1 जनवरी 2018 (अपडेटेड: 1 जनवरी 2018, 08:01 AM IST)
1 जनवरी 1950 को इंदौर में पैदा हुए राहतउल्ला कुरैशी को दुनिया डॉ राहत इंदौरी के नाम से जानती है. शायर राहत इंदौरी जिसने सियासत और मोहब्बत दोनों पर बराबर हक और रवानगी के साथ शेर कहे. राहत मुशायरों में एक खास अंदाज़ में ग़म-ए-जाना (प्रेमिका के लिए) के शेर कहने के जाने जाते हैं. मगर उनका उर्दू में किया गया रिसर्च वर्क उर्दू साहित्य की धरोहर है. इसके अलावा राहत इंदौरी ने 'तुमसा कोई प्यारा कोई मासूम नहीं है', 'दिल को हज़ार बार रोका', 'चोरी-चोरी जब नज़रे मिलीं' जैसे कई हिट गाने लिखे हैं. इश्क को एक अलग अंदाज़ में बयां करने वाले राहत इंदौरी के सियासी शेर भी खूब होते हैं. उनका एक शेर तो न जाने कितनी बार दोहराया जा चुका है. "सभी का ख़ून है शामिल यहां की मिट्टी में,किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है" पेश हैं वो 'रोज़ा तो नहीं रखता मगर अफ्तारी समझता है', जैसे शेर कहने वाले राहत के कुछ अशआर...