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योगी सरकार ने मुजफ्फरनगर दंगों के 77 केस वापस ले लिए और कारण भी नहीं बताया

10 अगस्त 2021. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राजनीति में बढ़ रहे अपराधीकरण को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया. कोर्ट ने निर्देश दिया कि कोई भी राज्य सरकार हाईकोर्ट की अनुमति के बिना मौजूदा या पूर्व सांसद या फिर विधायक पर से मुकदमा वापस नहीं ले सकती. इस लेकर राज्यों से स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई. यूपी सरकार की तरफ से दी गई रिपोर्ट 24 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई. रिपोर्ट को अदालत की तरफ से नियुक्त एमाइकस क्यूरी विजय हंसारिया ने पेश किया. इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं. यूपी सरकार ने बताया है कि 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से संबंधित 77 आपराधिक मामले वापस लिए गए हैं. जिन धाराओं में ये केस दर्ज थे, उनमें अधिकतम सजा आजीवन कारावास है.

यूपी सरकार ने केस वापस लिए, कारण नहीं बताया

साल 2013 में मुजफ्फरनगर में दंगे हुए थे. इनमें 62 लोगों की जान चली गई थी. हजारों लोग बेघर हुए थे. इस मामले में शीखेड़ा थाना इंचार्ज ने खुद ही नोटिस लेकर संगीत सोम, कपिल देव अग्रवाल, सुरेश राणा, साध्वी प्राची आदि लोगों पर भड़काऊ भाषण देने और समुदाय विशेष के खिलाफ उकसाने के आरोप में केस दर्ज कराया था. इन्हीं दंगों से जुड़े 77 आपराधिक मामलों को वापस लिए जाने की जानकारी यूपी की योगी सरकार ने अब दी है.

एमाइकस क्यूरी विजय हंसरिया ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राज्य सरकार की सूचना के मुताबिक 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों में कुल 6869 आरोपियों के खिलाफ 510 मामले मेरठ जोन के पांच जिलों में दर्ज किए गए थे. इन 510 मामलों में से 175 में आरोप पत्र दायर किए गए. 165 मामलों में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की गई, और 170 मामलों को हटा दिया गया था. इसके बाद राज्य सरकार द्वारा सीआरपीसी की धारा 321 के तहत 77 मामले वापस ले लिए गए. सरकारी आदेश में मामला वापस लेने का कोई कारण भी नहीं बताया गया. केवल यह कहा गया है कि प्रशासन ने पूरी तरह से विचार करने के बाद विशेष मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया है.

बता दें कि CRPC की धारा-321 के तहत राज्य सरकारों को केस वापस लेने का अधिकार दिया गया है. हालांकि 10 अगस्त को कोर्ट ने कहा था कि मामले सिर्फ जनहित में या अन्याय होने की स्थिति में ही हटाए जा सकते हैं, न कि राजनीतिक फायदे के लिए.

एमाइकस क्यूरी हंसारिया ने सुप्रीम कोर्ट को ये जानकारी भी दी है कि मुजफ्फरनगर दंगों से संबंधित जिन मामलों को वापस लिया गया है, उन पर हाई कोर्ट CRPC की धारा 402 के तहत जांच कर सकता है.

Sangeet Som
सुरेश राणा (बांई ओर) और संगीत सोम (बीच में) के खिलाफ मुजफ्फरनगर दंगे से जुड़े केस योगी सरकार ने इसी साल मार्च में वापस ले लिए थे. (फाइल फोटो-आज तक)

इन राज्यों ने भी खत्म कर दिए केस

एमाइकस क्यूरी विजय हंसारिया ने कई और राज्यों की स्टेटस रिपोर्ट भी कोर्ट में दाखिल की है. कर्नाटक सरकार ने भी यूपी की तर्ज पर बिना कोई कारण बताए 62 मामले वापस ले लिए हैं. स्क्रॉल की 3 सितंबर, 2020 की एक खबर के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की अगुवाई वाली सरकार ने पार्टी सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने का फैसला किया था. मौजूदा सीएम बसवराज बोम्मई उस समय राज्य के गृह मंत्री थे. उन्हीं की अगुवाई में गठित कमेटी की सिफारिश पर ये फैसला लिया गया था. इनमें तत्कालीन कानून मंत्री जेसी मधुस्वामी और टूरिजम मंत्री सीटी रवि के खिलाफ दर्ज केस भी शामिल थे. दोनों पर सेक्शन 143 (अवैध तरीके से इकट्ठा होने) और 147 (दंगा) के आरोप में केस दर्ज थे. ये मामला 2015 में मैसूर जिले के हुनसुर शहर में दो समुदायों के छात्रों के बीच हुई हाथापाई से संबंधित था. यूपी और कर्नाटक ही नहीं, तमिलनाडु ने 4 और तेलंगाना ने 14 मामले वापस लिए हैं. केरल ने तो ऐसे 36 मामले वापस लिए हैं. इस मामले पर चीफ जस्टिस एन वी रमणा की अगुआई वाली बेंच सुनवाई करेगी.


वीडियो – सुप्रीम कोर्ट ने सांसद और विधायकों के खिलाफ क्रिमिनल केस वापस लेने के मामले में क्या कहा है?

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