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महाराष्ट्र में बिना सेफ्टी के बनाए जा रहे थे कोविड स्वैब टेस्ट किट, आरोपी हिरासत में

कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. संक्रमण से बचने को लेकर डॉक्टर लगातार लोगों को सावधानी बरतने को कह रहे हैं. कई जगह से फ्रॉड के मामले सामने आ रहे हैं. इस सबके बीच महाराष्ट्र के उल्हासनगर से एक चौंकाने वाली रिपोर्ट आई है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट मुताबिक़ उल्हासनगर की झुग्गियों में कोविड टेस्ट किट की स्ट्रिप्स की पैकिंग बिना किसी साफ़-सफाई, सावधानी और प्रोटोकॉल के तहत की जा रही थी. आइए पूरा मामला समझते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक़ मुंबई से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर उल्हासनगर के संत ज्ञानेश्वर नगर की झुग्गियों में रहने वाले दर्जनों लोग आरटी-पीसीआर नासॉफिरिन्जियल किट की पैकिंग का काम कर रहे थे. इस काम में मुख्यतः महिलाएं और बच्चे शामिल रहे हैं. इन लोगों को हर एक पैकेट में दो स्वैब पैक करने पर 1000 पैकेट के 20 रुपये दिए जा रहे थे. इन किट्स की सप्लाई ये लोग स्थानीय सप्लायर मनेश केसवानी को कर रहे थे.

5 मई को स्थानीय पुलिस और उल्हासनगर नगर निगम ने कम से कम पांच घरों में बचे हुए स्वैब स्टिक स्टॉक को ज़ब्त कर लिया है. केसवानी पर इंडियन पीनल कोड और महामारी रोग अधिनियम 1897 के तहत मामला दर्ज किया गया है. ठाणे पुलिस ने 6 मई की शाम मनीष केसवानी को गिरफ्तार कर लिया है. मामले को लेकर ठाणे पुलिस के कमिश्नर सुरेश मेखला ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बताया है कि केसवानी को हिरासत में ले लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है. पूछताछ से सप्लाई चेन को लेकर और लीड मिलेगी.

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए स्थानीय सुरेंद्र यादव ने बताया है कि केसवानी झुग्गी के एक गोदान का मालिक है. वह वहां पैकिंग से संबंधित चीज़ों को रखता है. स्टिक्स पैकिंग को लेकर उसने कई घर किराये पर लिए थे.

FDA से रजिस्टर्ड नहीं

जॉइंट कमिश्नर (ड्रग्स) प्रवीन मुंददा ने बताया है कि पैक्ड किट्स पर बायो-स्वैब लिखा हुआ है. FDA के साथ कोई भी बायो-स्वैब नाम की कंपनी रजिस्टर्ड नहीं है. ठाणे क्षेत्र में इस तरह के सिर्फ दो मैन्युफैक्चरर हैं, जिसका इस मामले से कोई संबंध नहीं है. हमने उन दोनों की जांच की है. उनके पास लाइसेंस भी है और सभी नियमों को फॉलो कर रहे. अधिकारियों ने बताया है कि मनेश केसवानी पर नकली मैनुफैक्चरिंग के तहत मामला दर्ज किया जा रहा.

FDA के अधिकारियों और पुलिस ने केसवानी के गोदाम की जांच की है और उन्हें वायरल ट्रांसपोर्ट मीडियम (VTM) का निर्माण होने का कोई संकेत नहीं दिखा है. अधिकारियों को शक है कि केसवानी ने कुछ मैनुफैक्चरर को स्वैब किट बेची, जिसे उन्होंने आगे VTM के साथ लैब्स को बेचा है. इस पूरे मामले का अब तक पता लगाना बाकी है.

स्वैब स्टिक का क्या काम?

कोरोना वायरस को लेकर आरटी-पीसीआर जांच में इस स्वैब स्टिक का इस्तेमाल किया जाता है. सैंपल लेने के लिए स्टिक को नाक या मुंह में डाला जाता है और फिर उसे वायरल ट्रांसपोर्ट मीडियम ट्यूब में एक तरल पदार्थ में रख दिया जाता है. इन दोनों को साथ में ही किसी लैब को भेजा जाता है.


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