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ZOOM अनसेफ है, फिर भी इस्तेमाल करना चाहते हैं तो क्या करें? सरकार ने बताया

कोरोना और लॉकडाउन की वजह से दुनियाभर के अधिकांश दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम चल रहा है. वर्क फ्रॉम होम के दौरान मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए जिस ऐप का सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है, वो है ज़ूम ऐप. इस ऐप की सिक्योरिटी को लेकर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे हैं. अब भारत सरकार ने भी इसे अनसेफ बताया है. इससे पहले गूगल ने भी अपनी कंपनी में इस ऐप को बैन कर दिया है. हालांकि जो लोग अब भी जूम एप का इस्तेमाल करना चाहते हैं उनके लिए एडवाइजरी दी है.

क्या है इस एडवाइजरी में?

गृह मंत्रालय ने इस एडवाइजरी में कहा है कि व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए भी जूम सुरक्षित प्लेटफॉर्म नहीं है. मंत्रालय की ओर से कहा गया कि सरकार ने पहले भी 6 फरवरी और 30 मार्च को जूम को लेकर जानकारी दी थी. ऐसे में लोग सतर्कता बरतें. लोग अगर जूम का इस्तेमाल कर भी रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें.

जूम पर बात करने के लिए गृह मंत्रालय ने ये सुझाव दिए हैं

1.हर मीटिंग के लिए नई यूजर आईडी, पासवर्ड का इस्तेमाल करें.
2.वेटिंग रूम को एनेबल करें, ताकि कोई भी यूजर तभी कॉल में शामिल हो सके जब कॉन्फ्रेंस करने वाला अनुमति दे.
3.होस्ट से पहले जॉइन को डिसऐबल कर दें.
4.स्क्रीन शेयरिंग का ऑप्शन सिर्फ होस्ट के पास रखें.
5.किसी व्यक्ति के लिए रिज्वाइन का ऑप्शन बंद रखें.
6.फाइल ट्रांसफर के ऑप्शन को कम से कम इस्तेमाल करें.
7.सभी के ज्वाइन करने के बाद मीटिंग को लॉक कर दें.
8.रिकॉर्डिंग फीचर को बंद कर दें
9.अगर आप एडमिन हैं तो मीटिंग end करें न कि leave करें.

मंत्रालय का कहना है कि इनमें से ज्यादातर सेटिंग बेवसाइट पर जूम एकाउंट में लॉग-इन करने के बाद की जा सकती है. कॉन्फ्रेंस के दौरान भी फोन और लैपटॉप में ये सेटिंग की जा सकती है. हालांकि कुछ सेटिंग कुछ चैनल और मोड के जरिए ही की जा सकती है. उदाहरण के लिए लॉक मीटिंग को एडमिन की ओर से तब ही इनेबल किया जा सकता है जब मीटिंग स्टार्ट होने वाली हो.

कंपनी का क्या कहना है?

कंपनी का कहना है कि वो एंड टु एंड एन्क्रिप्शन देती है. लेकिन बाद में पता चला कि ये एंड टु एंड एन्क्रिप्शन सिर्फ Zoom पर किए गए टेक्स्ट चैट के लिए है. जबकि ज्यादातर लोग इस ऐप पर वीडियो कॉलिंग करते हैं. वीडियो कॉलिंग के लिए ये कंपनी एंड टु एंड एन्क्रिप्शन नहीं देती है. Zoom के एक प्रवक्ता ने कहा है कि फिलहाल वीडियो कॉलिंग के लिए एंड टु एंड एन्क्रिप्शन देना संभव नहीं है. हालांकि कंपनी ने ये भी कहा है कि वीडियो कॉलिंग के लिए TLS एन्क्रिप्शन अभी भी है. यानी यूजर का डेटा जूम के सर्वर और यूजर्स के बीच एन्क्रिप्टेड होता है. एंड टु एंड एन्क्रिप्शन में कोई भी थर्ड पार्टी किसी भी हालत में यूजर का डेटा नहीं हासिल कर सकती है. खुद कंपनी भी नहीं.

Zoom App
फोटो: गूगल प्ले स्टोर | ज़ूम

छह महीने में 100 गुना बढ़ी रकम

जूम ऐप 2011 में तैयार किया गया था. फाउंडर हैं चीनी बिज़नेसमैन एरिक युआन. चार साल बाद इसमें ली का शिंग, याहू के पूर्व CEO जेरी यांग समेत पांच से ज़्यादा लोगों ने इन्वेस्ट किया. ली का शिंग के कंपनी में 10 फीसदी से ज़्यादा शेयर हैं. ली का शिंग हॉन्ग कॉन्ग के सबसे अमीर आदमी हैं. ये पहली बार था जब उन्होंने किसी टेक्नोलॉजी में इन्वेस्ट किया था. उस वक्त इसे घाटे का सौदा माना जा रहा था. कहा गया कि ली शिंग का ये एक्सपेरिमेंट फेल होगा, लेकिन नतीज़ा उल्टा रहा. वो एक्सपेरिमेंट अब पांच साल बाद नतीज़ा दे रहा है. 2015 में उन्होंने 30 मिलियन डॉलर यानी करीब 227 करोड़ रुपए का का निवेश किया था. 2019 तक ये इन्वेस्टमेंट ज्यों का त्यों पड़ा रहा. लेकिन पिछले छह महीने में ली के उस इन्वेस्टमेंट में ऐसा गज़ब का बूम आया कि रकम बढ़कर 22.7 हजार करोड़ रुपए हो गई. यानी 100 गुना ज़्यादा.


Video: कोरोना वायरस: लॉकडाउन के वक्त पूरी दुनिया में इस्तेमाल हो रहे ज़ूम ऐप की कहानी जानिए

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