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मोदी सरकार के इस कदम से घरेलू इंडस्ट्री चमक सकती है, पर रिस्क भी बहुत बड़ी है

कॉरपोरेट सेक्टर को राहत देने वाला कराधान विधि ( संशोधन) बिल. अंग्रेज़ी में टैक्सेशन लॉ अमेंडमेंट बिल. 5 दिसंबर को राज्यसभा से पास हो गया. अब इसे आखिरी मंज़ूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा. ये बिल 20 सितंबर को जारी अध्यादेश की जगह लेगा. मौजूदा और नई, दोनों तरह की कंपनियों के लिए कई प्रावधान इसमें मौजूद हैं. संसद में हुई चर्चा के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा-

कॉरपोरेट टैक्स में कमी करने के बाद घरेलू और मल्टी नेशनल कंपनियों ने रुचि दिखाई है. चीन और अमेरिका के बीच चल रहे ट्रेड वॉर की वजह से कई मेनुफैक्चरिंग और मल्टी नेशनल कंपनियां चीन से बाहर निकलना चाह रही हैं. इसलिए टैक्स को कम करने का ये अहम समय है.

सरकार का दावा है कि इस संशोधन से विकास को गति मिलेगी और नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे. उदाहरण दिया जा रहा है- थाईलैंड, वियतनाम और सिंगापुर जैसे साउथ ईस्ट देशों का.

क्या अहम है बिल में?

बिल में मैनुफैक्चरिंग इंडस्ट्री को ध्यान में रखकर कई बदलाव किए गए हैं.

1. पहले 400 करोड़ रुपये तक का बिजनेस करने पर 25 % की दर से और 400 करोड़ रुपये से ज़्यादा पर 30% की दर से इनकम टैक्स चुकाना पड़ता था. इसे घटाकर 22% कर दिया गया है. शर्त रखी कि इनकम टैक्स में और छूट नहीं ले सकेंगे.

2. 30 सितंबर, 2019 के बाद रजिस्टर होने वाली नई घरेलू मैनुफैक्चरिंग कंपनियां 15 %  की दर से टैक्स चुका सकेंगी. इन नई कंपनियों को 1 अप्रैल, 2023 तक मेनुफैक्चरिंग शुरू करनी होगी.

3. कोई कंपनी वित्त वर्ष 2019-20 में या फिर आने वाले सालों में नए टैक्स रेट चुन सकती हैं. एक बार टैक्स रेट चुन लेने के बाद कंपनी को भविष्य में उसी रेट के आधार पर टैक्स भरना होगा.

4. नया टैक्स रेट चुनने वाली कंपनियों पर मिनिमम ऑल्टरनेट टैक्स यानी MAT नहीं लगेगा. MAT एक कंपनी की ओर से तब चुकाया जाता है जब साधारण कर एक निश्चित सीमा से कम बने. यानी अगर किसी कंपनी की टैक्स देनदारी कम हो तो भी उसे अपनी आमदनी का एक निश्चित हिस्सा बतौर टैक्स चुकाना होता था. नए टैक्स रेट को चुनने वाली कंपनियों को MAT नहीं चुकाना होगा.

इस बिल में मेनुफैक्चरिंग सेक्टर का खास ख़याल रखा गया है. एक आंकड़े के मुताबिक, साल 2017-18 में मेनुफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनियों ने रियायतों के बाद 28% टैक्स चुकाया था. नए विधेयक में घरेलू कंपनियों को क़रीब 17.16% टैक्स देना पड़ेगा. क़रीब 11% का सीधा फायदा.

इस नए विधेयक से सरकारी ख़जाने पर 1 लाख 45 हज़ार करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. ऐसा अनुमान है कि इस रियायत पर होने वाले खर्च से राजकोषीय घाटा कुल GDP का 3.3% से 4% तक बढ़ जाने का ख़तरा है.

कुल मिलाकर सरकार के इस कदम से घरेलू व्यापारियों को फायदा पहुंचेगा. लेकिन कितनी नौकरियां सृजित होंगी, न ये सरकार बता पा रही है न जानकार.


वीडियो देखें- निर्मला सीतारमण के प्याज ना खाने वाले वीडियो की पूरी बात जानें

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