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जेपी मॉर्गन के CEO ने अमेरिका को चेताया, 'भारत पर 100% टैरिफ लगाने से पहले अच्छी तरह सोच लें...'

Russia से Crud Oil खरीदने वाले देशों पर अमेरिका 100% तक Tariff लगा सकता है. भारत भी इसकी जद में आ सकता है. अब JPMorgan के CEO जेमी डिमन ने इस फैसले पर कहा है कि ऑयल मार्केट पर इसके असर को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए.

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जेपी मॉर्गन के सीईओ ने टैरिफ के फैसले को सोच-वितार कर लागू करने को कहा है (PHOTO- India Today)

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  • अमेरिका के प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप ने 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' कानून पर हस्ताक्षर किए हैं, जो रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देता है।
  • भारत रूस से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है और इस कारण ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों के लिए कड़े प्रतिबंध और उच्च टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है।
  • जेपी मॉर्गन चेस के CEO जेमी डिमन ने अमेरिका से अपील की है कि टैरिफ लगाने से पहले भारतीय रिफाइनरियों और वैश्विक तेल बाजार पर प्रभाव को समझा जाए।

अमेरिका के प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले एक कानून पर दस्तखत किया है. इस कानून के लागू होने पर भारत और चीन समेत रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है. इस नए कानून के तहत अब भारत की ओर से रूस से खरीदे जाने वाले तेल की ज्यादा बारीकी से निगरानी की जाएगी. इन्वेस्टमेंट बैंकिंग कंपनी जेपी मॉर्गन चेस के सीईओ ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया दी है. इस दिग्गज कंपनी के CEO जेमी डिमन ने ट्रंप प्रशासन से अपील की है कि सोच-विचार करने के बाद ही टैरिफ लगाने का फैसला करें. उन्होंने कहा कि टैरिफ लगाने से पहले भारतीय रिफाइनरियों और ग्लोबल ऑयल मार्केट पर पड़ने वाले असर पर विचार करना चाहिए.

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उम्मीद है अमेरिका मार्केट को नुकसान नहीं पहुंचाएगा: डिमन

मुंबई में जेपी मॉर्गन इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस के दौरान CEO जेमी डिमन ने CNBC-TV18 से बात की. उन्होंने कहा कि भारतीय रिफाइनरियां रूसी कच्चे तेल का इस्तेमाल कैसे करती हैं, अमेरिका को पहले इसे समझना चाहिए. डिमन के बयान की टाइमिंग बहुत महत्वपूर्ण है. उनका बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका, रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर लगातार प्रतिबंध बढ़ाने की कवायद कर रहा है. दरअसल भारत कच्चे तेल के सबसे बड़े इंपोर्टर में से एक हैं. बीते कुछ समय में भारत ने रूस से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात किया है. डिमन ने कहा,

मुझे उम्मीद है कि अमेरिका फैसले से जुड़े सभी पहलू को समझेगा. रूस का मुकाबला करने के लिए जरूरी कदम उठाते हुए भारत और ग्लोबल ऑयल मार्केट को नुकसान नहीं पहुंचाएगा.

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उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या रूसी तेल पर टैरिफ लगाना, दबाव डालने का सही तरीका है? उन्होंने कहा,

मुझे पक्का नहीं लगता कि हमें तेल पर किसी भी तरह का टैरिफ लगाना चाहिए.

(यह भी पढ़ें: भारत पर लगेगा 100% टैरिफ? अमेरिकी संसद में पास हुआ नया बिल पूरा खेल बदल देगा)

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'People First' वाली ऊर्जा नीति

टैरिफ की धमकियों के बीच भारत ने लगातार रूस से तेल की खरीदने का बचाव किया है. भारत की प्राथमिकता भरोसेमंद ऊर्जा और सस्ता तेल-गैस लेना है. अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने पिछले हफ्ते कहा कि भारत की ऊर्जा नीति "People First" के नजरिए पर आधारित है. उन्होंने कहा कि जब जियोपॉलिटिकल झगड़ों की वजह से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में रुकावट आई थी. इसे देखते हुए भारत ने पहले ही कंज्यूमर्स को कीमतों में भारी बढ़ोतरी से बचाने के लिए कदम उठाए थे. उन्होंने कहा, 

इससे ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्थिर करने और एक बड़े संकट को रोकने में भी मदद मिली. हमारी सोर्सिंग एक बुनियादी राष्ट्रीय जिम्मेदारी को दिखाती है. हम अपने लोगों के लिए पर्याप्त, सस्ती और बिना रुकावट वाली एनर्जी सुरक्षित करने के लिए सभी विकल्प देखेंगे.

ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू किए गए नए कानून का नाम 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' है. यह कानून ट्रंप को उन देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देता है जो रूस के साथ व्यापार करते हैं.

वीडियो: दुनियादारी: मीडिया पर बैन लगाना ट्रंप को भारी पड़ा?

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