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हिंदू राष्ट्र की बात करते-करते पाकिस्तान की बात क्यों करने लगे संघ प्रमुख भागवत?

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RSS के स्थापना दिवस पर सरसंघचालक मोहन भागवत ने देश के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी. भागवत के भाषण में नई सरकार, मॉब लिंचिंग, अर्थव्यवस्था, आर्टिकल 370 और महिला शक्तिकरण का ज़िक्र हुआ. भागवत ने कहा कि लिंचिंग शब्द भारतीय परंपरा का हिस्सा नहीं है. इसका इस्तेमाल भारत को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है. विजयदशमी के मौके पर हुए संघ के कार्यक्रम में HCL के संस्थापक शिव नाडर मुख्य अतिथि थे. नीचे पढ़िए भागवत के भाषण की बड़ी बातें.

‘लिंचिंग शब्द हमारा नहीं था’

‘लिंचिंग जैसा शब्द हमारे यहां कभी था नहीं. जहां ऐसी घटनाएं होती रही हैं, वहां से ऐसा शब्द आया. बाहर के देशों में घटनाएं हुईं हैं. हमारे यहां ऐसी घटनाएं नहीं हुईं. यहां कुछ छिटपुट ऐसी घटनाएं हुईं हैं. सभी मानते हैं कि कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. ये दूसरे देश से आई हुई परंपरा है जिसे हम पर थोपा जा रहा है. बाहर से आए शब्दों का इस्तेमाल कर हमारे देश को बदनाम करने की कोशिश होती है. इतनी विविधता वाले या छोटी पहचान वाले लोग इतनी शांति से दुनिया में रहते हो ऐसा कहीं है क्या? नहीं है.’

हिंदुस्तान एक हिंदू राष्ट्र है
भागवत ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को घेरते हुए हिंदू राष्ट्र की बात दोहरा दी. कहा,

‘अपने दुष्कर्मों में सफल नहीं होते तो संघ को रोको, यह बात तो अब इमरान खान भी सीख गए हैं. संघ कहता है कि हिंदू तो इसमें मुसलमानों का विरोध की बात कहां से आ गई है? हिंदू का संगठन करना, किसी का विरोध करना नहीं है. संघ पहले से कहता रहा है, हिंदुस्तान एक हिंदू राष्ट्र है. धर्म सबका एक है, मानव धर्म. ‘मेरी ही बात सही है’ नहीं, ‘मेरी भी बात सही है’ का भाव होना चाहिए. बंधु धर्म को हिंदू धर्म कहते हैं. कुछ लोग कहते हैं, इसे हिंदू नहीं भारतीय कहो. ठीक है, आप कहो, हम समझते हैं कि आप क्या कहना चाहते हैं.’

अर्थव्यवस्था की चिंता करें, चर्चा नहीं
मोहन भागवत ने अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए कहा,

मंदी आई. मंदी है या नहीं, मुझे नहीं पता. यदि ऐसा है तो चिंता करनी चाहिए, लेकिन चर्चा करने का कोई औचित्य नहीं है. सरकार ने उपाय करते हुए संवेदनशीलता का परिचय दिया है. जैसे हमारे मुख्य अथिति (शिव नाडर) ने कहा, सरकार अकेले नहीं कर पाएगी, हमें भी कुछ करना होगा. हमारे आर्थिक क्षेत्र में कई दिग्गज लोग हैं. और वे केवल अपने मुनाफे की चिंता करने वाले लोग नहीं हैं. ऐसी किसी भी समस्या से हम आसानी से बाहर आ सकते हैं, ऐसी क्षमता हमारी है. इसका सबसे पहला उपाय यह है कि हमें खुद को सशक्त बनाना है. हम सशक्त नहीं होंगे तो बाहर के लोग भी हमारी मदद नहीं कर पाएंगे.’

हमारी अर्थव्यवस्था में छिद्र थे. छिद्र भरने का काम अच्छा चला है. ऐसे काम के लिए कड़ाई करनी पड़ती है, बहुत अच्छी तरह कड़ाई हो रही है.’

शिव नाडर से पहले रत्न टाटा, अज़ीम प्रेमजी भी RSS के कार्यक्रम का हिस्सा बन चुके हैं.
शिव नाडर से पहले रत्न टाटा, अज़ीम प्रेमजी भी RSS के कार्यक्रम का हिस्सा बन चुके हैं.

स्वदेशी राग में FDI और निजीकरण को जस्टिफाई किया
स्वदेशी की बात करने वाले RSS प्रमुख ने कहा,

‘सरकार प्रयास कर रही है. पूंजी चाहिए तो FDI का आमंत्रण कर रही है. कुछ उद्योगों का निजीकरण भी चल रहा है. ये उपाय है कभी ऐसे भी हो सकता है कभी वैसे भी. लेकिन इसका इलाज है कि हमें सशक्त बनना होगा. तभी बाहर से FDI आएगा. हम संघ ने लोग तो स्वदेशी वाले लोग हैं. स्वदेशी का मतलब दुनिया से आर्थिक संबंध खत्म करना नहीं है. सबसे अधिक स्वदेशी वाले जानते हैं कि आज का युग परस्पर संबंध का है. दुनिया पास में आ गई है. घनिष्ठ संबंध रखने पड़ते हैं. स्वदेशी का अर्थ है- अपनी शर्तों पर सभी देशों से व्यपारिक संबंध बनाने का नाम है स्वदेशी.’

आर्टिकल 370 पर साहसी फैसला
भागवत ने सरकार की सराहना करते हुए कहा,

‘साहसी और कठोर निर्णय लेने की क्षमता इस सरकार में है, यह भी साफ हो गया. जनसंघ का जन्म के बाद पहला आंदोलन 370 हटाने को लेकर ही था. मन बनया और राज्यसभा और लोकसभा में अन्य दलों का सहयोग लेकर इस काम को किया गया. कुशलता से किया. पीएम और गृहमंत्री की इसके लिए बहुत प्रशंसा हुई.’

चंद्रयान-2 से हुई भारत की सराहना
संघ प्रमुख ने कहा,

चांद के दक्षिणी ध्रुव को किसी ने छूने का साहस नहीं किया था, हमारे वैज्ञानिकों ने किया. पूर्ण सफलता नहीं मिली, लेकिन जितनी मिली, वो भारत की बौद्धिकता को जमाने के लिए पर्याप्त थी. पूरी दुनिया ने हमारी सराहना की. हमारे वैज्ञानिकों के इस साहस के कारण ही देश की जनता में वैज्ञानिकों के प्रति विश्वास बढ़ा है.

सैनिकों और चौकियों की संख्या बढ़ाने की ज़रूरत
भागवत ने कहा,

‘सिर्फ इतने से काम नहीं चलेगा. अभी बहुत दूर जाना है. विश्व का सिरमौर भारत को खड़ा करने के लिए अभी लंब चलना है. यह काम बहुत कठिन है. ऐसा न होने देना चाहने वाले लोग भी हैं. वे रोड़ा अटकाने की कोशिश करते हैं. कई मामलों को लेकर प्रतिस्पर्धा चलती है. राजनीति की वजह से भी गतिरोध होता है. सकंट आते हैं, उन्हें दूर करना होगा.

हमारा देश पहले से अधिक सुरक्षित है, सेना का मनोबल और सीमा बंदोबस्त और बेहतर हुआ है, पिछले दिनों हम सबको इसका आभास हुआ है. हमें चौकियों और सैनिकों की संख्या बढ़ाने की ज़रूरत है. पूर्व की सीमा पर खासकर. टापुओं पर भी चौकसी की जरूरत है. देश के अंदर होने वाली उग्रवादी घटनाओं में कमी आई है.’

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महिलाओं की सुरक्षा पर
भागवत ने कहा

‘महिलाओं को सशक्त और समर्थ बनाने के लिए उन्हें अवसर दें, स्वतंत्रता दें, सहायता करें और उनके राह को रोकिए मत. उन्नति के मार्ग पर वे चल सकें, इतना बल उनके पैरों में है. हमारी मातृशक्ति न घर में सुरक्षित और न ही बाहर, यह हमारे लिए शर्म जैसी स्थिति है.’

 


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