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योगी और प्रियंका की बस वाली लड़ाई के बाद से यूपी कांग्रेस अध्यक्ष जेल में क्यों बंद?

साल 2007 का यूपी विधानसभा चुनाव. कुशीनगर के आजादनगर कस्बे में एक नौजवान भाषण दे रहा था. निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर. एक जोशीला भाषण. तभी पीछे से एक बुजुर्ग की आवाज़ आई-

‘ई बार त ना, पर अगली बार बेटा विधायक बनबे.’

मतलब इस बार तो नहीं लेकिन अगली बार जरूर विधायक बनोगे. बुजुर्ग की बात सही निकली. मगर पहली वाली. नतीजा आया तो नौजावन कुछ हज़ार वोटों पर सिमट गया.

फिर 2012 का विधानसभा चुनाव आया. इस बार ये नौजवान टिकट पाया कांग्रेस से. ये उस बुजुर्ग की दूसरी भविष्यवाणी सच होने का वक्त था. तमकुहीराज विधानसभा से ये नौजवान विधायक चुना गया. और ये नए नवेले विधायक थे अजय कुमार लल्लू . मौजूदा वक्त में यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष. चुनाव जीता था भाजपा के नंद किशोर मिश्रा को 5860 वोटों से हराके.

Ajay
अजय कुमार लल्लू को लोग धरना कुमार के नाम से भी बुलाते हैं.

अजय कुमार लल्लू की अपने क्षेत्र में एक और पहचान है. कोई भी मुद्दा मिलते ही धरने पर बैठ जाने की. प्रदर्शन करने की. इसी लिए उनका इलाके में एक और नाम भी है. धरना कुमार.

और इसी धरने की आदत ने यूपी कांग्रेस अध्यक्ष को फिलहाल जेल पहुंचाया हुआ है. और जेल गए दो हफ्ते से ज्यादा भी हो गए हैं. उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस गिरफ्तारी के खिलाफ महाअभियान चलाने का ऐलान किया है. पूरे प्रदेश में आंदोलन की चेतावनी दी है. कांग्रेस ने ये फैसला लल्लू की जमानत याचिका विशेष अदालत द्वारा खारिज किए जाने के बाद लिया है. एक याचिका पहले भी खारिज हो चुकी थी.

क्यों हुई गिरफ्तारी –

वो प्रियंका गांधी और यूपी सरकार के बीच बसों को लेकर हुआ विवाद तो याद ही होगा आपको. प्रियंका गांधी ने 1000 बसें मजदूरों को बाहर से लाने के लिए यूपी बॉर्डर पर खड़ी कर दी थीं. योगी सरकार उनको ले नहीं रही थी. खूब चिट्ठी-पत्री का लेन-देन चला. अंत में बसों की लिस्ट यूपी सरकार के पास पहुंची. इसमें कई नंबर कार, बाइक होने का दावा हुआ. खूब राजनीति हुई.

इन बसों के रजिस्ट्रेशन नंबर जो दिए गए थे, उनमें भी कथित रूप से गड़बड़ी पाई गई. और फिर हुआ मुकदमा. धोखाधड़ी का. आरोप में गिरफ्तार किए गए अजय कुमार लल्लू. तारीख थी 20 मई. खैर पहले उनको आगरा में अवैध रूप से धरना-प्रदर्शन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. आगरा में लल्लू बसों को यूपी में जाने नहीं देने के कारण प्रदर्शन कर रहे थे. उसी दिन ज़मानत मिल गई थी.

लेकिन उसके तुरंत बाद उन्हें लखनऊ पुलिस ने बसों की सूची में कथित तौर पर फ़र्जीवाड़े के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया. 1 जून को एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट में यह कहकर उनकी ज़मानत की अर्जी ख़ारिज कर दी गई कि मामला गंभीर है और इसमें अभी और जांच की ज़रूरत है. कांग्रेस इसके खिलाफ हाईकोर्ट जा रही है. उसने यूपी सरकार पर उनके अध्यक्ष को जबरन फंसाने और राजनीति करने का आरोप लगाया है. इसके अलावा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कई जिलों में डीएम को इसके विरोध में ज्ञापन देकर गिरफ्तारियां भी दी हैं.

राज्यपाल से मिले कांग्रेसी

कांग्रेस का एक दल 3 जून को अजय कुमार लल्लू की रिहाई को लेकर यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से भी मिला. लल्लू के ख़िलाफ़ दर्ज मुक़दमे वापस लेने और उन्हें रिहा करने की मांग की. आरोप लगाया कि लल्लू को षड्यंत्र के तहत फंसाया गया है और जानबूझकर अदालती कार्रवाई में देरी की जा रही है.


बसों की राजनीति पर हुआ लल्लनटॉप वीडियो देखें-

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