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राजस्थान में क्या सचमुच कोरोना वैक्सीन की जमकर बर्बादी हो रही है?

कोरोना वैक्सीन की क़िल्लत. हम सब इससे जूझ रहे हैं. हर रोज़ कोई ना कोई राज्य सरकार ज़्यादा वैक्सीन देने की मांग कर रही है. राजस्थान (Rajasthan) भी इन राज्यों में से एक है. लेकिन इन दिनों वह कोरोना वैक्सीन की बर्बादी के आरोपों को लेकर सवालों में है. अशोक गहलोत सरकार आरोपों से साफ इनकार कर रही है, लेकिन रिपोर्ट और आंकड़े क्या कह रहे हैं, देखिए ये रिपोर्ट.

दैनिक भास्कर ने 30 जून को एक खबर छापी. इसमें दावा किया कि राजस्थान में 8 जिलों के 35 वैक्सीनेशन केंद्रों पर कोरोना वैक्सीन की 500 वायल (शीशी) कूड़ेदान में पड़ी मिलीं. ये भी दावा किया कि इनमें से तमाम शीशियां 20% से 75% तक भरी हुई थीं. इनमें 2,500 से भी ज्यादा डोज थीं, जो बर्बाद हो गईं.

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दैनिक भास्कर में वैक्सीन की बर्बादी का आरोप लगाते हुए छपी रिपोर्ट.

केंद्र सरकार ने भी बताई बर्बादी

केंद्र सरकार की ओर से देश में वैक्सीन की बर्बादी के आंकड़े जारी किए जाते हैं. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट आने से पहले, 25 मई को केंद्र ने दावा किया कि राजस्थान में 11 फ़ीसदी वैक्सीन की बर्बादी हुई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने डिटेल्स देते हुए बताया कि 16 जनवरी से 17 मई के बीच राज्य में 11.50 लाख से भी ज्यादा वैक्सीन की डोज़ बेकार चली गईं. अप्रैल महीने में 7 प्रतिशत बर्बाद हुईं. वहीं, मई के महीने में 3 प्रतिशत वैक्सीन बेकार होने की बात केंद्र की ओर से बताई गई.

ऐसी बर्बादी के केंद्र के आरोपों पर राज्य सरकारें सवाल उठाती रही हैं. कुछ दिनों पहले झारखंड, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की सरकारों की भी इस मसले पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से रस्साकशी हुई थी. इस बार भी राजस्थान सरकार ने आरोपों को गलत बताया. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उलटे आरोप लगा दिया कि गड़बड़ी कोविन ऐप में थी. राजस्थान में तो केवल 2 फ़ीसदी वैक्सीन ही बेकार हुई है.

राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने आंकड़े बताते हुए ट्वीट किया-

“प्रदेश में 1.66 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है. यहां 18 से 44 आयु वर्ग में जीरो वेस्टेज है. 45 से अधिक उम्र वालों के लिए तय वैक्सीन का वेस्टेज 2 परसेंट से भी कम है. यह केन्द्र द्वारा अनुमानित 10 परसेंट की सीमा और 6 परसेंट के राष्ट्रीय औसत से बेहद कम है. राजस्थान वैक्सीनेशन में देशभर में अग्रणी है.”

मंत्री का दावा, धोखे से हासिल किए वायल

राजस्थान सरकार ने दैनिक भास्कर की रिपोर्ट को भी खारिज किया. जिसमें दावा किया गया था जिन टीकाकरण केंद्रों तक भास्कर की टीम पहुंची, वहां क़रीब 25 परसेंट वैक्सीन की बर्बादी हुई थी. स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने इसके जबाव में एक के बाद एक 5 ट्वीट किए. अखबार के दावे को “तथ्यों से परे” और भ्रामक करार दिया. ट्वीट में लिखा,

“दैनिक भास्कर अखबार में डस्टबिन में वैक्सीन मिलने की खबर पूर्णतः तथ्यों से परे एवं भ्रामक है. वैक्सीन वायल का उपयोग करने के बाद इन्हें नियमानुसार संबंधित चिकित्सा संस्थान में ही जमा करवाया जाता है.”

स्वास्थ्य मंत्री ने आरोप भी लगाया कि अखबार के पत्रकारों ने खुद को राजस्थान सरकार और WHO का अधिकारी बताकर ये वायल हासिल किए थे. उन्होंने ट्वीट में लिखा,

“इस खबर के लिए संबंधित पत्रकारों ने स्वयं को गलत तरीके से स्वास्थ्य विभाग, राजस्थान का उच्चाधिकारी एवं WHO का प्रतिनिधि बताया. संबंधित कर्मचारियों पर दबाव डालकर उनसे इन वायल को प्राप्त किया. यह वायल किसी डस्टबिन में नहीं मिली हैं.”

स्वास्थ्य मंत्री ने झूठी अफ़वाह फैलाने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की चेतावनी भी दे डाली. अखबार से जवाब तलब किए जाने की भी बात कही. उन्होंने ट्वीट में आगे कहा कि कोरोना वैक्सीन की हर डोज की पूरी जानकारी केन्द्र सरकार के CoWin / eVIN सॉफ्टवेयर पर दर्ज की जाती है. जिन वायल के बारे में अखबार ने जानकारी दी है, वह सभी सॉफ्टवेयर में दर्ज हैं. इन सभी वायल्स का भारत सरकार के दिशानिर्देश के अनुसार समुचित उपयोग किया गया है.

स्वास्थ्य मंत्री ने ये भी बताया कि कोरोना वैक्सीन की एक वायल में 10 लोगों को लगाने लायक डोज़ होती हैं. एक बार वायल खुल जाए और 10 लोग उपलब्ध हों तो एक ही वायल से सभी को वैक्सीन लगाई जा सकती है. लेकिन अगर वायल खुलने के 4 घंटे के अंदर अगर 8 लोग ही वैक्सीन लगवाने आए तो बाकी की 2 डोज बेकार हो जाती हैं.

अख़बार ने नई रिपोर्ट छाप दी

राजस्थान सरकार ने वैक्सीन की बर्बादी के दावों को नकार तो दिया, लेकिन उस पर सवाल कम नहीं हुए. दैनिक भास्कर ने मंत्री के आरोपों और दावों के बाद नई खबर छापी. जयपुर एडिशन के 1 जून के संस्करण में. कचरे में मिलीं वायल्स पर दर्ज बैच नंबरों की जांच करने की चुनौती दे डाली. देखिए-

Bhaskar Screenshot 2
हिंदी अख़बार दैनिक भास्कर की रिपोर्ट का स्क्रीन ग्रैब

अब देखना ये है कि राजस्थान सरकार अखबार के इस दावे के बाद क्या जबाव देती है. बहरहाल, हम आपको बताते हैं कि कोरोना वैक्सीन की वायल को डिस्पोज करने के लेकर क्या नियम प्रावधान हैं.

वायल को ठिकाने लगाने के नियम

केंद्र सरकार ने कोविड-19 वैक्सीन के रखरखाव को लेकर विस्तृत गाइडलाइंस जारी कर रखी हैं. (यहां पढ़ सकते हैं)  इसी में वैक्सीन की खुली हुई वायल्स के दुरुपयोग को रोकने की प्रक्रिया भी बताई गई है. इसके मुताबिक़,

• एक सेशन के लिए किसी वैक्सीनेशन सेंटर को वैक्सीन की जितनी वायल्स दी जाती हैं, उन्हें वापस कोल्ड चेन पॉइंट पर लाना ज़रूरी है.

• ये कोल्ड चेन पॉइंट्स जगह-जगह बनाए जाते हैं. इनमें वैक्सीन की भरी हुई वायल्स को निर्धारित तापमान में रखा जाता है. यहीं से वैक्सीनेशन सेंटरों तक इनकी सप्लाई होती है.

• वैक्सीनेशन के बाद सभी वायल्स को कोल्ड चैन पॉइंट पर वापस भेजना ज़रूरी होता है. उनमें से चाहे थोड़ी-बहुत दवा इस्तेमाल हुई हो, या पूरी खाली हो चुकी हो. ऐसी वैक्सीन वायल जिनका इस्तेमाल नही हुआ हो, वो भी कोल्ड चैन पॉइंट पर भेजनी होती हैं.

• गाइडलाइंस में लिखा है कि वैक्सीन की पूरी या आधी इस्तेमाल हो चुकी वायल्स का डिस्पोज़ल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दिशा-निर्देशों के आधार पर किया जाएगा.

• CPCB की गाइडलाइंस में कोविड-19 की वैक्सीन के डिस्पोज़ल पर खासतौर से कुछ नहीं कहा गया है. लेकिन आमतौर वैक्सीन के डिस्पोज़ल के दो तरीक़े होते हैं.

• पहला तरीक़ा है ऑटोक्लेविंग (Autoclaving) . इ सका आसान शब्दों में मतलब है डिसइन्फ़ेक्ट करना. इन शीशियों को बहुत तेज गरम पानी से साफ़ किया जाता है. फिर सुखाया जाता है ताकि दोबारा इस्तेमाल में लाया जा सके.

• दूसरा तरीक़ा है माइक्रोवेविंग (microwaving). इसमें माइक्रोवेव के इस्तेमाल से इन शीशियों को साफ़ किया जाता है.

• ये दोनों ही तरीक़े दूरदराज के इलाक़ों में नहीं होते. ऐसे में वायल्स को ज़िले के अस्पताल या अन्य किसी सरकारी संस्थान में ले जाकर डिस्पोज किया जाता है.


वीडियो- WHO ने कोरोना के इंडियन वैरिएंट को नाम दिया ‘डेल्टा’ और ‘कप्पा’!

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