लेकिन हम ये बात आज क्यूं कर रहे हैं? इसलिए कि आज बहुत बड़ी खगोलीय घटना होने जा रही है जो ‘वंस इन अ ब्लू मून’ होती है यानी कभी कभी होती है. लेकिन लिटररी यानि अक्षरशः भी आज ब्लू मून है. (होने को जानकर लोग कहेंगे कि आज ब्लू मून तो है ही साथ ही ब्लड मून और सुपर ब्लड मून भी है). तो इसी मौके पर हमने सोचा कि कुछ ऐसे मुहावरे या बार-बार प्रयोग में आने वाले कथन
# 1 - मुहावरा/कथन - वंस इन अ ब्लू मून

अर्थ – कदाचित ही प्रयोग – अरे मैं शराब वंस इन अ ब्लू मून ही पीता हूंग्रेगेरियन कैलेंडर में एक ही महीने में दो बार भी पूर्णिमा आ सकती है. लेकिन ऐसा ‘कदाचित ही’ हो पाता है.
कदाचित ही क्यूं?
क्यूंकि एक ही महीने में दूसरी बार पूर्णिमा आने के लिए, पहली पूर्णिमा शुरूआती एक दो दिनों में आ जानी चाहिए. और जब ग्रेगेरियन कैलेंडर के एक ही महीने में दूसरी बार पूर्णिमा आती है तो दूसरी पूर्णिमा को ब्लू मून कहते हैं. इसलिए ही जो घटनाएं बिरली हो होती हैं उन्हें ब्लू-मून की उपमा दी जाती है और उन घटनाओं को - 'वंस इन अ ब्लू मून' कहा जाता है.
भारतीय पंचांग (हिंदू कैलेंडर) में ‘ब्लू मून’ सी कोई घटना संभव नहीं है क्यूंकि उसमें हर महीने में एक बार ही पूर्णिमा आ सकती है क्यूंकि हिंदू कैलेंडर बना ही चंद्र गति के आधार पर है.
# 2 - मुहावरा/कथन - लिटमस टेस्ट

अर्थ – असली-नकली की परीक्षा प्रयोग – 2019 के चुनाव मोदी सरकार के 'विकास' का लिटमस टेस्ट होगा.लिटमस एक प्रकार का डाई है जिसे ‘काई’ और ‘फंगस’ से प्राप्त किया जाता है. इस डाई में फ़िल्टर पेपर को डुबोकर लिटमस पेपर तैयार किया जाता है. लिटमस पेपर दो - लाल तथा नीले - रंगों में उपलब्ध होता है. अम्ल नीले रंग के लिटमस पेपर को लाल कर देता है और क्षार लाल रंग के लिटमस पेपर को नीला बना देता है. ये सब रासायनिक प्रक्रियाओं के चलते होता है. अम्ल और क्षार को परखने की इस प्रक्रिया को ‘लिटमस टेस्ट’ कहते हैं. ‘लिटमस टेस्ट’ हो चुकने के बाद सारा कुछ आंखों के सामने स्पष्ट होता है (कि जिस पदार्थ का ‘लिटमस टेस्ट’ हुआ वो अम्ल है या क्षार), किसी और प्रयोग या जांच की जरूरत नहीं पड़ती.
इसलिए ही सच-झूठ को परखने की कोई इतनी ही स्पष्ट प्रक्रिया हो तो उसे ‘लिटमस टेस्ट’ की उपमा दे दी जाती है. और हां, 'प्रेगनेंसी टेस्ट' में भी वही विज्ञान यूज़ होता है जो 'लिटमस पेपर' में.
‘क्वांटम फिज़िक्स’ पर आधारित एक बहुत ही रोचक ‘थॉट एक्सपेरिमेंट’ है - ‘श्रोडहिंगर की बिल्ली’.# 3 - मुहावरा/कथन – क्यूरॉसिटी किल्ड दी कैट (उत्सुकता ने बिल्ली को मार डाला)
बुरी खबर है - तुम्हें उत्सुकता नामक जानलेवा रोग है (फोटो कर्टसी - shareitsfunny.com)
अर्थ – अनावश्यक जांच या प्रयोग के खतरों की चेतावनी के लिए इस कथन को प्रयोग में लाया जाता है. प्रयोग – तुम बार बार कूकर खोल के देख रहे हो चावल पके या नहीं, ऐसे तो वो और खराब हो जाएंगे. सही ही कहते हैं लोग कि क्यूरोसिटी किल्ड दी कैट.
क्वांटम फिज़िक्स ने सिद्ध किया था कि जब तक हम किसी इलेक्ट्रॉन को ऑब्जर्व नहीं करते तब तक वो किसी भी स्थिती में हो सकता है. मतलब बहुत आसान भाषा में कहें तो वो कहीं भी हो सकता था, और हर जगह ही था मगर जैसे ही आपने उसे देखा उसने अपनी जगह निर्धारित कर ली. और ये कोई जादुई चीज़ नहीं वास्तविकता है.
इसी से प्रेरित होकर श्रोडहिंगर ने बिल्ली का ‘थॉट एक्सपेरिमेंट’ किया. होने को उसमें बहुत ताम-झाम था, यानी रेडियोएक्टिव पदार्थ, एक हथौड़ा वगैरह-वगैरह, मगर उस ‘थॉट एक्सपेरिमेंट’ का यही निष्कर्ष था कि जब तक आपने बिल्ली को नहीं देखा तब तक वो जीवत और मृत दोनों ही है, लेकिन जैसे ही आपने उसे देख लिया या तो वो जीवित या मृत में से कोई एक ही रह गई. और अगर मर गई तो आपकी क्यूरॉसिटी के चलते.
होने को इस मुहावरे का विज्ञान सबंध है या नहीं इस बारे में लोगों में अलग अलग मत हैं. लेकिन यदि इसका विज्ञान से संबंध है तो बहुत ही दिलचस्प है.
आइए ‘थॉट एक्सपेरिमेंट’ के बारे में भी बात करते चलें. ‘एक्सपेरिमेंट’ मतलब तो प्रयोग. ‘थॉट एक्सपेरिमेंट’ मतलब ‘मान लो’ प्रयोग. यानी प्रयोग किया नहीं जाता बस सोचा जाता है. क्यूंकि कुछ ‘शॉर्टकमिंग्स’ के चलते प्रयोग संभव नहीं होते, लेकिन कल्पना में सारा प्रयोग कर लिया जाता है.
एक बात और - ये जो ‘थॉट एक्सपेरिमेंट’ है - ‘श्रोडहिंगर की बिल्ली’, ये पॉप कल्चर में भी बहुत प्रसिद्ध है कितनी टी-शर्ट से लेकर कितने ही मीम इस एक बिल्ली के ऊपर समर्पित है. अब ये वाला फोटो देखिए. है न मज़ेदार?

मुझे गब्बर चाहिए - ज़िंदा 'और' मुर्दा!
# 4 - मुहावरा/कथन – यूरेका-यूरेका

अर्थ – इसका उपयोग किसी सफलता (खास तौर पर अप्रत्याशित सफलता) को शब्द देने के लिए किया जाता है. प्रयोग – यूरेका-यूरेका! हमारा रॉकेट पहली बार में ही लांच हो गया.सिरैक्यूज़ के राजा ने अपने स्वर्णकर को मुकुट बनाने के लिए कुछ सोना दिया. कुछ दिनों के बाद, सुनार राजा को समक्ष मुकुट लाया. मुकुट तौला गया. मुकुट का वजन राजा द्वारा सोने के लिए सोने के बराबर था. लेकिन राजा को मिलावट का संदेह था. राजा सत्य को जानना चाहता था. उसने अपने अदालत के वैज्ञानिक आर्किमिडीज से पता लगाने के लिए कहा.
आर्किमिडीज ने सोने की समस्या को लेकर दिन रात एक कर दिया. एक बार वह नहाते वक्त भी इसी सोच में डूबा था. उसने बाथटब पर ध्यान नहीं दिया. बाथटब पानी से लबालब भर गया था. वो अपनी सोच में था और उस बाथटब में घुस गया. बाथटब में घुसते ही कुछ पानी बाहर चालक गया. ये देखकर वो नग्नावस्था में भी अपने बाथरूम से भागकर राजा के पास चला गया. रास्ते भर चिल्ला रहा था - यूरेका! यूरेका!
ग्रीक में यूरेका का अर्थ होता है - मुझे मिल गया है.
तब से ही किसी सफलता को शब्द देने के लिए यूरेका-यूरेका शब्द का प्रयोग किया जाता है.
बहरहाल सवाल ये है कि आर्किमिडीज को मिला क्या? आर्किमिडिज़ को दरअसल ‘उत्प्लावन बल’ का सिद्धांत मिल गया था. – अलग-अलग पदार्थों के एक समान वजन का घनत्व अलग-अलग होता है. और जिसका जितना ज़्यादा घनत्व होगा वो उतना पानी विस्थापित करेगा.
घनत्व को ऐसे समझें कि रुई का घनत्व लोहे से कम होता है इसलिए ही तो रुई एक किलो में ढेर सारी आ जाती है जबकि लोहा कम. और ज़रा ‘थॉट एक्सपेरिमेंट’ करके देखें कि एक किलो लोहा और एक किलो रुई को पानी में गिराने पर कौन सा पदार्थ ज़्यादा पानी विस्थापित करेगा?
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कितनी है भारतीय सांसदों की सैलरी, और क्या है ब्रेकअप?





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