दावा
सोशल मीडिया पर एक लंबा-चौड़ा मैसेज वायरल हो रहा है, इसमें दावाकिया जा रहा है कि अस्पताल से ठीक होकर आए मरीजों ने कोरोना को हराने का रास्ता बताया है.
पहले वायरल हो रहा मैसेज (आर्काइव लिंक)
देख लीजिए.
ये मैसेज वॉट्सऐप पर भी वायरल हो रहा है.

वायरल मैसेज में ये सब लिखा है.
पड़ताल
‘दी लल्लनटॉप’ ने इस मैसेज की विस्तार से जांच की. हमारी पड़ताल में अधिकतर दावे ग़लत निकले.कीवर्ड्स की मदद से सर्च करने पर हमें ऐसी कोई भी प्रामाणिक रिपोर्ट नहीं मिली, जिसमें कोविड-19 संक्रमण से ठीक होकर आए किसी मरीज ने ये बातें बताई हों.
13 अप्रैल, 2020, को पब्लिश टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट
(आर्काइव लिंक)
में, कई कोरोना सर्वाइवर्स के अनुभव मिलते हैं. इसके अनुसार, सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों और सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन, डॉक्टर्स पर भरोसा और आपकी मेंटल स्ट्रेंथ, कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ लड़ाई में सबसे ताकतवर हथियार हैं. चूंकि, इस वायरस की कोई दवा या वैक्सीन अभी तक नहीं बनी है. इसलिए, डॉक्टर्स दिख रहे लक्षणों और पहले से उपलब्ध दवाओं या वैक्सीन के आधार पर इलाज कर रहे हैं.
अब जानते हैं दावों की सच्चाई.
पहला दावा
इस मैसेज में दावा किया जा रहा है कि कोरोना के मरीजों को अस्पताल में ट्रीटमेंट में क्या दिया जाता था. इनसे आपके शरीर पर क्या असर पड़ता है-
- विटामिन सी का सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.अस्पताल में कोरोना मरीजों की दिनचर्या को लेकर किया जा रहा दावा भ्रामक है. ये सच है कि ऊपर लिखी आदतें हर इंसान को स्वस्थ रहने में मदद कर सकती हैं. लेकिन, ये दावा ग़लत है कोरोना के मरीजों का इसी तरह इलाज किया जा रहा है.
- विटामिन-ई शरीर की कोशिकाओं को बर्बाद होने से बचाता है.
- सूर्य की रोशनी विटामिन डी का सोर्स है. इससे हड्डियां मज़बूत होती हैं.
- अंडे से शरीर को प्रोटीन मिलता है.
- गुनगुना पानी और गर्म भोजन सेहत वाली दिनचर्या का हिस्सा हैं.
- गर्म पानी की भाप का इस्तेमाल, बंद नाक या गले को ठीक करने के लिए, घरेलू नुस्खे के तौर पर किया जाता है. लेकिन, ये सोचना ग़लत है कि गर्म पानी की भाप लेने से आपको नोवेल कोरोना वायरस का संक्रमण नहीं होगा. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और प्रेस इन्फ़ॉर्मेशन ब्यूरो की फ़ैक्ट-चेक इकाई ऐसे दावों को ग़लत बताते रहे हैं.
- 7-8 घंटे की नींद बेहतर स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी मानी जाती है. अच्छी डाइट और रेगुलर एक्सरसाइज़ की तरह.
दूसरा दावाये पढ़िए- पड़ताल: ये 25 नुस्खे आपको कोरोना वायरस से नहीं बचा सकते
दावा किया जा रहा है कि अधिक pH वैल्यू वाली चीजें खाने से आप कोरोना से बच जाएंगे.
दरअसल, pH वैल्यू एक संकेतक है, जिससे पता चलता है कि कोई वॉटर-बेस्ड सॉल्यूशन एसिडिक (अम्लीय) है या बेसिक (क्षारीय) है. आसान भाषा में कहें, तो एसिडिक मतलब खट्टा पदार्थ और बेसिक मतलब लवणीय.
pH मीटर पर 0-14 तक की वैल्यू दर्ज होती है. पानी की pH वैल्यू 7.0 है. पानी को न्यूट्रल माना जाता है. 7.0 से अधिक pH वैल्यू होने पर पदार्थ बेसिक होता है. ये मीटर 7.0 से जितना कम होगा, पदार्थ का एसिडिक होता चला जाएगा.
मैसेज में लिखी खाद्य पदार्थों की pH वैल्यू असल में कितनी है?इस मैसेज में एवोकेडो की pH वैल्यू 15.6 और डंडेलियन की pH वैल्यू 22.7 बताई गई है. ये सरासर ग़लत है. pH मीटर की सीमा 0-14 के बीच है. वायरल मैसेज में विभिन्न खाद्य पदार्थों के pH वैल्यू को लेकर किए जा रहे दावे ग़लत हैं.
नींबू की pH वैल्यू - 2.2
चूने की pH वैल्यू - 2.8
लहसुन की pH वैल्यू - 5.8
आम की pH वैल्यू - 6.0
कीनू की pH वैल्यू - 3.5
अनानास की pH वैल्यू - 3.5-5.2
नारंगी की pH वैल्यू - 3.0-4.0

लहसुन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है. लेकिन, इससे कोरोना वायरस का इलाज नहीं हो सकता.
अधिक एसिडिक चीजें खाने से शरीर पर उल्टा प्रभाव भी पड़ सकता है. ऐसा कोई वैज्ञानिक शोध उपलब्ध नहीं है, जिसमें कोरोना वायरस से बचाव के लिए एसिडिक खाद्य पदार्थों का असर देखा गया हो.
कोरोना संक्रमण के लक्षण
हमने विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेबसाइट
पर कोरोना संक्रमण के लक्षणों के बारे में पड़ताल की. WHO के अनुसार, कोरोना वायरस संक्रमण के सामान्य लक्षण हैं - बुखार, थकान और सूखी खांसी.
WHO ने कुछ और लक्षण भी बताए हैं -
सांस लेने में समस्या, शरीर में ऐंठन या दर्द, गले में खट्टापन और कुछ लोगों में डायरिया, उल्टी और नाक बहने जैसे लक्षण देखे गए हैं.इसी मैसेज में कोरोना के लक्षण दिखने पर गर्म पानी के साथ नींबू का सेवन करने की सलाह दी जा रही है. ऐसा बिल्कुल भी ना करें.
कोरोना के लक्षण दिखने पर-
सरकारी हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें.
डॉक्टर्स की सलाह लें.
स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का पालन करें.
सोशल डिस्टेंसिंग का ख़याल रखें.

कोरोना के लक्षण दिखने पर क्या करें?
नतीजा
वायरल हो रहे मैसेज में कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज का जो तरीका बताया गया है, वो पूरी तरह से भ्रामक है. हमें ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं मिली, जिसमें किसी मरीज ने मैसेज में दर्ज रूटीन का हवाला दिया हो. वायरल मैसेज में फ़ूड आइटम्स की pH वैल्यू ग़लत बताई गई है.कोरोना के लक्षण दिखने पर सरकारी वेबसाइट, सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश और प्रामाणिक रिपोर्ट्स पर ही भरोसा रखें. ऐसे मैसेजों को न तो किसी को भेजें और न ही खुद पर आज़माएं. ऐसा करना खतरनाक हो सकता है.
अगर आपको भी किसी ख़बर पर शक है
तो हमें मेल करें- padtaalmail@gmail.com
पर.
हम दावे की पड़ताल करेंगे और आप तक सच पहुंचाएंगे.














