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EVM में गड़बड़ी के इल्ज़ामों का 'भेड़िया आया भेड़िया आया' में बदल जाना खतरनाक है

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पहले चुनाव हारने पर नेता कह देते थे कि वो जनता की भावना का सम्मान करते हैं. कुछ लोग रोते हुए (या कुछ उदाहरणों में तोड़फोड़ करते हुए) घर जाते थे. लेकिन अब नहीं. अब वो नतीजों पर सवाल उठाते हैं. कि ये सारा EVM का ‘खेल’ है. हाल में हुए यूपी नगर निकाय चुनाव में सहारनुर से निर्दलीय प्रत्याशी शबाना ने भी यही किया था. कहा कि उन्हें एक भी वोट नहीं मिला, खुद का भी नहीं. ये दावा करते हुए शबाना का वीडियो भी खूब वायरल हुआ था. लेकिन अब मामला क्लीयर हो चुका है. शबाना को वोट मिले हैं. एक नहीं, दो नहीं पूरे 87. ये जानकारी चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मौजूद है.

चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक शबाना को 87 वोट मिले हैं
चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक शबाना को 87 वोट मिले हैं

सहारनपुर के वार्ड नंबर-54 से प्रत्याशी शबाना के पति इकराम का दावा था कि उन्हें बूथ नंबर-387 और 388 पर एक भी वोट नहीं मिला है. उनका कहना था कि 300 वोट उनके अपने परिवार में हैं. इनके अलावा लगभग 600 और लोगों ने उनकी पत्नी को वोट दिया है. तो कम से कम 900 वोट तो शबाना को मिलने ही चाहिए थे. इकराम ने कहा था, ‘EVM में सौ के सौ परसेंट गड़बड़ है.’ वो चाहते थे कि इस मामले की जांच हो. लेकिन जांच होती, इससे पहले ही शबाना और इकराम के दावे की हवा निकल गई है.

लेकिन बात यहां खत्म नहीं होती

शबाना का दावा गलत निकला. ठीक उसी तरह जैसे बृहन्नमुंबई निकाय चुनाव में श्रीकांत सिरसत का दावा गलत निकला था. साकी नाका के वार्ड नंबर 164 से कैंडिडेट श्रीकांत सिरसत ने डिट्टो वही कहा था जो शबाना ने कहा था. कि जब मैंने खुद को वोट दिया था तो मुझे ज़ीरो वोट कइसे मिला. और पीछे जाएंगे तो मध्यप्रदेश के भिंड में EVM टैम्परिंग की शिकायत भी गलत निकली थी. लेकिन इन तीनों घटनाओं ने सनसनी ज़रूर पैदा की. और ये सनसनी बड़ी खतरनाक चीज़ है.

चुनाव आयोग EVM मशीनों के साथ VVPAT सेट लगाकर उन्हें और पारदर्शी बनाने की कोशिश कर रहा है
चुनाव आयोग EVM मशीनों के साथ VVPAT सेट लगाकर उन्हें और पारदर्शी बनाने की कोशिश कर रहा है.

EVM से छेड़छाड़ संभव है या नहीं, ये अभी एक खुला प्रश्न है. चुनाव आयोग के अपने तर्क हैं और EVM के आलोचकों के भी. लेकिन जब शबाना या श्रीकांत सिरसत या भिंड जैसे मामले सामने आते हैं, तब EVM की आलोचना ‘भेड़िया आया – भेड़िया आया’ वाले सिंड्रोम का शिकार हो जाती है. भिंड में EVM टैम्परिंग की शिकायत गैरज़िम्मेदार रिपोर्टिंग का नतीजा थी और श्रीकांत सिरसत के मामले में तो खुद श्रीकांत के दो बूथ पर पंजीकृत होने की बात सामने आई थी, जो कि रेप्रेज़ेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट के तहत गलत है. अब ये शबाना से पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने या उनके पति ने जो कहा, वो क्यों कहा.

एक पारदर्शी चुनाव जिसमें सभी पक्षों को जीतने का मौका मिले, लोकतंत्र की अनिवार्य शर्त हैं. चुनाव तभी निष्पक्ष कहा जा सकता है जब जीतने वाले के साथ हारने वाला भी नतीजों से संतुष्ट हो. इसलिए EVM की विश्वश्नीयता से जुड़े सवाल बेहद गंभीरता से टटोले जाने चाहिए. शबाना ने जिस तरह के आरोप लगाए हैं, वो EVM से जुड़ी बहस की गंभीरता कम करते हैं. ये रुकना चाहिए.


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