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2 इंडियंस की लाश PAK में कर रही हैं अपनों का इंतजार

सरबजीत याद हैं आपको? पाकिस्तानी जेल में कैद थे. साथ के कैदियों ने हमला किया. अस्पताल में एडमिट हुए. दोनों मुल्कों में खूब खबरें चलीं. दुआएं हुईं. लेकिन सरबजीत मर गए. इंडियन कैदी थे, तो कई दिन चर्चों में रहें. सरबजीत की लाश इंडिया को सौंप दी गई. ये बात हुई सरबजीत की. लेकिन दो ऐसे भी इंडियंस हैं, जिनकी पाकिस्तान की कैद में मौत हो गई. और आज तक दोनों मुल्कों में से किसी को फिक्र नहीं है कि उनकी खबर ले लें.

अब इससे बड़ी दुखद बात ये है कि दोनों इंडियंस की मौत को दो महीने हो चुके हैं. लेकिन अब तक लाश वहीं है. पाकिस्तान की नेक ऑर्गेनाइजेशन एधी फाउंडेशन के मुर्दाघर में दोनों इंडियंस की लाश रखी हुई है. ताकि कभी कोई उनका अपना हो तो लाश ले जा सके. अंतिम संस्कार कर सके. पर यहां जिंदा में लोगों की खबर नहीं रहती, मरने की बात तो छोड़ो. वो भी तब जब ये बात इंडिया और पाकिस्तान की हो रही हो.

दोनों कैदियों के नाम हैं अबू बकर और वागा चौहान. अबु बकर ने 17 नवंबर 2015 और वागा चौहान ने 22 दिसंबर 2015 को आखिरी सांस ली. वागा चौहान गुजरात के रहने वाले थे. मछुआरे थे तो समंदर में मछली की तलाश में निकले थे. पर पाकिस्तानी फौज ने पकड़ लिया. अरेस्ट किया. जेल में डाला. फिर वतन बदलने के साथ सेहत भी बदली. बीमार हुए तो कराची के अस्पताल में एडमिट कराए गए. पर नहीं बचे.

एधी फाउंडेशन का क्या है कहना?
एधी फाउंडेशन के अनवर काजमी के मुताबिक, दोनों इंडियंस की लाश एधी फाउंडेशन के मुर्दाघर में है. इस बारे में पाकिस्तानी प्रांत सिंध के होम डिपार्टमेंट और मालिर जेल के सुप्रीटेंडेंट को भी खत लिखा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

पहले भी हुए हैं सितम?
द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, भीखा एल शिवाल, रामजीभाई वाला, दादूभाई माकवाना और किशोर भगवान जैसे कई मछुआरे थे. जिनकी मौत के महीनों बाद उनकी लाश वतन लौट पाई.

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