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ट्रांसजेंडर बिल पर जया बच्चन ने बेहद शानदार बात बोली है

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ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) बिल- 2019. इस पर 20 नवंबर के दिन राज्यसभा में चर्चा हुई. बिल लोकसभा में 5 अगस्त के दिन ही पास हो गया था. अभी इसे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने राज्यसभा में पेश किया, जिसके बाद इस पर बहस हुई.

राज्यसभा के बहुत से सांसदों ने बिल पर पुनर्विचार करने का सुझाव दिया. साथ ही इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग भी रखी. गहलोत ने जैसे ही राज्यसभा में बिल पेश किया, तुरंत ही डीएमके सांसद तिरुची शिव ने बिल में कुछ संशोधन के साथ उसे सेलेक्ट कमेटी में भेजने की मांग रख डाली. इस बात पर फिर गहलोत ने कहा कि पहले इस बिल पर बहस तो कर ली जाए. साथ ही सदन से मांग की कि इसे पास कर दिया जाए. फिर इस बिल पर बहस हुई.

समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने कहा कि बिल को पास करते वक्त संवेदनशीलता के साथ काम लेना चाहिए. उन्होंने कहा,

‘जिस रफ्तार से यहां बहुत संवेदनशील बिल्स को लोग सपोर्ट कर रहे हैं, उससे मैं थोड़ी आश्चर्य में पड़ रही हूं. इसके पहले जो बिल था वो बहुत ही संवेदनशील था. बहुत से लोगों ने कहा कि हम उसको सपोर्ट कर रहे हैं. किसी ने उसकी टेक्नीकल चीज़ों की तरफ ध्यान नहीं दिया. अपर हाउस होने के नाते हमें बिल पास करते वक्त संवेदनशील होना चाहिए. मैंने तिरुची शिव के प्राइवेट मेंबर बिल को सपोर्ट किया था, लेकिन मुझे तब भी थोड़ा संदेह था और अभी भी है. सबसे पहला और सबसे जरूरी पॉइंट मेरे लिए ट्रांसजेंडर्स का सर्टिफिकेशन है. ये खुद में एक भेदभाव है. एक इंसान का अपमान है. शक्ल, सूरत और व्यवहार से वो और किसी मनुष्य से अलग नहीं हैं. वो हमारी तरह ही दिखते हैं. उन्हें किसी कमेटी या डीएम के पास जाकर ये क्यों बताना पड़े कि वो ट्रांसजेंडर हैं, ये उनका अपमान है. इसकी क्या जरूरत है? हमें किसी भी इंसान के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए. और उनके साथ भी नहीं करना चाहिए जो इंसान नहीं हैं. किसी का अपमान करने का अधिकार हमारे पास नहीं है. आपने तो इस तरह से लिख दिया है ‘सर्टिफिकेशन ऑफ आइडेंटिटी एज अ ट्रांसजेंडर पर्सन (ट्रांसजेंडर व्यक्ति के तौर पर पहचान पत्र)’. आपने तो पहले ही उसे अलग-थलग कर दिया. अगर वो इंसान जाए ही न और बताए ही न, तो कहां से उसे अलग करेंगे? कहां से सर्टिफिकेशन बनेगा? वह तो आम आदमी की तरह जा सकता है और झूठ भी बोल सकता है. इसमें टेक्नीकल पॉइंट्स बहुत हैं. इसके ऊपर ध्यान नहीं दिया गया. किसी आदमी को जबरदस्ती करके भी ट्रांसजेंडर बनाया जा सकता है. हां. हमें इन छोटे-छोटे पॉइंट्स पर भी बात करने की जरूरत है. उनकी क्या गलती है? क्या हमने इसके बारे में कुछ सोचा है? ये सारी बातें बिल में नहीं हैं? मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि बिल की तरफ थोड़ा ज्यादा संवेदनशील होकर ध्यान देना चाहिए.’

CPI(M) सांसद झरना दास ने भी बिल को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजने की मांग की. कहा,

‘घर में जो बच्चा पैदा होता है. अगर वो ट्रांसजेंडर होता है, तो उसको घर में नहीं रखते. परिवार वाले भी उसको घर में रखने के लिए तैयार नहीं होते हैं. मुझे ये पूछना है कि इतने दिन से चर्चा हो रही है, तो आपने सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए क्या किया है? प्रधानमंत्री जी कि जो आवास योजना है, उसके तहत उन्हें कितने आवास मिले हैं? उन्हें कितनी सरकारी नौकरियां दी गई हैं? उनके पास कुछ नहीं है. हमने उनसे पूछा, जवाब था हमें कुछ नहीं मिलता. बिल में जो सर्टिफिकेशन लेकर आए हैं, इस तरह से काम नहीं होता. मैं जानना चाहती हूं कि इस जेंडर आइडेंटिफिकेशन का सर्टिफिकेट कौन देगा? मजिस्ट्रेट? पहले मजिस्ट्रेट उसकी जांच करेंगे, उसके बाद उसका सर्टिफिकेट जारी होगा. वो सर्टिफिकेट के लिए क्यों जाएंगे? नहीं जाएंगे.’

कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद ने कहा,

‘ट्रांसजेंडर्स कई साल से भेदभाव सहन कर रहे हैं. जिस तरह से एसटी/एससी के लिए प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज एक्ट बना, उसी तरह का कोई एक्ट इनके लिए भी बने. दूसरा सरकारी नौकरियों में इनको भी स्थान दिया जाए. इसके लिए आप इन्हें चाहे किसी भी कैटेगिरी में डालें, बैकवर्ड कैटेगिरी में या फिर किसी अन्य कैटेगिरी में, लेकिन अगर इनके लिए नौकरी का प्रावधान होगा, तो उससे भी इनको बहुत फायदा होगा. तीसरा जब बच्चा पैदा होता है तो उसके ऑर्गन के आधार पर रजिस्टर किया जाता है कि वो लड़का है या लड़की. लेकिन जब वो बड़ा हो जाता है. चार-पांच साल के बाद, तो उसमें कुछ बदलाव आते हैं. कई बार वो आपको लड़का दिखेगा, लेकिन वो लड़की की तरह बर्ताव करेगा. इसलिए ऐसा कोई प्रावधान होना चाहिए, कि पैदा होते वक्त जो लड़का या लड़की लिखा गया है. उसके कुछ साल बाद जब वो बिल्कुल होश में आए और कपड़े पहनना, उसका तौर-तरीका और नाम वो बदले, उस वक्त वहीं जाकर, जहां उसे लड़का या लड़की लिखना है, उसमें चेंज करके उसको सर्टिफिकेट में जेंडर चेंज करने की अनुमति भी हो, ताकि उसका और शोषण न हो जाए.’

Ghulam Nabi Azad
ट्रांसजेंडर बिल पर बोलते हुए गुलाम नबी आजाद.

इन सांसदों के अलावा भी बहुत से सांसदों ने ट्रांसजेंडर बिल को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजने की अपील की है.वहीं बहुत से सांसदों ने इसका समर्थन भी किया है. टीएमसी सांसद शांता छेत्री ने भी बहस में हिस्सा लिया और इसे स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजने की मांग रखी. उन्होंने कहा,

‘इस देश के ट्रांसजेंडर समुदाय ने बहुत कुछ सहन किया है. भेदभाव हुआ है, उन्हें प्रताड़ित किया गया है. ये बिल मानवाधिकार दायित्वों के हिसाब से फिट नहीं बैठता. लोकसभा में बहुत जल्दबाजी से इसे पास किया गया है. बिल में ट्रांसजेंडर व्यक्ति की सेल्फ आइडेंटिटी को स्पष्ट नहीं किया गया है, जो कि इस पूरे बिल का सबसे जरूरी मकसद है.’

आपको बता दें कि ट्रांसजेंडर कम्युनिटी के लोग भी इस बिल का विरोध कर रहे हैं. क्या है ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) बिल- 2019. यहां क्लिक करके पूरी जानकारी लें.


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