपी 109/70 है. सोनम वांगचुक की उम्र 59 साल है. वो काफी कमज़ोर महसूस कर रहे हैं. उनकी गिरती सेहत को देखते हुए लोग उनसे हड़ताल खत्म करने का अनुरोध कर रहे हैं. 

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

सोनम वांगचुक ने 18 दिनों से कुछ नहीं खाया है. उनसे पहले अन्ना हज़ारे, इरोम शर्मिला और गुरु दास अग्रवाल जैसे नाम भूख हड़ताल कर चुके हैं. लेकिन सवाल है कि जब कोई व्यक्ति इतने दिनों तक कुछ नहीं खाता, तो उसका शरीर खुद को कैसे संभालता है?

डॉक्टर से जानेंगे कि भूखे रहने के पहले दिन शरीर में क्या होता है. दूसरे दिन से क्या बदलाव आते हैं. फिर भूखे रहने के 15 दिन बाद शरीर में क्या होता है. अगर एक महीने तक भूखा रहा जाए, तो क्या होगा. ये भी जानेंगे कि क्या लंबे समय तक भूखे रहने से होने वाला नुकसान बाद में पूरी तरह ठीक हो सकता है, या कुछ असर स्थायी भी हो सकते हैं. 

Advertisement

भूखे रहने के पहले दिन शरीर में क्या होता है?

ये हमें बताया डॉक्टर अजय नायर ने. 

dr ajay
डॉ. अजय नायर, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर

सबसे पहले शरीर अपनी स्टोर की हुई एनर्जी इस्तेमाल करता है. इसके लिए लिवर में जमा ग्लाइकोजन (कार्बोहाइड्रेट का स्टोर) टूटना शुरू होता है. जब ग्लाइकोजन का स्टोर कम होने लगता है. तब शरीर एनर्जी के लिए फैट का इस्तेमाल करना शुरू कर देता है. इस दौरान तेज़ भूख लगती है. कमज़ोरी और सिरदर्द महसूस हो सकता है. चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है. शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है.

भूखे रहने के दूसरे दिन से शरीर में क्या बदलाव आते हैं?

दूसरे-तीसरे दिन से एनर्जी के लिए शरीर फैट का ज़्यादा इस्तेमाल करने लगता है. फैट टूटने पर शरीर में कीटोन्स बनने लगते हैं. कीटोन्स एसिडिक होते हैं और खून व पेशाब, दोनों में पहुंच सकते हैं. इसके बाद शरीर प्रोटीन का भी इस्तेमाल करना शुरू कर देता है. 

Advertisement

ये भी पढ़ें: बवासीर और एनल फिशर में क्या फर्क है? लक्षण और इलाज जान लीजिए

कार्बोहाइड्रेट न मिलने पर शरीर मांसपेशियों को तोड़कर एनर्जी बनाता है. इससे मांसपेशियां कमज़ोर होने लगती हैं. दिल की मांसपेशियों पर भी असर पड़ सकता है, जिससे दिल कमज़ोर हो सकता है. शरीर में सोडियम और दूसरे इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने लगती है. डिहाइड्रेशन और कमज़ोरी लगातार बढ़ती जाती है.

भूखे रहने के 15 दिन बाद शरीर में क्या होता है?

15 दिन से ज़्यादा भूखे रहने पर शरीर के लगभग हर अंग को नुकसान पहुंचता है. खासकर दिल, लिवर और किडनी को. जांच होने पर शरीर में पोषक तत्वों और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी दिखाई देने लगती है. इम्यून सिस्टम कमज़ोर होने से इंफेक्शन का ख़तरा बढ़ जाता है. गंभीर मामलों में जान का ख़तरा भी हो सकता है.

sonam wangchuk
सोनम वांगचुक का वज़न साढ़े 8 किलो तक गिर चुका है 

एक महीने तक भूखे रहने पर शरीर में क्या होता है?

अगर फास्टिंग एक महीना या उससे ज़्यादा चलती है. तब जो अंग पहले ही कमज़ोर हो चुके हैं, उनके फ़ेल होने का ख़तरा बढ़ जाता है. दिल कमज़ोर पड़ सकता है, जिससे ब्लड प्रेशर गिरने लगता है. हार्ट रेट धीमी या अनियमित हो सकती है. दिमाग पर असर पड़ने से बेहोशी आ सकती है. सोचने-समझने की क्षमता कम हो जाती है. याद्दाश्त पर बुरा असर पड़ता है. किडनी और लिवर फ़ेल होने का ख़तरा बढ़ जाता है. गंभीर स्थिति में मरीज़ कोमा में भी जा सकता है.

लंबे समय तक भूखे रहने के बाद क्या शरीर पूरी तरह ठीक हो सकता है?

लंबे समय तक भूखे रहने से हुआ नुकसान धीरे-धीरे ठीक होता है. लेकिन खासकर बुज़ुर्गों में स्थायी नुकसान भी हो सकता है. जैसे नसों (नर्व्स) को नुकसान हो सकता है. दिमाग पर असर पड़ सकता है, जिससे याददाश्त कमज़ोर हो सकती है. ब्रेन डैमेज होने से याद्दाश्त कमज़ोर हो सकती है. दिमाग की एक्टिविटी धीमी हो जाती है. दिल को नुकसान पहुंच सकता है और हार्ट रेट धीमी या अनियमित हो सकती है. 

सेहत: 40 सेकंड जीभ बाहर निकालने से स्ट्रेस घट जाएगा?

शरीर लंबे समय तक कमज़ोर रहता है. इम्यून सिस्टम कमज़ोर होने से इंफेक्शन का ख़तरा बढ़ जाता है. लंबे समय बाद अचानक ज़्यादा खाना खिलाना भी ख़तरनाक हो सकता है. उसे रीफीडिंग सिंड्रोम हो सकता है. यानी एकदम से खाना देने पर कुछ मामलों में व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है. इसलिए खाना धीरे-धीरे और डॉक्टर की निगरानी में शुरू कराया जाता है.

आपने नोटिस किया होगा कि जब कोई व्यक्ति भूख हड़ताल पर बैठता है. तो डॉक्टर लगातार उसकी जांच करते रहते हैं. ताकि उसकी सेहत पर नज़र रखी जा सके और कोई गंभीर दिक्कत होने पर तुरंत इलाज शुरू किया जा सके.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.) 

वीडियो: सेहत: स्टूल के रास्ते में घाव कैसे ठीक करें?

Advertisement