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कानपुर: क्या मुखबिरी की वजह से आठ पुलिस वाले शहीद हो गए?

कानपुर के शातिर अपराधी और हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर गुडों ने फायरिंग कर दी. इसमें डिप्टी एसपी समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हत्याकांड के पीछे मुखबिरी की बात सामने आ रही है. ‘दैनिक भास्कर’ ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि विकास दुबे को पहले से ही पता चल गया था कि रात में उसके घर दबिश पड़ने वाली है. इतना ही नहीं, ये भी पता चल गया था कि कौन-कौन टीम में शामिल रहेगा. फोर्स की संख्या कितनी हो सकती है? इन सबकी डिटेल विकास के पास थी.

प्लानिंग के तहत गुडों ने घर के सामने जेसीबी खड़ी कर पुलिस का रास्ता रोक दिया. एडीजी (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार का कहना है कि अगर पुलिस की तरफ से कोई चूक हुई है, तो इसकी जांच की जाएगी.

क्या है घटना की टाइमलाइन?.

राहुल तिवारी नाम के एक व्यक्ति ने विकास दुबे के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा लिखवाया. घटना से 24 घंटे पहले.
विकास की गिरफ्तारी के लिए डीएसपी के नेतृत्व में तीन टीम का गठन किया गया.
दो जुलाई की रात 12:30 से एक बजे के करीब बिल्हौर सीओ देवेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में तीन थानों की पुलिस गांव पहुंची.
रास्ते में जेसीबी लगाकर पुलिस का रास्त रोक दिया गया.
# पुलिस घर के पास पहुंची. इस बात का अंदाजा नहीं था कि विकास दुबे के साथ कितने लोग हैं और कहां छिपे हैं.
पुलिस टीम को चारों तरफ से घेर लिया गया.
गुड़ों और पुलिस के बीच फायरिंग शुरू हो गई.
एक घंटे तक पुलिस और गुडों के बीच फायरिंग होती रही.
अंधेरे का फायदा उठाते हुए विकास दुबे अपने साथियों के साथ भाग गया.
भोर में तीन बजे के आसपास घायल पुलिसकर्मियों को लेकर पुलिस रीजेंसी हॉस्पिटल पहुंची.
सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों को मृत घोषित कर दिया गया.
चार बजे के करीब 24 थानों की फोर्स, पीएसी फॉरेंसिक टीम, डॉग स्क्वॉयड मौके पर पहुंची.

एनबीटी के प्रवीण मोहता की रिपोर्ट के मुताबिक, विकास दुबे का घर किलेनुमा है. चारों तरफ से घेराबंदी है. घर के भीतर कोई देख नहीं सकता है, लेकिन छतों से पूरे गांव को देखा जा सकता है. फायरिंग से बचने के लिए पुलिसवालों ने छिपने की कोशिश की, लेकिन वहां निकालकर उन्हें मारा गया. विकास के घर से 50 से 100 मीटर की दूरी पर जगह-जगह खून के धब्बे दिख रहे हैं. गांव वाले इस घटना के बारे में कुछ भी नहीं बता रहे हैं. विकास दुबे के पिता घर में ही पलंग पर लेटे हैं, लेकिन वो कुछ बोलने की स्थिति में नहीं हैं.

यूपी पुलिस के डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी का कहना है,

“हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के खिलाफ धारा 307 के तहत मामला दर्ज किया गया था, पुलिस उसे गिरफ्तार करने गई थी. जेसीबी को वहां लगा दिया गया, जिससे हमारे वाहन बाधित हो गए. फोर्स के उतरने पर अपराधियों ने गोलियां चलाईं. जवाबी फायरिंग हुई, लेकिन अपराधी ऊंचाई पर थे, इसलिए हमारे आठ लोगों की मौत हो गई. हमारे लगभग सात आदमी घायल हो गए. ऑपरेशन अभी भी जारी है, क्योंकि अंधेरे का फायदा उठाकर अपराधी भागने में सफल रहे. आईजी, एडीजी, एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) को ऑपरेशन की निगरानी के लिए वहां भेजा गया है. कानपुर से फॉरेंसिक टीम मौके पर थी. लखनऊ से एक विशेषज्ञ टीम भी भेजी जा रही थी. एसटीएफ को तैनात किया गया है. आईजी और एसटीएफ मौके पर पहुंच रहे हैं. कानपुर एसटीएफ पहले से ही काम पर है.


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