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कांग्रेस ने अलग से प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों की?

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“आज सुबह-सुबह… ना बैंड, ना बाजा, ना बारात. उसके बिना जिस तरह से मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई, वो महाराष्ट्र के इतिहास में काली स्याही से लिखा जाएगा.”

कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत इसी लाइन से हुई. वरिष्ठ नेता अहमद पटेल आज सुबह-सुबह मुंबई पहुंचे थे. कांग्रेस विधायक दल की बैठक होने वाली थी. दोपहर के 12 बजे. लेकिन अहमद पटेल को प्रेस कॉन्फ्रेंस करना पड़ी. 22 नवंबर की रात तक हर तरफ ये खबर चल रही थी कि महाराष्ट्र में नई सरकार का रास्ता साफ हो चुका है. कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना मिलकर सरकार बनाएंगे. सीएम का पद उद्धव ठाकरे के पास जाना था.

लेकिन 23 नवंबर की सुबह में जो हुआ, उसके लिए शास्त्रों में शब्द ढूंढ़ने की प्रक्रिया जारी है. सुबह जब लोगों की नींद खुली तो पता चला कि महाराष्ट्र में नई सरकार ने शपथ ले ली है, लेकिन सीएम उद्धव ठाकरे नहीं बल्कि देवेंद्र फड़णवीस बने हैं. फड़णवीस के साथ एनसीपी के अजित पवार ने डिप्टी सीएम की शपथ ली. राजनीति के सारे पत्ते यूं पलटे कि खिलाड़ी भौंचक रह गए. बाजी कोई और ले गया.

23 नवंबर को कांग्रेस ने अपनी एक अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी. दोपहर 1:40 बजे. प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया अहमद पटेल ने. कांग्रेस के प्रेस कॉन्फ्रेंस की मुख्य बातें –
1. पहले बीजेपी को मौका दिया गया, फिर शिवसेना को मौका दिया गया, उसके बाद एनसीपी को मौका दिया गया. लेकिन कांग्रेस को जो मौका दिया जाना चाहिए था, राज्यपाल महोदय ने वो मौका नहीं दिया.

2. ये जो कुछ हुआ है, कुछ न कुछ गलत तो हुआ है. जिस तरह से शपथ दिलाई गई है, संविधान का अपमान किया गया है. हम इसकी भर्त्सना करते हैं.

3. तीनों पार्टियां (कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना) साथ हैं. मुझे विश्वास है कि हम ट्रस्ट वोट में बीजेपी को मिलकर हराएंगे. कांग्रेस के सभी विधायक यहां हैं और पार्टी के फैसले के साथ हैं. दो विधायक अपने गांव में हैं लेकिन वो हमारे साथ हैं.

4. आज का दिन महाराष्ट्र के इतिहास में एक काला दिन था. सबकुछ जल्दबाजी में किया गया, इससे शर्मनाक क्या ही होगा. हम इसके खिलाफ राजनीतिक और कानूनी, दोनों तरीकों से लड़ेंगे.

5. आज के कांड की आलोचना के लिए मेरे पास शब्द नहीं है.

24 अक्टूबर को दो राज्यों में विधानसभा चुनाव के रिजल्ट आए. हरियाणा और महाराष्ट्र. दोनों ही राज्यों में बीजेपी को अकेले दम पर बहुमत नहीं मिला. हरियाणा में बीजेपी ने दुष्यंत चौटाला की जेजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली. लेकिन महाराष्ट्र में पेंच फंसा. महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना ने साथ में चुनाव लड़ा था. लेकिन रिजल्ट आने के बाद शिवसेना सीएम पद के लिए अड़ गई थी. शिवसेना का कहना था कि बीजेपी ढाई-ढाई साल के लिए सीएम पद पर लिखकर दे. लेकिन बीजेपी ने ऐसी किसी भी डील से साफ मना कर दिया था.

जब तक कोई पार्टी सदन में विश्वासमत हासिल नहीं कर लेती, महाराष्ट्र के सियासी समीकरण की हवा पकड़ना मुश्किल लग रहा है.


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