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BJP प्रवक्ता पर जूते से हमला करने वाला कानपुर का बहुत नामी आदमी है

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भाजपा प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते वक्त जूता फेंका गया है. जूता फेंकने वाले व्यक्ति से मिले आईडी कार्ड के मुताबिक ये शख्स कानपुर का रहने वाला है. नाम बताया जा रहा है शक्ति भार्गव.
शक्ति भार्गव कानपुर के बड़े परिवार से आता है. पढ़ाई-लिखाई से डॉक्टर है. साथ ही, कानपुर में इसका रियल इस्टेट का काम भी है.

कौन है शक्ति भार्गव
शक्ति का ताल्लुक कानपुर के नामी भार्गव परिवार से है. इस परिवार का कानपुर में अपना अस्पताल है. लेकिन, घटना के बाद जब शक्ति के परिवार से संपर्क किया गया तो परिवार का कहना है कि

शक्ति से उनका कोई संबंध नहीं है. शक्ति को 2 साल पहले ही बेदखल कर दिया था

शक्ति भार्गव पर इनकम टैक्स की जांच चल रही है. नवंबर 2018 के आखिरी हफ्ते में इसके ठिकानों पर छापेमारी की गई थी. इसके अलावा, 2016 के अखिरी महीनों में शक्ति भार्गव के माता-पिता के शक्ति और उसकी पत्नी के खिलाफ हाईकोर्ट गए थे. उन्होंने बेटे-बहू पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था. शक्ति के पिता का देहांत 2018 में हो गया था.

शक्ति भार्गव (तस्वीर- फेसबुक/शक्ति भार्गव)
शक्ति भार्गव (तस्वीर- फेसबुक/शक्ति भार्गव)

झगड़े की जड़
पूरे परिवार में झगड़े की वजह थी कानपुर की एक प्राइम प्रॉपटी. बीआईसी (British India Corporation Limited) के 3 बंगले. ये कानपुर के सिवल लाइंस इलाके में हैं. भार्गव परिवार ने ये बंगले काफी सस्ते दाम पर खरीदे थी. एक समय में इन बंगलों की क़ीमत 450 करोड़ बताई जा रही थी. लेकिन, भार्गव परिवार ने इसे सिर्फ साढ़े 11 करोड़ में ख़रीदा था.

आरोपों के मुताबिक, इस प्रॉपर्टी को शक्ति की मां डॉ दया भार्गव के नाम पर खरीदा गया था. लेकिन बाद में शक्ति ने एक कंपनी बनाई. स्काई लाइन निर्माण लिमिटेड के नाम से. मां और अपने भाई संजीव भार्गव को भी इस कंपनी में शामिल किया. बाद में प्रॉपटी को इस कंपनी के नाम ट्रांसफर करवा लिया. और फिर मां और भाई को कंपनी से निकाल दिया. यानी तीनों बंगलों का इकलौता मालिक बन गया. बीआईसी के इन बंगंलों की असल क़ीमत तो ज्यादा थी. लेकिन, किसी तरह से जुगाड़ भिड़ाकर इसे सस्ते में ख़रीदा गया था. इन्हें ख़रीदने के लिए बैंक से लोन लिया गया था. और उसके लिए गिरवी रखा गया था परिवार के नर्सिंग होम को.

जब माता-पिता को हाईकोर्ट ने राहत दी
शक्ति के माता-पिता उसके और उसकी पत्नी के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे थे. हाईकोर्ट ने माता-पिता के पक्ष को पक्ष को सही ठहराया था. और डीएम को आदेश दिया था कि शक्ति और उसकी पत्नी को घर से बाहर निकालकर माता-पिता को राहत दी जाए.

इनकम टेक्स और ईडी का शिकंजा
29 नवंबर, 2018 को इनकम टैक्स की 12 टीमों ने लखनऊ, कानपुर और बनारस में मौजूद भार्गव परिवार के ठिकानों पर छापेमारी की थी. ये रेड 3 दिन तक चलती रही. इनकम टैक्स को इनके पास से 28 लाख की विदेशी करंसी मिली थी. इसके अलावा 1 करोड़ 39 लाख की नकदी और 50 लाख के गहने भी बरामद किए थे. चूंकि मामला विदेशी करंसी से भी जुड़ा था तो इनकम टैक्स ने ये जांच ईडी को सौंप दी थी. भार्गव परिवार ने क़रीब 8 कंपनियां बनाई थीं. इनसे कारोबार तो हो रहा था लेकिन हिसाब-किताब में गड़बड़ की बातें सामने आ रही थीं.

जूता उछालने के बाद वहां खड़े लोगों ने शक्ति को तुरंत पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया.
जूता उछालने के बाद वहां खड़े लोगों ने शक्ति को तुरंत पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया.

बिना बताए गायब भी हो चुका है
19 जुलाई, 2014 को शक्ति भार्गव दिल्ली के पहाड़गंज इलाके से अचानक गायब हो गया था. जब पत्नी ने शिकायत दर्ज़ कराई थी तो पुलिस ने खोजबीन शुरू की थी. शक्ति बिना किसी को बताए मध्य प्रदेश के इटारसी में चला गया था. दिल्ली आने का कारण था सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई. शक्ति का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन डालने के बाद वो असुरक्षित महसूस कर रहा है. ये पिटीशन कानपुर में चल प्रॉपटी विवाद के बारे में थी.

शक्ति भार्गव के पुराने फेसबुक पोस्ट से पता चलता है कि वो मोदी सरकार का कड़ा आलोचक है. 16 अप्रैल, 2019 को लिखी एक पोस्ट में इसकी बानगी दिखती है. यहां मोदी सरकार पर नाकामी के आरोप लगाए हैं. कुछ फैक्ट्स रखे कि मोदी सरकार में ना ही PSU यानी सरकारी उपक्रमों की और ना ही वहां काम करने वाले लोगों की हालत अच्छी है. कुछ खबरों का संकलन भी पोस्ट किया है. जिसमें कुछ लोगों के सुसाइड की खबरों की मीडिया कवरेज भी दिख रही है.

अपने पोस्ट में शक्ति खुद को विसल ब्लोअर यानी घोटालों और अनियमितताओं का पर्दाफाश करने वाला बताया है. सच्चाई क्या है ये जल्द पता लग जाएगा. फिलहाल, पुलिस शक्ति को आई.पी. इस्टेट थाने में ले जाया गया है.


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