करीब तीन साल पहले अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट ने अडानी समूह में भूचाल ला दिया था. हिंडनबर्ग ने अडानी समूह पर कई तरह के आरोप लगाए थे. इन आरोपों के बाद निवेशकों ने अडानी समूह के शेयर धड़ाधड़ बेचना शुरू कर दिया था. यह बिकवाली कई महीने तक चली और ग्रुप को तगड़ा नुकसान झेलना पड़ा था. हालांकि, तीन साल बाद अब कहानी पलटती नजर आ रही है. अडानी समूह की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज निफ्टी 50 के सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाले शेयरों में शामिल हो गई है.
हिंडनबर्ग विवाद पीछे छूटा, अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर्स हुए रॉकेट, बनेगा NIFTY का किंग?
हिंडनबर्ग ने अडानी समूह पर कई तरह के आरोप लगाए थे. इन आरोपों के बाद ग्रुप की अलग-अलग कंपनियों के शेयर्स में उतार-चढ़ाव देखने को मिला था. हालांकि, अब अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर्स फिर से रफ्तार पकड़ते दिख रहे हैं.

इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट में न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग के हवाले से बताया गया है कि गौतम अडानी समूह की इस प्रमुख कंपनी (अडानी एंटरप्राइजेज) ने तगड़ा कमबैक किया है. कंपनी के शेयर ने इस साल (2026) अब तक लगभग 30% की तेजी हासिल की है. इससे यह कंपनी साल के अंत तक निफ्टी इंडेक्स के सबसे ज्यादा बढ़त देने वाला शेयर (टॉप गेनर) बनने की रेस में शामिल हो चुकी है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 के बाद पहला मौका है जब अडानी एंटरप्राइजेज निफ्टी के टॉप गेनर बनने की राह पर है.
हिंडनबर्ग ने क्या आरोप लगाए थे?हिंडनबर्ग ने अपनी इस रिपोर्ट में अडानी ग्रुप पर गले तक कर्ज में डूबे होने, बैलेंस शीट में खामियों जैसे कई आरोप लगाए थे. हालांकि, इन सभी आरोपों के बारे में अडानी समूह ने शुरू से ही इनकार किया. लेकिन हिंडनबर्ग के इस कथित खुलासे ने अडानी समूह को गहरी चोट दी. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद ग्रुप की अलग-अलग कंपनियों के शेयर प्रभावित हुए थे. इसके चलते अडानी समूह के मार्केट कैप में 150 अरब डॉलर (करीब 14 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा की गिरावट आई थी. शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के शेयरों की कुल वैल्यू को मार्केट कैप कहते हैं.
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अडानी ग्रुप ने कैसे किया तगड़ा कमबैक?तब से अब तक अडानी समूह ने करीब तीन साल तक इस संकट से खुद को उबारने पर काम किया है. निवेशकों का भरोसा दोबारा कायम करने और अपने बिजनेस के लिए पैसा जुटाने पर ध्यान दिया है. कुछ बड़े निवेशक अब अडानी समूह की कंपनियों में अपना निवेश बढ़ा रहे हैं.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट बताती है कि कैपिटल ग्रुप, गोल्डमैन सैक्स ग्रुप और एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट जैसी कंपनियों ने अडानी समूह में हिस्सेदारी बढ़ाई है. अमेरिकी निवेश बैंक मॉर्गन स्टेनली की ब्रोकरेज फर्म ने भी जून में अडानी एंटरप्राइजेज को ओवरवेट रेटिंग के साथ कवर करना शुरू किया.
अडानी समूह ने सबसे ज्यादा दिलचस्पी इन्फ्रास्ट्रक्चर बिजनेस में दिखाई. समूह की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज ने एयरपोर्ट, डेटा सेंटर और दूसरे क्षेत्रों में तेजी से अपना कारोबार फैलाया .
अडानी एंटरप्राइजेज के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के कुल EBITDA का करीब 80% हिस्सा पहले से स्टेबलिश बिजनेस से आया है. EBITDA कंपनी के कारोबार से होने वाले ऑपरेटिंग मुनाफे को कहते हैं . आसान शब्दों में कहें तो कंपनी ने अपने धंधे से ब्याज, टैक्स और कुछ अन्य खर्चों को घटाने से पहले कितना पैसा कमाया, इसे EBITDA कहते हैं.
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सारे अनुमान धराशायीहिंडनबर्ग की रिपोर्ट सामने आने के बाद अडानी एंटरप्राइजेज को लेकर तरह -तरह के कयास लगाए गए थे. लेकिन साल 2023 के शुरुआत के दौरान वाली कंपनी से ये कंपनी अब बिल्कुल अलग तरीके से परफॉर्म करती दिख रही है. कंपनी के बिजनेस का स्वरूप काफी बदल चुका है.
यह कंपनी अब लंबे वक्त तक चलनी वाले प्रोजेक्ट्स और भारी भरकम कमाई वाली बुनियादी ढ़ाचे से जुड़ी योजनाओं पर अपना फोकस बढ़ा रही है. भारत सरकार के सड़कों से जुड़े प्रोजेक्ट्स, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, बिजली उत्पादन क्षमता और डिजिटल बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाओं पर काफी पैसा खर्च कर रही है. इसका फायदा अडानी को भी मिल रहा है .
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