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लॉकडाउन के दौरान लोन की EMI टाली थी तो ब्याज को लेकर सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला पढ़ लीजिए

सुप्रीम कोर्ट ने लॉकडाउन के दौरान बैंक लोन का ब्याज माफ करने का सरकार को आदेश देने से इनकार कर दिया है. अदालत ने ये भी कहा कि वह लोन की EMI को 6 महीने से ज्यादा समय तक टालने (लोन मोराटोरियम) का आदेश भी नहीं देगा. बैंकों द्वारा ब्याज के ऊपर ब्याज वसूलने के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने अपना फैसला सुनाया है. आइए पॉइंट वाइज समझते हैं कि कोर्ट के इस फैसले का सरकार, बैंकों और लोन लेने वालों पर क्या असर पड़ सकता है.

# पूरा ब्याज माफ?

पिछले साल कोरोना की वजह से देशभर में लॉकडाउन लगा था. इस दौरान लोगों को आर्थिक तौर पर राहत देने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने लोन मोराटोरियम की सुविधा दी थी. यानी अगर मैं किसी लोन की ईएमआई भर रहा हूं तो कुछ महीने तक ईएमआई टालने की सुविधा. (रिपोर्ट यहां पढ़ें). मार्च 2020 में मोराटोरियम यानी लोन की ईएमआई तीन महीने तक न चुकाने की छूट दी गई थी. बाद में इसे और तीन महीने के लिए बढ़ाकर 31 अगस्त, 2020 तक कर दिया गया. यानी लोगों को कुल छह महीने तक अपने बैंक लोन की किस्तें टालने की मोहलत मिली थी. आरबीआई ने कहा था कि इन छह महीने में लोन की किश्त न भरने को डिफॉल्ट नहीं माना जाएगा. हालांकि, इसके साथ एक शर्त भी थी. वो ये कि मोराटोरियम पीरियड खत्म होने के बाद बकाया पेमेंट के ऊपर ब्याज देना पड़ेगा.

इसी को लेकर मामला कोर्ट तक पहुंच गया. याचिकाकर्ताओं की सबसे बड़ी मांग थी कि जो लोन मोराटोरियम दिया गया, उसका क्या फ़ायदा अगर ब्याज आज नहीं तो कल देना ही पड़ेगा. ब्याज के ऊपर ब्याज वसूलने को भी कोर्ट में चुनौती दी गई.

इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद 23 मार्च, 2021 को अपना फैसला दिया. इसमें कोर्ट ने कहा है कि-

बेशक ‘ब्याज़ के ऊपर ब्याज़’ पर छूट दी जा सकती है, लेकिन सरकार या बैंकों के लिए न तो पूरा ब्याज़ माफ़ करना संभव होगा और न ही मोराटोरियम की अवधि को बढ़ाना. ऐसा करने से अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होगी. अगर याचिकाकर्ता ये तर्क दे रहे हैं कि लॉकडाउन के दौरान उनकी कोई आय नहीं हुई, तो यही बात सरकार पर भी लागू होती है.

# ‘ब्याज़ पर ब्याज़’

‘ब्याज़ के ऊपर ब्याज़ पर छूट’ को लेकर सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से बैंक, सरकार या लोन लेने वालों पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ने वाला. वजह, सुप्रीम कोर्ट के ही सितंबर 2020 के एक फ़ैसले के बाद बैंकों ने मोराटोरियम के दौरान ब्याज़ पर लिया गया ब्याज़ कर्ज लेने वालों को वापस कर दिया था. इसके लिए सरकार ने बैंकों को आर्थिक सहायता भी दी थी.

# बतौर सजा ब्याज

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा है कि अगर दंड स्वरूप कोई ब्याज़ लिया गया है तो वो लौटाना पड़ेगा. ये वाला पॉइंट भी एक तरह पिछले वाले पॉइंट की तरह ही किसी भी हितधारक को प्रभावित करता नहीं लगता. क्यूंकि मोराटोरियम का मतलब ही था कि लोन न चुकाने पर किसी तरह की पेनल्टी नहीं लगेगी.

# रिलीफ़ पैकेज

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो सरकार द्वारा घोषित किए गए ‘सेक्टर स्पेसिफ़िक रिलीफ़ पैकेज’ के सवाल पर नहीं जाएगा. मतलब इस मामले में कुछ नहीं कहेगा. कोर्ट ने कहा-

आर्थिक नीतियों पर फैसलों को लेकर न्यायालय का दायरा बहुत सीमित होता है. इस केस में हम आर्थिक मामलों से जुड़ा कोई फ़ैसला नहीं देंगे. देश की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे अच्छा क्या है, वित्तीय राहत पैकेज कैसा होना चाहिए, ये सरकार और RBI को तय करना है. आमतौर पर अदालत आर्थिक नीतियों में दखल नहीं देता, जब तक कि ये न लगे कि ये नीतियां ‘दुर्भावनापूर्ण’ हैं.

# दो करोड़ से ज़्यादा लोन

ब्याज़ के ऊपर ब्याज़ पर छूट’ वाली राहत में उन लोगों को राहत नहीं दी गई थी, जिनकी लोन की राशि दो करोड़ या उससे अधिक थी. अब कोर्ट ने कहा है कि-

केवल2करोड़ रुपये तक के लोन पर चक्रवृद्धि ब्याज माफ करने का कोई औचित्य नहीं. मोराटोरियम पीरियड के दौरान ब्याज पर ब्याज याक्षतिपूर्ति ब्याज’ (कंपनसेशन इंट्रेस्ट)नहीं लगना चाहिए.फिर चाहे लोन की राशि कितनी ही हो.यदि ऐसी कोई राशि ली गई है तो उसे वापस कर दिया जाना चाहिए.

हालांकि इस वाले पॉइंट कोई लेकर अभी तक दो बातें साफ नहीं हैं-

# क्या कोर्ट ने ये 2 करोड़ वाली बात दोनों प्रकार के (यानी निजी और कॉर्पोरेट) लोन लेने वालों के लिए कही है या सिर्फ़ इंडीविज़ुअल (निजी) कर्ज लेने वालों के लिए?

# ये निर्देश है या टिप्पणी, इस पर भी अभी क्लैरिटी बाक़ी है. हालांकि पहली नजर में ये एक तरह से टिप्पणी भर ही लग रही है, क्यूंकि सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसले के शुरुआत में ही साफ़ कर दिया कि हम आर्थिक मामलों में फ़ैसला नहीं देंगे.

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को भी राहत दी. कोर्ट ने कहा कि सरकार और RBI ने कोई राहत देने की कोशिश नहीं की, ऐसा नहीं कहा जा सकता.


देखें: केंद्र की तरफ से राज्यों को आर्थिक मदद नहीं मिली, तो आम लोगों के लिए बड़ी मुसीबत होगी!

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