दिलजीत दोसांझ स्टारर फिल्म ‘सतलुज’ के डायरेक्टर हनी त्रेहान ने एक बार फिर नाराज़गी जताई है. अपने इंस्टाग्राम स्टोरी में उन्होंने ‘कायरता’ और ‘तानाशाही’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया. उन्होंने CBFC (सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फिल्म सर्टिफिकेशन) के नए नियमों का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए नाराज़गी जताई है. सोमवार, 2 नवंबर को CBFC के 18 सदस्यीय बोर्ड मेंबर्स की बैठक हुई. इस बैठक में बोर्ड ने फिल्मों को सर्टिफिकेट देने के नियम और भी सख्त कर दिए. बोर्ड की तरफ से पांच नई शर्तें रखी गई हैं. इन नए गाइडलाइन पर हनी त्रेहान ने आपत्ति जताई है.
'देश में कायरता और तानाशाही... ' 'सतलुज' के डायरेक्टर ने CBFC के नए नियमों का विरोध किया
'सतलुज' फिल्म के डायरेक्टर Honey Trehan ने CBFC के नए नियमों पर नाराज़गी जताई है. उन्होंने इन नियमों पर आपत्ति जताई और 'तानाशाह' जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया. उनकी फिल्म 'सतलुज' को ZEE5 से 48 घंटे के अंदर हटा दिया गया था.

‘सतलुज’ फिल्म को OTT प्लेटफार्म ZEE5 पर जुलाई 2026 में रिलीज किया गया था, मगर 48 घंटे बाद ही फिल्म को हटा दिया गया. फिल्म करीब 3 साल तक रिलीज का इंतजार कर रही थी. CBFC ने मेकर्स को फिल्म में 127 से ज़्यादा कट्स लगाने के निर्देश दिए. मगर मेकर्स इसके लिए तैयार नहीं हुए. उनका कहना था कि इतने कट्स के बाद फिल्म में कुछ बचेगा ही नहीं. फिर अंत में इसे बिना किसी प्रमोशन के OTT पर रिलीज कर दिया गया.
अब करीब तीन महीने बाद बोर्ड ने नए नियम लागू किए हैं. इसपर आपत्ति जताते हुए हनी त्रेहान ने इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा,
‘ये नए नियम देश में कायरता और तानाशाही को दिखाते हैं. न कि फ्रीडम ऑफ़ स्पीच को लेकर एक लोकतांत्रिक अप्रोच को.’

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CBFC के नए नियम क्या हैं?दो महीने पहले ही करीब 9 साल बाद CBFC का पुनर्गठन हुआ था. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इसका टर्म पीरियड तीन साल का है. बोर्ड की अध्यक्षता प्रसार भारती के पूर्व CEO शशि शेखर वेम्पति कर रहे हैं.
CBFC के पुनर्गठन के बाद, सोमवार को इसने अपनी पहली एडवाइजरी जारी की. इसमें कहा गया है कि सर्टिफिकेशन के लिए अधूरे काम स्वीकार नहीं किए जाएंगे. साथ ही, यह भी बताया गया है कि घोषित की गई रिलीज तारीखों और प्रमोशनल टाइटल्स को अंतिम नहीं माना जाएगा. CBFC ने साफ़ किया कि टाइटल्स की जांच-पड़ताल, समीक्षा और उनमें बदलाव करने का अधिकार एग्जामिनिंग या रिवाइजिंग कमिटी के पास रहेगा.
बता दें कि फिल्म सतलुज सिख मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की बायोपिक है. इसका शुरुआती नाम 'पंजाब '95' था, मगर उसे ZEE5 पर 'सतलुज' के नाम से रिलीज़ किया गया. लेकिन 48 घंटों के भीतर इस फिल्म को ZEE5 से हटा दिया गया. केंद्र सरकार ने फिल्म को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं जताईं, जबकि फिल्म निर्माताओं का कहना था कि ऐसा कुछ नहीं है.
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