क्या आने वाले दिनों में सरकार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) खत्म करने वाली है? दरअसल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिया है कि सरकार बजट परामर्श के दौरान LTCG टैक्स को हटाने के बारे में निवेशकों के विचार सुनेगी. उन्होंने 13 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित 'ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम' में यह बात कही. वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब SBI रिसर्च ने LTCG टैक्स को खत्म करने का सुझाव दिया है.
LTCG Tax हट पाएगा या नहीं? वित्त मंत्री के बयान से निवेशकों को जगी उम्मीद
हाल ही में एसबीआई की रिसर्च में सरकार को LTCG टैक्स को खत्म करने का सुझाव दिया गया है. फिलहाल शेयर और प्रॉपर्टी से मुनाफा कमाने पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स चुकाना होता है.

मिंट के मुताबिक निर्मला सीतारमण ने माना कि शेयरों में निवेश से होने वाले मुनाफे पर लगने वाला टैक्स (LTCG) घरेलू और विदेशी निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है. उन्होंने कहा कि बजट से पहले होने वाले विचार-विमर्श के दौरान सरकार अलग-अलग पक्षों की राय सुनने के लिए तैयार है.
वित्त मंत्री ने कहा, “LTCG पर भारतीय और विदेशी दोनों तरह के निवेशक अपनी राय रख रहे हैं. बाजार में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और सभी तरह की संपत्तियों पर एक समान टैक्स लगाने के सवाल पर भी काफी चर्चा हो रही है. इस तरह की चर्चा होना अच्छी बात है.”
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क्या है LTCG?किसी निवेश को लंबे समय तक रखने के बाद बेचने पर होने वाले मुनाफे पर लगने वाले टैक्स को LTCG कहते हैं. घरेलू और छोटे निवेशकों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स की दर 12.5% है.
शेयरों में निवेश से होने वाले मुनाफे पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को भी इतना टैक्स चुकाना पड़ता है. हालांकि, सरकार ने सरकारी बॉन्ड वगैरा में निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को टैक्स में अलग से छूट दी है. यह छूट उनके शेयरों में किए गए निवेश पर लागू नहीं होती.
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिसर्च यूनिट ने अपनी ताजा इकोरैप रिपोर्ट (Ecowrap Report) में शेयरों में निवेश पर लगने वाले LTCG को हटाने के साथ-साथ इक्विटी होल्डिंग अवधि को दो या तीन साल तक बढ़ाने का सुझाव दिया है.
रिपोर्ट में कहा गया है, “सरकार को इक्विटी सेगमेंट में हॉट मनी फ्लो को स्थिर करने के लिए होल्डिंग अवधि को 2-3 साल तक बढ़ाने और इक्विटी पर LTCG टैक्स को खत्म करने जैसे उपायों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.”
विदेशी निवेशकों का पैसा तेजी से शेयर बाजार में आने और मुनाफा कमाने या जोखिम बढ़ने पर तेजी से बाहर निकल जाने को हॉट मनी फ्लो कहते हैं.
SBI रिसर्च में तर्क दिया गया कि रुपये के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने के लिए रिजर्व बैंक के उपाय पर्याप्त नहीं हो सकते हैं. इसने भारतीय शेयरों को निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए बेहतर उपायों की मांग की.
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विदेशी निवेशकों ने इस साल निकाले 2.61 लाख करोड़ रुपयेSBI की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारी मात्रा में पैसा निकाला है. साल 2026 में इन निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 2.61 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निकाले हैं. इसी तरह साल विदेशी निवेशकों ने साल 2025 में 1.66 लाख करोड़ रुपये निकाले थे.
वित्त मंत्री के बयान के बाद शेयर बाजार बम-बमइस बीच, वित्त मंत्री के बयान के बाद शेयर बाजार में जोरदार उछाल देखने को मिला है. सेंसेक्स 1,109 अंक से अधिक उछलकर 73,034 पर बंद हुआ. निफ्टी भी करीब 359 अंक चढ़कर 22,722 अंक पर बंद हुआ. इस तेज उछाल से सभी कंपनियों के कुल मार्केट कैप में लगभग 5 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है. इससे यह बढ़कर 470 लाख करोड़ रुपये हो गया है. शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के शेयरों की कुल वैल्यू को मार्केट कैप कहते हैं.
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