सरकार ने कैंसर के इलाज में काम में आने वाली नॉन शेड्यूल्ड दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को 30% तक सीमित करने का फैसला लिया है. नॉन शेड्यूल्ड दवाएं वे होती हैं जो सरकार की प्राइस कंट्रोल लिस्ट में शामिल नहीं हैं. इन दवाओं की कीमत तय करने में कंपनियों को ज्यादा आजादी रहती है.
कैंसर की 100 रुपये की दवा 30 रुपये में मिलेगी? सरकार ट्रेड मार्जिन 70% तक कम करेगी
ट्रेड मार्जिन कम करने के फैसले पर सरकारी अधिकारियों ने बताया कि इस कदम से कई कैंसर दवाओं की कीमतों में 70% तक की कमी आ सकती है. यानी 100 रुपये की दवा है तो 70 रुपये कम होकर उसकी कीमत 30 रुपये तक हो सकती है.

ट्रेड मार्जिन कम करने के फैसले पर सरकारी अधिकारियों ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि इस कदम से कई कैंसर दवाओं की कीमतों में 70% तक की कमी आ सकती है. यानी 100 रुपये की दवा है तो 70 रुपये कम होकर उसकी कीमत 30 रुपये तक हो सकती है.
ट्रेड मार्जिन किसी दवा को खरीदने और उसे बेचने की कीमत के बीच के अंतर को कहते हैं. इसका मतलब है कि दवा की सप्लाई करने वाले वितरक, थोक व्यापारी और खुदरा विक्रेता जितना मुनाफा कमाते हैं, वह ट्रेड मार्जिन है.
औषधी विभाग ने स्वास्थ्य मंत्रालय से एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने का अनुरोध किया था. नेशनल फॉर्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) की हाल ही में हुई बैठक के ब्यौरे के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के अधीन गठित इस कमेटी से 14 अक्टूबर तक अपनी सूची प्रस्तुत करने की उम्मीद है.
इकोनॉमिक टाइम्स से बात करने वाले अधिकारियों ने बताया कि यह सीमा ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं, घरेलू और आयातित उत्पादों, पेटेंट वाली और बिना पेटेंट वाली दवाओं पर लागू होगी. उन्होंने कहा है कि ये बात सच है कि एमआरपी दवा बनाने वाली कंपनी या मार्केटिंग कंपनी द्वारा तय की जाती है. उम्मीद है कि वे इसे कम करेंगे क्योंकि नए नियम से व्यापारियों को मिलने वाले प्रॉफिट पर लिमिट लग गई है.
ये भी पढ़ें: फेस्टिव सीजन से पहले बढ़ेगी EMI, इन 5 बैंकों ने महंगा किया होम लोन, कितनी ढीली होगी आपकी जेब?
सरकार का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा चिंता जताने के कुछ दिनों बाद आया है. सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की दवाओं की कीमतों को लेकर केंद्र सरकार से उस दवा के बारे में सवाल किया था जो खुदरा विक्रेताओं को लगभग 2,700 रुपये में मिल रही थी, लेकिन इस दवा का अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 27,000 रुपये था.
नेशनल फॉर्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी के मुताबिक कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जिन दवाओं की कीमत तय करने का अधिकार सरकार को नहीं है, उन पर औसतन करीब 170% ट्रेड मार्जिन होता है. कुछ दवाओं पर यह लाभ 700% तक पहुंच जाता है.
वीडियो: राहुल गांधी ने तीन दिन तक गुपचुप क्या प्लान बनाया? ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर आगे की रणनीति क्या है?












