The Lallantop

चीनी महंगी होने के लिए एथेनॉल भी जिम्मेदार? बड़े अर्थशास्त्री ने सरकार को सुनाया

प्रोफेसर अशोक गुलाटी का दावा है कि देश में चीनी का शुरुआती स्टॉक लगभग 80 लाख टन से घटकर 50 लाख टन पर आ गया है. बाजार में चीनी की सप्लाई में भारी कमी है.

Advertisement
post-main-image
चीनी उत्पादन में लगभग 10% की गिरावट आई है (फोटो क्रेडिट: Aaj Tak)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • देश में चीनी उत्पादन में लगभग 10% की गिरावट आई है और चीनी के शुरुआती स्टॉक 80 लाख टन से घटकर 50 लाख टन हो गया है, जिससे कीमतों में तेजी आई है।
  • चीनी उत्पादन में कमी और गन्ने का एथेनॉल उत्पादन में बढ़ा हुआ उपयोग चीनी की सप्लाई में कमी का मुख्य कारण है, जिससे बाजार में कीमतें बढ़ रही हैं।
  • सरकार को समय पर चीनी आयात खोलने जैसे कदम उठाने चाहिए थे ताकि सप्लाई में कमी को रोका जा सके और त्योहारी सीजन में कीमतों में अधिक उछाल न हो।

पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं. अब आने वाले त्योहारी सीजन को लेकर भी चिंता सताने लगी है कि क्या आगे चीनी की कीमतों में उछाल देखने को मिलेगा. इंडिया टुडे के राजदीप सरदेसाई के साथ एक खास इंटरव्यू में कृषि अर्थशास्त्री प्रोफेसर अशोक गुलाटी ने कहा कि देश में चीनी उत्पादन कम होने और स्टॉक घटने से इसकी कीमतों में उछाल आया है. इसके अलावा गन्ने का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में भी होने से चीनी की कीमतों में उछाल देखने को मिला है. 

Advertisement
शुगर स्टॉक में भारी कमी

प्रोफेसर अशोक गुलाटी ने आगे बातचीत में कहा कि देश में चीनी का शुरुआती स्टॉक लगभग 80 लाख टन से घटकर 50 लाख टन हो गया है. इससे बाजार में चीनी की सप्लाई में भारी कमी आई है. प्रोफेसर गुलाटी ने आगे कहा कि सरकार को संभावित चीनी संकट को समय रहते भांप लेना चाहिए था. इसी के हिसाब से अपनी प्लानिंग करनी चाहिए थी. 

उन्होंने कहा कि सरकार को चीनी आयात खोलने का फैसला शायद चार या पांच महीने पहले ही ले लेना चाहिए था. इससे बाजार में चीनी की सप्लाई में कमी नहीं आती.

Advertisement

ये भी पढ़ें: चीनी के दाम बढ़ने पर एक्शन में सरकार, जमाखोरी रोकने के लिए सख्त नियम लागू

'चीनी उत्पादन 10% गिरा'

अशोक गुलाटी के मुताबिक चीनी उत्पादन में लगभग 10% की गिरावट आई है. उनका कहना है कि एथेनॉल बनाने के लिए गन्ने का इस्तेमाल, प्रतिशत के हिसाब से जितना दिखता है उससे कहीं ज्यादा है, जो चीनी सप्लाई में कमी का बड़ा कारण है.

ये भी पढ़ें: Onion Prices Surge: चीनी के बाद प्याज भी महंगा, फेस्टिव सीजन में रसोई का बजट बिगड़ा!

Advertisement

कृषि अर्थशास्त्री ने कहा कि मौजूदा स्थिति (कीमतें बढ़ने) के लिए सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती. चीनी की कीमतें भविष्य में और बढ़ सकती हैं, इसके संकेत कई महीने पहले ही दिखने लगे थे. प्रोफेसर गुलाटी ने बताया कि चीनी का भंडार नौ साल के निचले स्तर पर पहुंच गया. उन्होंने तर्क दिया कि विदेशों से चीनी आयात की अनुमति बहुत पहले ही दे देनी चाहिए थी.

वीडियो: जिस Gen Z ने Balen Shah को PM बनाया, वही अब उनके खिलाफ क्यों? 150 दिन का हिसाब

Advertisement