Submit your post

Follow Us

चुनाव से पहले BJP उत्तराखंड का सीएम बदलने जा रही है?

बात उत्तराखंड की. उत्तराखंड को बने हुए 20 साल पूरे नहीं हुए हैं. अभी वहां चौथी विधानसभा का कार्यकाल पूरा होना बाकी है. लेकिन आप वहां के मुख्यमंत्रियों की लिस्ट देखेंगे तो आपको नित्यानंद स्वामी, भगत सिंह कोश्यारी और एनडी तिवारी जैसे नामों से शुरु हुआ एक लंबा सिलसिला मिलेगा. 20 साल से कम में ही 8 अलग अलग मुख्यमंत्री 11 बार शपथ ले चुके हैं. सिर्फ एक मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा कर पाया – कांग्रेस नेता एनडी तिवारी. दूसरे नंबर पर हैं 4 साल पूरे कर चुके भाजपा के त्रिवेंद्र सिंह रावत. और आज उत्तराखंड की बात इन्हीं के चलते हो रही है.

त्रिवेंद्र सिंह रावत की कुर्सी खतरे में है?

उत्तराखंड के स्थानीय अखबार खबर पर खबर छाप रहे हैं कि त्रिवेंद्र सिंह रावत की कुर्सी खतरे में है. और ये खतरा किसी दूसरी पार्टी से नहीं, खुद भाजपा के अंदर मचे घमासान से पैदा हुआ है. राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, भाजपा सांसद अजय भट्ट और रावत कैबिनेट में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, एक और मंत्री धनसिंह रावत – इन सब लोगों का नाम सीएम पद के लिए चलने लगा. आइए समझते हैं कि ये घमासान मचा कैसे.

उत्तराखंड में चुनाव हुए थे 2017 में. तब तक उत्तराखंड में हर चुनाव में सत्ताधारी दल हारा था. फिर कांग्रेस की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने तो अपने पांच सालों में दो राष्ट्रपति शासन, दो मुख्यमंत्री और चार शपथ ग्रहण देखे थे. नतीजे आए तो भाजपा के पास प्रचंड बहुमत था. विधानसभा की 70 में से 56. पार्टी ने सीएम बनाया त्रिवेंद्र सिंह रावत को. उत्तराखंड में सीएम की कुर्सी की खिसकने वाली तासीर के बारे में हमने आपको अभी बताया था. 2020 के दूसरे हिस्से में खबरें आने लगीं कि उत्तराखंड में भाजपा के विधायक अपनी समस्याओं को लेकर सीधे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को लेटर लिख दे रहे हैं. इंटरनेट का ज़माना है, तो चिट्टियां वायरल भी होती रहीं. सितंबर 2020 में में उमेश शर्मा काउ ने जेपी नड्डा को खत लिखा था. शिकायत की थी कि उनके इलाके में विकास नहीं हो रहा है. इसी महीने में लोहाघाट से विधायक पूरन सिंह फर्त्याल ने भी एक सड़क को लेकर नड्डा को खत लिखा. इन दोनों के खत से पहले सूबे में भाजपा के अध्यक्ष रहे बिशन सिंह चौपाल ने भी ऐसा ही एक खत जेपी नड्डा को लिखा था और मिलने के लिए समय मांगा था.

नाराज़ विधायकों की लिस्ट लंबी होती गई?

इस तरह उत्तराखंड में अपनी ही सरकार के काम ने नाराज़ विधायकों की लिस्ट लंबी होती गई. लेकिन चिट्ठी पतरी को त्रिवेंद्र सिंह रावत और उत्तराखंड की भाजपा इकाई मैनेज कर ले गए. असली समस्या आई 2021 में. जब सरकार के चार साल पूरे होने वाले थे. उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैण में उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र शुरू हुआ. इसे 1 मार्च से 10 मार्च तक चलना था. लेकिन 4 मार्च को रावत सरकार की तरफ से एक ऐसा ऐलान हो गया जिसने बजट सत्र के बीचों-बीच बवाल खड़ा कर दिया. त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने गैरसैण को एक नया मंडल या कमिश्नरेट बना दिया.

उत्तराखंड को जब से अलग राज्य बनाने की मांग शुरू हुई, तकरीबन तभी से ये विचार था कि नए सूबे की एक ऐसी राजधानी हो जो कुमाऊं और गढ़वाल के बीच में पड़े. ताकि सूबे के दोनों बड़े हिस्से राजधानी की सुविधाओं का समान रूप से भोग कर सकें. उत्तराखंड में कुमाऊं और गढ़वाल – दोनों इलाकों की अपनी अलहदा सांस्कृतिक पहचान है और सूबे की राजनीति भी इन्हीं दो पहियों से चलती है.

मसला-ए-गैरसैण

2000 में सूबा तो बन गया, लेकिन गैरसैण में राजधानी का काम बहुत धीरे धीरे आगे बढ़ा. क्योंकि सारा काम देहरादून से हो ही रहा था. जब विजय बहुगुणा कांग्रेस सरकार के सीएम होते थे, तब 2013 में गैरसैण में विधानसभा के लिए भूमिपूजन हुआ. हरीष रावत सरकार के वक्त से यहां कुछेक सत्र भी होने शुरू हुए. 2020 में त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने फैसला लिया कि गैरसैण को सूबे की ग्रीष्मकालीन राजधानी माना जाएगा. गैरसैण पूरी तहसील का नाम है, तो राजधानी के लिए आधिकारिक नाम तय हुआ भराड़ीसैण.

इतनी बातों जानकर आपके मन में सवाल आ सकता है कि फिर गैरसैण को नया कमिश्नरेट बनाने से भूचाल कैसे आ गया. इसके लिए देखिए कि नए मंडल में ज़िले कहां से आए हैं. गैरसैण के नए मंडल में कुमाउं से अल्मोड़ा और बागेश्वर को लिया गया है. और गढ़वाल से रूद्रप्रयाग और चमोली को. इनका काम देखने के लिए एक कमिश्नर और डीआईजी को नियुक्त होने हैं.

उत्तराखंड के पत्रकार बताते हैं कि कुमाउं के नेता इस बात से खुश नहीं हैं कि उन्हें अब अपने काम, गढ़वाल के रास्ते करने होंगे. याद दिला देते हैं, गैरसैण पड़ता है चमोली में, जो कि गढ़वाल में आता है. कांग्रेस नेताओं ने तो इस कदम का विरोध किया ही. कहा कि गैरसैण को पहले ज़िला बनाया जाता तो शायद जनता का फायदा होता. लेकिन छन छनकर खबरें ये भी आईं कि त्रिवेंद्रसिंह रावत कैबिनेट में मंत्री हरकसिंह रावत और सतपाल महाराज जैसे नेता भी इस बात से नाराज़ हैं. ऐसी ही बात दिल्ली में मुरली मनोहर जोशी जैस नेताओं के लिए भी कही गई.

बीजेपी उत्तराखंड में कितना कुछ गड़बड़?

इस बात ने उन सभी को मौका दे दिया, जिन्हें त्रिवेंद्रसिंह रावत से कोई भी शिकायत थी. हालात इतने खराब हो गए कि 6 मार्च को बजट सत्र के बीचों बीच भाजपा कोर कमेटी की बैठक बुला ली गई जिसके लिए दिल्ली से ऑब्ज़र्वर पहुंचे – रमन सिंह और दुष्यंत गौतम. उत्तराखंड में पार्टी के सांसद जैसे अजय भट् और नरेश बंसल जैसे नेता भी पहुंचे. सूबे में भाजपा के अध्यक्ष बंसीधर भगत ने कहा कि वर्किंग कमेटी की बैठक की तैयारी के लिए मुलाकात हुई. लेकिन ये बात बाहर आ गई कि पार्टी में सबकुछ ठीक नहीं है.

बजट सत्र बिना पूर्व सूचना के खत्म हो गया. और भाजपा के सभी विधायकों को हवाई रास्ते से देहरादून लाया गया. 6 मार्च वाली मीटिंग के दिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी देहरादून में थे. लेकिन वो मीटिंग में नहीं पहुंचे. उन्होंने हवाई अड्डे पर ही रमन सिंह और दुष्यंत गौतम से मुलाकात की. इन दो नेताओं ने दिल्ली पहुंचकर अपनी रिपोर्ट पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को दी. और 8 मार्च को त्रिवेंद्र सिंह रावत को दिल्ली तलब किया गया.

वैसे आपको ये भी जानना चाहिए कि भाजपा के कम से कम 17 विधायक भी दिल्ली आए हैं जिन्हें रावत विरोधी खेमे का बताया जा रहा है. और ये उत्तराखंड भवन या सदन की जगह किसी होटल में रुके हुए हैं. खैर, लौटते हैं रावत पर. रावत भले कहें कि सबकुछ सामान्य है, लेकिन उत्तराखंड के अखबार पढ़ने पर आपको अलग ही तस्वीर नज़र आती है. कुछ बातें हैं जो आरोपों की शक्ल में हैं. इनकी पुष्टि हम नहीं कर सकते, लेकिन आपको एक आइडिया मिल जाएगा कि समस्या है किस तरह की.

#
आपको ये बात बहुत जगह लिखी मिलेगी कि कई विधायक रावत के काम करने के तरीके से असंतुष्ट हैं.

#
फिर सरकार के कुछ ऐसे फैसले रहे हैं, जिनसे संघ परिवार नाराज़ बताया जा रहा है. मिसाल के लिए मंदिरों का प्रशासन सरकार के हाथ में देना, हरिद्वार में शराब का कारखाना और कुंभ मेले की तैयारी.

लेकिन क्या बात इतनी ही थी. क्या रावत अपनी कुर्सी बचा ले जाएंगे?


विडियो- उत्तराखंड ग्लेशियर आपदा के बाद गंगोत्री ग्लेशियर पर क्या बड़े सवाल खड़े हो रहे?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्या चल रहा है?

विलियमसन ने तो SRH के लिए गज़ब ही लक्ष्य तय कर दिया है!

विलियमसन ने तो SRH के लिए गज़ब ही लक्ष्य तय कर दिया है!

उधर संजू फायर हैं.

मुंबई को पीटकर कोहली ने ऐसा क्या किया कि वीडियो वायरल है?

मुंबई को पीटकर कोहली ने ऐसा क्या किया कि वीडियो वायरल है?

ईशान किशन के साथ दिखे कोहली.

संजू सैमसन का ये जलवा देख T20 वर्ल्ड कप सेलेक्शन पर सवाल उठने तय हैं!

संजू सैमसन का ये जलवा देख T20 वर्ल्ड कप सेलेक्शन पर सवाल उठने तय हैं!

आज तो संजू ने मौज कर दी.

हरियाणा: सब-इंस्पेक्टर की परीक्षा में अनिल विज की खासियत पूछी गई, विकल्प दिया- अविवाहित!

हरियाणा: सब-इंस्पेक्टर की परीक्षा में अनिल विज की खासियत पूछी गई, विकल्प दिया- अविवाहित!

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन पर भी सिर पकड़ने वाला सवाल पूछ लिया गया.

किसानों का भारत बंद जमीन से लेकर ट्विटर तक कितना सफल रहा?

किसानों का भारत बंद जमीन से लेकर ट्विटर तक कितना सफल रहा?

लोगों को हुई समस्या पर टिकैत ने क्या कहा?

आज के मैच में बहुत मारने वाला अंग्रेज़ खेलने उतर गया है!

आज के मैच में बहुत मारने वाला अंग्रेज़ खेलने उतर गया है!

राजस्थान और हैदराबाद में आज किसका पलड़ा भारी है?

बंगाल उपचुनाव: जब BJP के दिलीप घोष के गार्ड्स ने पिस्तौलें तान लीं

बंगाल उपचुनाव: जब BJP के दिलीप घोष के गार्ड्स ने पिस्तौलें तान लीं

भवानीपुर में TMC-BJP में बड़ा बवाल हो गया!

कमाल का मुकाबला! 'लाइगर' में माइक टायसन से भिड़ेंगे विजय देवरकोंडा!

कमाल का मुकाबला! 'लाइगर' में माइक टायसन से भिड़ेंगे विजय देवरकोंडा!

ये भारतीय सिनेमा इतिहास में पहली बार होगा, जब माइक टायसन किसी हिंदी फिल्म में दिखाई देंगे.

Axis Bank के ग्राहक इसे 'भारत का सबसे खराब बैंक' क्यों कह रहे हैं?

Axis Bank के ग्राहक इसे 'भारत का सबसे खराब बैंक' क्यों कह रहे हैं?

बैंक के 'कॉन्सोलिडेटेड चार्ज' पर ग्राहकों का पारा चढ़ा हुआ है, लेकिन ये है क्या?

कपिल शर्मा को वैनिटी वैन के नाम पर करोड़ों की चपत लगाई थी, कार डिज़ाइनर की गिरफ्तारी हुई

कपिल शर्मा को वैनिटी वैन के नाम पर करोड़ों की चपत लगाई थी, कार डिज़ाइनर की गिरफ्तारी हुई

आरोपी बहुत फेमस कार डिज़ाइनर का बेटा है. क्या था पूरा मामला, विस्तार से जान लीजिए.