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UP के एक और अस्पताल ने नोटिस लगाया- हमारे पास ऑक्सीजन नहीं है, मरीज को कहीं और ले जाएं

देश के अलग-अलग अस्पताल, चाहे निजी हों या सरकारी, ऑक्सीजन के लिए परेशान हैं. कई ने प्रशासन का सहारा लिया. थक-हार कर कोर्ट भी गए. लेकिन खास राहत नहीं मिली. यूपी भी ऑक्सीजन की कमी झेल रहे राज्यों में से एक है.  सीएम योगी आदित्यनाथ का कहना है कि राज्य में कोरोना से लड़ने की पूरी व्यवस्था है. पर लखनऊ के एक प्राइवेट अस्पताल ने इन दावों की पोल खोल दी है.

इस अस्पताल ने ऑक्सीजन के लिए मदद नहीं मांगी. बल्कि एक नोटिस जारी कर दिया कि वो अब मरीजों के लिए कुछ नहीं कर पाएंगे. उनके पास ऑक्सीजन नहीं है. इस अस्पताल का नाम सन अस्पताल है. जो लखनऊ के गोमती नगर में स्थित है. इस अस्पताल ने नोटिस में लिखा,

उत्तर प्रदेश के सीएम और केंद्र सरकार से लगातार रिक्वेस्ट के बाद भी हमें पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रही. जो भी मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं, उनके परिवारवालों से निवेदन है कि उन्हें किसी बेहतर सेंटर लेकर जाएं, ताकि उनका उचित इलाज हो सके. इस परेशानी के लिए हमें खेद है.

Lucknow Hospital Out Of Oxygen
सन हॉस्पिटल का जारी किया हुआ नोटिस.

बता दें कि ये पहला मौका नहीं है जब यूपी के किसी अस्पताल ने ऑक्सीजन सप्लाई खत्म होने की बात की हो. 22 अप्रैल की रात को मेरठ के एक निजी अस्पताल में ऑक्सीजन खत्म हो गया. अस्पताल में करीब 15 मरीज क्रिटिकल हालत में थे. बिना ज़्यादा वक्त गवाएं उन्हें दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया गया. मेरठ के न्यूटिमा अस्पताल का हाल भी कुछ ऐसा ही हुआ था. अस्पताल ने नोटिस जारी कर दिया था कि ऑक्सीजन खत्म हो गया. अपने मरीज को कहीं और ले जाएं. वहीं का केएमसी अस्पताल भी ऑक्सीजन की किल्लत झेल रहा था. केएमसी नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल संध्या चौहान ने आजतक को बताया था कि ऑक्सीजन की कमी की वजह से आठ लोगों की मौत हो चुकी है.

मेरठ से आइए आगरा की ओर. कुछ दिन पहले आगरा की एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर वायरल थी. जहां एक औरत अपने पति को अस्पताल लेकर जा रही थी. अस्पताल में ऑक्सीजन नहीं मिला. मजबूरन, पत्नी अपने पति को माउथ टू माउथ ऑक्सीजन देने लगीं. दुर्भाग्यवश, ऑक्सीजन ना मिल पाने की वजह से उनके पति ने दम तोड़ दिया.

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री साफ कर चुके हैं. कि ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं. अस्पताल में बेड पूरे हैं. लेकिन वास्तविकता इससे उलट है. आदित्यनाथ सरकार को एक बात और साफ करने की जरूरत है. कि उनके द्वारा किए ये इंतेजाम कहां नज़र आएंगे. क्योंकि ज़मीनी हकीकत तो कुछ और ही कहानी कह रही है.


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